जेपी नड्डा ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन संचालन समूह बैठक की अध्यक्षता की

@ नई दिल्ली :-

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और मिशन संचालन समूह (एमएसजी) के अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने आज आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) की प्रगति की समीक्षा करने और भारत के डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्‍टम को और मजबूत करने की कार्यनीति पर विचार-विमर्श करने के लिए मिशन संचालन समूह की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की।

इस बैठक में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा; मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला; आयुष (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव; स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल; वाणिज्य एवं उद्योग एवं इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद; नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. निवास; भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद; ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग; केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव; आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुनील कुमार बरनवाल, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, नीति आयोग, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, आयुष मंत्रालय और मिशन संचालन समूह के अन्य सदस्य संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

नड्डा ने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में सुधार लाने, देखभाल की निरंतरता को बढ़ाने और नागरिकों को उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक सुरक्षित और सहमति-आधारित पहुंच प्रदान करके सशक्त बनाने में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की परिवर्तनकारी भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करने के लिए प्रौद्योगिकी एक शक्तिशाली साधन के रूप में कार्य करती रहनी चाहिए, साथ ही प्रत्येक नागरिक के लिए समावेशिता, सुलभता और उपयोग में आसानी सुनिश्चित करनी चाहिए।

मिशन संचालन समूह ने बैठक के दौरान, पिछली बैठक के बाद से एबीडीएम के अंतर्गत हुई प्रगति की समीक्षा की और देश के डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्‍टम के महत्वपूर्ण विस्तार पर ध्यान दिया। मिशन ने स्वास्थ्य सुविधाओं, स्वास्थ्य पेशेवरों और नागरिकों के बीच डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को अपनाने में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है, जिससे एक एकीकृत, अंतरसंचालनीय और नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना बनाने की परिकल्पना को और आगे बढ़ाया जा रहा है।

पिछली बैठक के दौरान लिए गए विभिन्न निर्णयों पर हुई प्रगति की व्यापक समीक्षा की गई, जिसमें क्षमता निर्माण पहल, राज्य स्तरीय कार्यान्वयन तंत्र को मजबूत करना, सरकारी कार्यक्रमों में डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफार्मों का एकीकरण, निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की बढ़ी हुई भागीदारी और डिजिटल स्वास्थ्य में ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग शामिल हैं।

मिशन संचालन समूह ने बताया कि एबीडीएम विश्व के सबसे बड़े डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्‍टम में से एक के रूप में उभरा है, जिसमें 93.95 करोड़ से अधिक एबीएचए नंबर बनाए गए हैं, 105 करोड़ स्वास्थ्य रिकॉर्ड लिंक किए गए हैं, 5.33 लाख स्वास्थ्य सुविधाएं और 9.85 लाख स्वास्थ्य पेशेवर राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य रजिस्‍ट्री पर पंजीकृत हैं। मिशन ने 2.72 लाख स्वास्थ्य सुविधाओं को एबीडीएम सॉफ्टवेयर अपनाने में सक्षम बनाया है, ओपीडी पंजीकरण में तेजी लाने के लिए लगभग 24 करोड़ स्कैन एंड रजिस्टर टोकन जारी किए गए हैं और देखभाल के सभी चरणों में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के निर्बाध, सहमति-आधारित आदान-प्रदान को सुगम बनाया गया है।

मिशन संचालन समूह ने मॉडल जिलों, मॉडल सुविधाओं और आरोग्य सेतु 2.0 जैसी पहलों के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एबीडीएम के तीव्र विस्तार की सराहना की, साथ ही आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, सीजीएचएस, ईएसआईसी और निकशय सहित प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ एकीकरण को मजबूत करने पर भी बल दिया। संचालन समूह के सदस्यों ने बताया कि ये पहलें सुरक्षित डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड, शीघ्र सेवा वितरण और देश भर में स्वास्थ्य सेवाओं तक निर्बाध पहुंच को सक्षम बनाकर स्वास्थ्य सेवा को अधिक सुलभ, अंतरसंचालनीय और नागरिक-केंद्रित बना रही हैं।

संचालन समूह के सदस्यों ने देश भर में एबीडीएम को अपनाने में तेजी लाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का और विस्तार करने, अंतरसंचालनीयता में सुधार करने, राष्ट्रीय स्तर पर अधिसूचित डिजिटल स्वास्थ्य मानकों को अपनाने को बढ़ावा देने, शासन तंत्र को मजबूत करने और स्वास्थ्य सेवाओं तक निर्बाध डिजिटल पहुंच के माध्यम से नागरिकों की सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से प्रस्तावों पर चर्चा की।

बैठक में मिशन के भविष्य की कार्यनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया, जिसमें डिजिटल स्वास्थ्य को अपनाने को बढ़ावा देने, एआई सहित उभरती प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने, संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ सहयोग बढाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एबीडीएम के तहत एक मजबूत डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना का निर्माण किया गया है, लेकिन अगले चरण में देश भर में इसके अधिकतम उपयोग पर ध्यान केंद्रित करना होगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के विजन को साकार करने के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करना आवश्‍यक है और एबीडीएम इस यात्रा में एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में कार्य करेगा।

नड्डा ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सभी हितधारकों के बीच निरंतर सहयोग के माध्यम से, देश में एक मजबूत, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्‍टम का निर्माण होगा जो श्रीवास्तव में विकसित भारत @ 2047 की परिकल्पना को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने सभी हितधारकों से प्रत्येक नागरिक के लिए निर्बाध, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को सुनिश्चित करने की दिशा में सामूहिक रूप से कार्य करने का आह्वान किया।

मिशन संचालन समूह ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और सभी नागरिकों के लिए निर्बाध, सुरक्षित और अंतरसंचालनीय डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को सक्षम बनाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

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