एचसीएम रीपा में यूनेस्को के सहयोग से ‘मास्टरक्लास विद यूनेस्को’ का आयोजन

@ जयपुर राजस्थान :-

एचसीएम राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान में सोमवार को यूनेस्को के सहयोग से ‘मास्टरक्लास विद यूनेस्को’ कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और सिविल सेवा प्रशिक्षुओं को वैश्विक धरोहर संरक्षण, प्रबंधन तथा प्रशासन में कृत्रिम एआई  के उपयोग की बारीकियों से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम के आरंभ में संस्थान की महानिदेशक एवं एसीएस ट्रेनिंग मती श्रेया गुहा ने यूनेस्को, दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय की प्रोग्राम स्पेशलिस्ट यूंसोंग किम और कल्चर सेक्टर के प्रोग्राम ऑफिसर आनंद कानिटकर का पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान अपनी समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों को विकास कार्यों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के दौरान धरोहरों की अखंडता और उनके उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य को सुरक्षित रखने के तकनीकी पहलुओं को गहराई से समझना चाहिए।
विश्व धरोहर प्रबंधन और हेरिटेज इम्पेक्ट असेसमेंट-
आनंद कानिटकर ने कहा कि धरोहर किसी एक समुदाय या देश की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की साझी विरासत है, जिसका एक उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य होता है। उन्होंने ड्रेस्डेन, लिवरपूल और अबू सिम्बेल (मिस्र) जैसे अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों का उल्लेख करते हुए बताया कि मेट्रो परियोजना या फ्लाईओवर निर्माण जैसे आधुनिक विकास कार्यों के दौरान बफर जोन की अनदेखी होने पर ऐतिहासिक स्थलों के विश्व धरोहर दर्जे पर संकट आ सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़ी शहरी विकास परियोजना या मेट्रो लाइन से पहले हेरिटेज इम्पेक्ट असेसमेंट (एचआईए) और आपदा जोखिम न्यूनीकरण का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सुशासन और वैश्विक पहल-
यूंसोंग किम ने शासन व्यवस्था और सेवा वितरण में एआई के प्रभावी और समावेशी उपयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज में हर व्यक्ति की भूमिका अलग होती है, इसलिए एआई का उपयोग करने वाले पांच वर्ग हैं— एआई यूजर्स, एआई स्टूअर्ड्स, एआई डिसीजन मेकर्स, एआई सिस्टम डिजाइनर्स और एआई कनेक्टर्स। इन सभी भूमिकाओं के लिए अलग-अलग योग्यताओं और क्षमताओं की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल और एआई क्षेत्र में महिलाओं से जुड़े डेटा की भारी कमी है, जिसके कारण एआई प्रणालियों में जेंडर असमानता दिखाई देती है। किम ने कहा कि शासन और प्रशासन में एआई का उपयोग मानव पीड़ा को कम करने और जेंडर-डिसएग्रीगेटेड डेटा को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि सरकारी एजेंसियों और प्रोक्योरमेंट निकायों के लिए यूनेस्को ने ‘एथिकल इंपैक्ट असेसमेंट’ टूलकिट और दिशा-निर्देश तैयार किए हैं, ताकि खरीदी जाने वाली एआई प्रणालियां पूरी तरह नैतिक और पारदर्शी हों।
समापन सत्र में अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए मती श्रेया गुहा ने कहा कि आज हर क्षेत्र और विभाग में एआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिसे पूरी सावधानी और एहतियात के साथ देखने की आवश्यकता है। उन्होंने डीओआईटी विभाग से कहा कि वह प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर स्पष्ट नीति बनाने की दिशा में कार्य करे, ताकि डिजिटल तकनीक के उपयोग में पूरी पारदर्शिता और मानवीय संवेदनशीलता बनी रहे।
कार्यशाला से अधिकारियों को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रशासनिक नीतियों, डिजिटल दक्षता और धरोहर संरक्षण की योजनाओं को लागू करने में उपयोगी मार्गदर्शन मिला। इस दौरान कार्यशाला में भाग लेने वाले विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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