@ गांधीनगर गुजरात :-
कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की मुख्य आधारस्तंभ है और देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आज टेक्नोलॉजी के उपयोग से किसानों के लिए बाजार तक पहुँच और बिक्री की प्रक्रिया सरल बन रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने किसानों के हित में निर्णय लेकर वर्ष 2016 में इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट (ई-नाम) पोर्टल लॉन्च किया था, जो कृषि उत्पादों की बिक्री के लिए एक एकीकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है। गुजरात में ई-नाम पोर्टल से 8.87 लाख से अधिक लोग जुड़े हैं; जिनमें 8,69,922 किसान, 10,291 व्यापारी, 7,191 कमीशन एजेंट और 461 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) शामिल हैं।
ई-नाम पर राज्य की 144 मंडियाँ एकीकृत, 12,000 करोड़ रुपए से अधिक के कृषि उत्पादों की बिक्री
मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात में किसानों को कृषि उत्पादों की बिक्री के लिए बेहतर अवसर मिल रहे हैं। ई-नाम पोर्टल के माध्यम से किसान अपने उत्पादों को ऑनलाइन बेचकर अधिक खरीदारों तक पहुँच सकते हैं। इससे उन्हें अपने उत्पादों के बेहतर दाम प्राप्त करने में मदद मिलती है। राज्य की 144 मंडियाँ ई-नाम पोर्टल से जुड़ी हुई हैं। अब तक गुजरात में ई-नाम के माध्यम से 12,740.60 करोड़ रुपए मूल्य के 3.20 करोड़ क्विंटल से अधिक कृषि उत्पादों की बिक्री हुई है।

ई-नाम (ई-नाम) क्या है ?
नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट (ई-नाम) एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है, जो विभिन्न एपीएमसी मंडियों को एक ही बाजार व्यवस्था के साथ जोड़ता है। कृषि मंत्रालय अंतर्गत स्मॉल फार्मर्स एग्रीबिजनेस कंसोर्टियम (एसएफएसी) द्वारा संचालित यह प्लेटफॉर्म कृषि उत्पादों की बिक्री की प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाता है। यह बिचौलियों पर निर्भरता कम करने के साथ मांग तथा आपूर्ति के आधार पर उत्पादों के बाजार भाव जानने में भी मदद करता है। ई-नाम से किसानों को पारदर्शी नीलामी, गुणवत्ता के अनुसार दाम और समय पर ऑनलाइन भुगतान का लाभ मिलता है।
ई-नाम से उपलेटा मार्केट समिति के हरीश घोडासरा की आय में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई
उना मार्केट समिति के परबतभाई पटात पिछले एक वर्ष से ई-नाम के माध्यम से मूंगफली बेच रहे हैं। परंपरागत स्थानीय बाजार की तुलना में ई-नाम पर बिक्री की प्रक्रिया तेज है और उन्हें प्रत्येक बिक्री पर 200 से 500 रुपए अधिक मिलते हैं। उनके अनुसार इसके परिणामस्वरूप उनकी कुल आय में लगभग 5 से 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ई-नाम पर मूंगफली के अच्छे दाम मिलने के साथ बिक्री की राशि सीधे बैंक खाते में जमा होने से प्रक्रिया भी सरल बनती है।
उपलेटा मार्केट समिति के हरीश घोडासरा भी पिछले पाँच वर्षों से ई-नाम के माध्यम से कपास, मूंगफली और गेहूँ बेच रहे हैं। उनके अनुसार स्थानीय बाजार की तुलना में ई-नाम के माध्यम से बिक्री करने से उनकी आय में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इतना ही नहीं; व्यापारियों के साथ सीधा संपर्क होने से कमीशन का खर्च बचता है और बिक्री की राशि सीधे बैंक खाते में जमा होती है। ई-नाम से मिलने वाले आर्थिक लाभों के कारण आज वे अपने कृषि उत्पाद ऑनलाइन बेचना पसंद करते हैं।
ई-नाम के सफल क्रियान्वयन द्वारा गुजरात टेक्नोलॉजी आधारित कृषि विकास एवं सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
