@ पणजी गोवा :-
आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के स्वच्छ भारत मिशन – शहरी (SBM-U) 2.0 के अंतर्गत ‘वेस्ट टू वेल्थ’ का संकल्प साकार करते हुए गोवा एक अनूठे पर्यावरण हितकारी परिवर्तन का साक्षी बनने जा रहा है। राज्य सरकार की इस ‘डिपॉजिट रिफंड स्कीम’ के माध्यम से गोवा, भारत के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल होने जा रहा है, जो ज़िम्मेदार कचरा प्रबंधन को एक वित्तीय प्रोत्साहन देने वाले मॉडल के रूप में लागू कर रहे हैं। गोवा में पणजी नगर निगम के मुताबिक इस योजना का प्रथम चरण जल्द ही पूरे राज्य में प्रभावी रूप से लागू कर दिया जाएगा।

शहरी और पर्यटन अर्थव्यवस्था की चुनौतियां : भारतीय शहरों में पैकेजिंग वेस्ट, विशेष रूप से पेय पदार्थों की खपत से उत्पन्न होने वाले कूड़े में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। प्लास्टिक एवं कांच की बोतलें, एल्युमीनियम की कैन और मल्टी-लेयर पैकेजिंग (Multilayer Packaging – MLP) जैसा अपशिष्ट अक्सर वर्तमान कचरा संग्रह प्रणालियों से बाहर रह जाता है। ये अपशिष्ट सामग्री विशेष रूप से समुद्र तटों, सड़कों, बाजारों और परिवहन केंद्रों पर अक्सर देखने को मिलती है। गोवा, एक प्रमुख पर्यटन स्थल होने के नाते, इस चुनौती का सामना और भी तीव्रता से कर रहा है।

योजना के तीन प्राथमिक उद्देश्य : नगर निगम और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा साझा की गई रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नीति का प्राथमिक उद्देश्य राज्य के ईको-सिस्टम को पूरी तरह अपशिष्ट एवं प्रदूषण मुक्त बनाए रखना है। यह योजना तीन मुख्य उद्देश्यों को हासिल करना चाहती है, जिनमें पहली स्रोत पर अपशिष्ट की रिकवरी कर कचरे को मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) सेंटर्स पर पहुंचाकर मिश्रित कचरे में मिलने से पहले ही रोकना है। अक्सर दिखाई देने वाले कचरे को खत्म कर सार्वजनिक स्थलों और समुद्र तटों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को साफ बनाए रखना है। रीसाइक्लिंग में दक्षता हासिल करना है, ताकि स्वच्छ सामग्री के प्रवाह से रीसाइक्लिंग प्रक्रिया को मजबूत बनाए रखना भी अहम है।

नागरिकों पर केंद्रित रिवॉर्ड सिस्टम : इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका नागरिकों पर केंद्रित रिवॉर्ड सिस्टम है। इसके तहत, चिन्हित उत्पादों की खरीदारी के दौरान उनके बाजार मूल्य के ऊपर मामूली ‘रिफंडेबल डिपॉजिट’ या ग्रीन डिपॉजिट देना होगा। ग्राहक द्वारा जमा की गई यह अतिरिक्त राशि तब तक पैकेजिंग यूनिट से जुड़ी रहती है, जब तक उसे वापस नहीं किया जाता। इस्तेमाल के बाद, उपभोक्ता द्वारा खाली पैकेजिंग या बोतल आदि को विभागों द्वारा निर्धारित केंद्रों पर लौटाने पर यह राशि तुरंत उसे लौटा दी जाएगी। योजना के अंतर्गत खरीदारी के समय ग्राहकों को QR-लिंक्ड उत्पाद उपलब्ध कराए जाएंगे, जो लौटाए जाने पर भुगतान से पहले आसानी से स्कैन किए जा सकेंगे।

शुरुआती चरण में, इस नीति को रणनीतिक रूप से केवल कांच की बोतलों (Glass Bottles) पर लागू किया जा रहा है, क्योंकि पर्यटन प्रधान राज्य होने के नाते गोवा में कांच का कचरा एक बड़ी चुनौती रहा है। आगामी चरणों में इसे मल्टी-लेयर प्लास्टिक और पॉलीइथाइलीन टेरेफ्थेलेट बोतलों तक विस्तारित करने की योजना है। खरीदारी के समय जमा की जाने वाली राशि प्रति बोतल ₹2 से ₹10 तक होगी, जो एक (व्यवहार बदलने वाले प्रोत्साहन) के रूप में कार्य करेगी।
व्यापक रिटर्न ईकोसिस्टम : इस पहल के अंतर्गत नागरिकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने बहु-स्तरीय ढांचा तैयार किया है, जिसमें संग्रहण केंद्रों को शहरी ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत रिटेल और कम्युनिटी पॉइंट्स को भी जोड़ा गया है, जिसमें खुदरा दुकानें और सामुदायिक प्रतिष्ठान भी शामिल हैं। यह सेवाएं डोर-स्टेप के कॉन्सेप्ट पर भी विकसित की जा रही हैं, ताकि घरों से लेकर बड़े संस्थानों (Bulk Generators) के लिए संग्रह की सुविधाएं सुनिश्चित की जा सकें।
DRS फ्रेमवर्क के तहत, हर एक बोतल या यूनिट पर एक निश्चित रिफंडेबल डिपॉजिट तय है। यह ‘पर-यूनिट वैल्यू मैकेनिज्म’ खास तौर पर सफाईमित्रों को कुछ सामग्रियों से काफी अधिक कमाई करने की अवसर देगा, जिससे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकेगा। यह योजना न केवल सड़कों और लैंडफिल से कचरे का बोझ कम करेगी, बल्कि मुख्य रूप से समुद्र तटों की स्वच्छता व सुंदरता में भी अभूतपूर्व परिवर्तन लाने का काम करेगी। यह योजना स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के साथ-साथ ‘ईज ऑफ लिविंग’ और सर्कुलर इकॉनमी को भी बढ़ावा देगी।
