@ कमल उनियाल उत्तराखंड :-
उत्तराखंड अपनी लोक संस्कृति लोकपर्व, त्यौहारौ के लिए जाना जाता है। हर पर्व को यहाँ के हर्षोल्लास से मनाते है संस्कृति और विरासत के अनोखे संगम मकर संक्रांति के दिन यहाँ गिंदी कौथिग का आयोजन होता है मकर संक्रांति मकरेण को पावन पर्व गेंद का मेला का आयोजन होता है।

मकर संक्रांति को द्वारीखाल विकास खंड द्वारीखाल में डाडामंडी, देवीखेत, दालिमखेत, कलसी, थलनदी में भव्य मेला का आयोजन होता है। गढवाल की संस्कृति में रचा गिंदी कौथिग यादों के झरोंखो का अमिट छाप छोड गया। देवीखेत में लगने वाला गिंदी कौथिक में सुबह से ही कौथिगरो की भारी भीड उमड पडी।
गिंदी कौथिग में गेंद को अपने पाले में करने के लिए जमकर प्रदर्शन हुआ। तरह तरह की खरीददारी तथा अन्य पकवान खाने के बाद जिसका सभी को इन्तजार रहता है वह संघर्ष रोमांच से भरा बीस किलो का गिंदोडा नामक फल से सिला गेंद को अपने पाले करने के लिए मल्लयूद्ध होता है अपने पाले में गेंद को करने के लिए खिलाड़ी जीजान लगा देते हैं।
देवीखेत मेला में दिखेत के विष्ट बन्धुओं और ढौंरी के नेगी बन्धु अपने कुल देवता के ध्वज के साथ ढोल दमाऊ के ताल पर नृत्य करते हुए आयोजन स्थल पर पहुंचे। फिर गेंद को अपने पाले में करने के लिए जोरदार संघर्ष देखने को मिला इस संघर्ष में दिखेत और ढौंरी बीच जमकर जोर अजमाइश के बीच ढौंरी ने बाजी मारी। उधर डाडामंडी में देर रात तक लंगूर पट्टी और भटपुडी के बीच संघर्ष में लंगूर ने विजय प्राप्त की। खेल के दौरान कोई अनहोनी न हो लोग अपने मंदिर के ध्वज लेकर चलते है।



