@ देहरादून उत्तराखंड :-
परम पूज्य आचार्य विद्यासागर जी महामुनिराज एवं आचार्य समयसागर जी महामुनिराज की शिष्या पूज्य गुरुमाँ पूर्णमति माताजी के सानिध्य में गांधी रोड स्थित जैन भवन में मंगल कलश स्थापना कार्यक्रम श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 6:00 बजे मंगलाष्टक से हुआ। इसके पश्चात 6:20 बजे अभिषेक, 6:45 बजे शांतिधारा तथा प्रातः 7:45 बजे मंगल प्रवचन के उपरांत विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मंगल कलशों की स्थापना संपन्न हुई। पुण्यार्जक परिवारों को मंच से ससम्मान आमंत्रित किया गया तथा उन्होंने मूलनायक भगवान के समवशरण में अपने कर-कमलों से कलश स्थापित कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण रहीं। अतिविशिष्ट अतिथि उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री खजान दास तथा विशिष्ट अतिथि विशाल गुप्ता उपस्थित रहे।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने गुरुमाँ को फल भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। अतिथियों ने समस्त जैन समाज को चातुर्मास की शुभकामनाएँ देते हुए धर्म एवं आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण का संदेश दिया। गुरुमाँ पूर्णमति माताजी ने भी सभी श्रद्धालुओं को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।

मीडिया समन्वयक मधु जैन ने बताया कि चातुर्मास के विभिन्न कलशों की स्थापना निम्न पुण्यार्जक परिवारों द्वारा की गई—
चातुर्मास मुख्य कलश स्थापना
विनोद जैन एवं कमलेश जैन।
शैलवाला जैन (धर्मपत्नी स्व. विजय कुमार जैन), राजीव जैन–प्रीति जैन, अक्षय जैन–नेहा जैन (फोम हाउस परिवार)।
चातुर्मास मंगल कलश स्थापना
अमित जैन, आशु जैन, हर्ष जैन एवं कु. वैदिका जैन (चूने वाले परिवार)।
कावेदी ज्वेलर्स परिवार के आशीष जैन एवं नेहा जैन।
आचार्य विद्यासागर कलश
दिनेश जैन–बबीता जैन, आकाश जैन–साक्षी जैन, अक्षय जैन–मिसी जैन, वैशाली जैन, आर्निक जैन तथा कु. काव्या एवं नव्या जैन।
आचार्य समयसागर कलश
बीना जैन, अमित जैन–अरुवा जैन, राहुल जैन, मुक्ता जैन एवं सिद्धार्थ मेडिकल परिवार।
गुरुमाँ पूर्णमति माताजी कलश
अमित जैन, पूनम जैन एवं परिवार।
इस धार्मिक आयोजन में देहरादून के अलावा हरिद्वार, ऋषिकेश, विकासनगर, आगरा, दिल्ली, मुज़फ्फरनगर, रुड़की, मध्य प्रदेश सहित विभिन्न नगरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने भक्ति एवं उत्साह के साथ कार्यक्रम को सफल बनाया तथा मंत्रोच्चार के मध्य भगवान जी के समक्ष श्रद्धापूर्वक कलश स्थापित किए।

