@ गांधीनगर गुजरात :-
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने शनिवार को 76वें वन महोत्सव का राज्यव्यापी प्रारंभ कराते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दिशादर्शन में गुजरात ने सर्वग्राही पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का इकोसिस्टम तैयार किया है।

इस संदर्भ में पटेल ने कहा कि क्लाइमेट चेंज की चुनौतियों का सामना करने के लिए गुजरात ने लाइफ स्टाइल फॉर एन्वायर्नमेंट – मिशन लाइफ, हरित ऊर्जा के लिए रिन्यूएबल एनर्जी व सोलर रूफटॉप, जल संचय के लिए ‘कैच द रेन’ व अमृत सरोवरों का निर्माण तथा ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अंतर्गत पेड़-पौधों की बुवाई से हरियाली क्रांति द्वारा पर्यावरण संतुलन से युक्त विकास किया है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 76वें वन महोत्सव अंतर्गत राज्य के 24वें सांस्कृतिक वन के रूप में खेडा जिले के गळतेश्वर में 7 हेक्टेयर में निर्मित गळतेश्वर वन का लोकार्पण किया। उन्होंने गुजरात स्टेट वेटलैंड ऑथोरिटी की वेबसाइट की लॉन्चिंग, ग्राम वन निर्माण तथा पट्टी बुवाई (स्ट्रिप फार्मिंग) की उपज के चेक का ग्राम व तहसील पंचायतों को वितरण और वन विभाग की योजनाओं के लाभार्थियों को चेक का वितरण किया।
उन्होंने ‘हम प्रकृति से प्रेम करेंगे, तो प्रकृति हमारा ध्यान रखेगी’ का उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि हम तो पौधे में परमात्मा तथा जीव में शिव देखने वाले लोग हैं। इतना ही नहीं; प्रधानमंत्री ने भी पर्यावरण संतुलन एवं संरक्षण को हमेशा प्रायोरिटी दी है। इस उद्देश्य से उन्होंने वन महोत्सव का परंपरागत प्रारूप बदल कर वन के साथ जन-जन को जोड़ा है और वन महोत्सवों को जन महोत्सव बनाया है।
पटेल ने बताया कि ग्रीन कवर बढ़ाने के लिए ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान, राज्य में मियावाकी पद्धति से 207 वन कवच निर्माण, लगभग 82 नमो वड वन आदि की सफलता के परिणामस्वरूप वन क्षेत्र से बाहर का ग्रीन कवर बढ़कर 1143 वर्ग किलोमीटर हुआ है।प्रधानमंत्री की प्रेरणा से शुरू हुए ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान में गुजरात ने गत वर्ष 17.50 करोड़ पौधे लगाने के साथ देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है और इस वर्ष ‘एक पेड़ माँ के नाम’ 2.0 में समग्र राज्य में 10.35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि गुजरात देश के विकास का ग्रोथ इंजन बना है। व्यापार-उद्योग के विकास के साथ मानव जीवन के विकास के लिए भावी पीढ़ी को स्वच्छ वातावरण प्रदान कर समृद्ध एवं स्वस्थ रखने के लिए ग्रीन-क्लीन एन्वायर्नमेंट जरूरी है और वन महोत्सव इसके लिए सक्षम माध्यम हैं।
इस अवसर पर वन एवं पर्यावरण मंत्री मुळुभाई बेरा ने कहा कि सांस्कृतिक वनों का उद्देश्य लोगों को धार्मिक व औषधीय पेड़ों के विषय में जागृत करना, जलवायु परिवर्तन में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रेरित करना, वृक्ष आच्छादन बढ़ाना तथा लोगों तथा विद्यार्थियों एवं बच्चों में पेड़ों के प्रति प्रेम जागृत करना है। इस वर्ष सामाजिक वनीकरण अंतर्गत 39295 हेक्टेयर में बुवाई तथा 20 अर्बन फॉरेस्ट के निर्माण का आयोजन है। पंचरत्न ग्राम वाटिका मॉडल अंतर्गत 1000 गाँवों में प्रति गाँव 50 पौधे लगाए जाएंगे। 2025-26 में 34 पवित्र उपवन बनेंगे और 19895 हेक्टेयर में 153.90 लाख पौधों की बुवाई होगी।

वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री मुकेशभाई पटेल ने कहा कि सामाजिक वनीकरण में राज्य सरकार कटिबद्धता से कार्य कर रही है। खेडा जिले में भी इस दिशा में कार्य करते हुए गोविंदपुरा में वन कवच तथा ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान अंतर्गत पीपलग गाँव में वन निर्माण किया गया है।
राज्य सरकार ने ग्रीन ग्रोथ को विकास के पाँचवें स्तंभ के रूप में स्थान दिया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में ‘हरित वन पथ’ योजनांतर्गत रोडसाइड तथा कोस्टल हाईवे पर 100 हेक्टेयर में पेड़-पौधों की बुवाई, एग्रो फॉरेस्ट्री अंतर्गत 35000 हेक्टेयर में खेतों में वृक्षारोपण, 130 अमृत सरोवरों के चारों ओर प्रति सरोवर 200 पौधों की बुवाई व 136 वन कुटीरों का निर्माण तथा 100 किसान शिविरों के आयोजन की योजना है।कार्यक्रम के प्रारंभ में वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव संजीव कुमार ने सभी उपस्थितों का स्वागत कर कार्यक्रम की रूपरेखा दी।
इस कार्यक्रम में खेडा के सांसद देवूसिंह चौहाण, पंचमहाल के सांसद राजपालसिंह जादव, ठासरा के विधायक योगेन्द्रसिंह परमार, नडियाद के विधायक पंकजभाई देसाई, महुधा के विधायक संजयसिंह महिडा, मेहमदाबाद के विधायक अर्जुनसिंह चौहाण, कपडवंज के विधायक राजेशभाई झाला, मातर के विधायक कल्पेशभाई परमार, अग्रणी नयनाबेन पटेल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक तथा हेड ऑफ द फॉरेस्ट फॉरेस्ट ए. पी. सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) डॉ. जसपाल सिंह, जिला कलेक्टर अमित प्रकाश यादव, जिला विकास अधिकारी जयंत किशोर, अन्य अग्रणी, महानुभाव सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
