@ नई दिल्ली :-
WHO ने Mpox को लेकर दुनिया को राहत की खबर दी है। अफ्रीका में तेजी से Mpox फैलने के बाद WHO ने पिछले साल अगस्त में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित की थी। फिलहाल विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि Mpox अब पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी नहीं है।

WHO की आपातकालीन समिति हर तीन महीने में Mpox के प्रकोप का मूल्यांकन करती रही है। WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा शुक्रवार को समिति ने फिर से बैठक की और सलाह दी कि मौजूदा स्थिति अब इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी नहीं है। मैंने इस सलाह को स्वीकार कर लिया है।
हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि आपातकाल हटाना इसका मतलब नहीं है कि खतरा खत्म हो गया है या हमारी प्रतिक्रिया रुक जाएगी। उन्होंने बताया कि अफ्रीका सीडीसी ने गुरुवार को Mpox को अभी भी महाद्वीपीय पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी माना है।
बयान में कहा गया है कि अभी भी नए प्रकोप और फ्लेयर-अप की संभावना बनी हुई है जिसके लिए लगातार मॉनिटरिंग और रिस्पॉन्स जरूरी है। छोटे बच्चों और एचआईवी से पीड़ित लोगों के लिए खतरा सबसे बड़ा है। इसलिए इन लोगों की सुरक्षा के लिए निरंतर प्रयासों की जरूरत है।
Mpox एक वायरल जूनोटिक बीमारी है जो जानवरों से मनुष्यों में फैलती है। शुरुआती लक्षणों में बुखार सिरदर्द मांसपेशियों में दर्द पीठ दर्द और लिम्फ नोड्स में सूजन शामिल हैं। इसके कारण बाद में चेहरे और शरीर पर दाने उभर आते हैं। अधिकतर संक्रमित व्यक्ति कुछ हफ्तों में ठीक हो जाते हैं लेकिन कुछ मामलों में यह बीमारी गंभीर हो सकती है या मृत्यु भी हो सकती है।
मई 2022 से दुनिया भर में 100 से अधिक देशों और क्षेत्रों में मंकीपॉक्स के मामले सामने आए हैं। अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका सीडीसी) ने गुरुवार को कहा कि Mpox अभी भी एक ‘महाद्वीपीय पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी’ बना हुआ है। अफ्रीका के कई देशों में नए मामलों में तेजी देखने को मिली है।
अफ्रीका सीडीसी ने एक बयान में कहा कि घाना लाइबेरिया केन्या जाम्बिया और तंजानिया जैसे देशों में Mpox के मामलों में नई लहर देखी जा रही है भले ही पूरे महाद्वीप में साप्ताहिक पुष्ट मामलों में 52 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई हो।
