@ नई दिल्ली :-
भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने आज भारतीय वायुसेना में अपनी अंतिम उड़ान भरकर सेवा, समर्पण और गुरु-शिष्य परंपरा की एक भावुक मिसाल पेश की। इस ऐतिहासिक उड़ान में उनके साथ उनके पहले फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर विंग कमांडर वीएस कोचर (सेवानिवृत्त) भी मौजूद रहे। खास बात यह रही कि दोनों ने उसी एचजेटी-16 किरण विमान में उड़ान भरी, जिसमें 28 जनवरी 1984 को एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की उड़ान यात्रा शुरू हुई थी।

हैदराबाद स्थित एयर फोर्स अकादमी, डुंडीगल में हुआ यह क्षण उनके लंबे विमानन करियर के एक यादगार पड़ाव के रूप में सामने आया। दशकों पहले जिस विमान में उन्होंने उड़ान का पहला पाठ सीखा था, उसी विमान में अपने पहले प्रशिक्षक के साथ अंतिम उड़ान भरना उनके लिए एक विशेष अनुभव रहा।
यह उड़ान केवल एक औपचारिक विदाई नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना की समृद्ध विरासत, उड़ान के प्रति अटूट जुनून और प्रशिक्षक तथा पायलट के बीच बने रहने वाले आजीवन संबंध का प्रतीक भी बनी। इस अवसर ने उन पूर्व सैनिकों और मार्गदर्शकों के योगदान को भी सम्मान दिया, जिन्होंने पीढ़ियों से वायु योद्धाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें राष्ट्रसेवा के लिए तैयार किया है।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की यह अंतिम उड़ान इस बात का संदेश देती है कि वर्दी में सेवा का सफर भले ही एक दिन पूरा हो जाए, लेकिन उससे जुड़ी यादें, सीख और प्रेरणा हमेशा जीवित रहती हैं। पहली उड़ान के पहले पाठ से लेकर अंतिम sortie तक, यह यात्रा भारतीय वायुसेना की गौरवशाली परंपरा और गुरु-शिष्य के अटूट रिश्ते को सलाम करती है।

