जरात का 870 मेगावाट का पावर बैकअप तैयार : अतिरिक्त बिजली को संग्रहीत करता है बैटरी सिस्टम

@ गांधीनगर गुजरात :-

भारत के प्रथम सोलर विलेज मोढेरा के सफल क्रियान्वयन के माध्यम से गुजरात ने देश में पहली बार सोलर पावर प्लांट के साथ एकीकृत बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) यानी बिजली का संग्रह करने वाली बैटरी व्यवस्था शुरू की थी। मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में इस दिशा में आगे बढ़ते हुए आज गुजरात देश भर में बैटरी स्टोरेज प्रणाली को आगे बढ़ाने में अग्रणी राज्यों की सूची में शामिल हो गया है।

मोढेरा के बाद फिलहाल गुजरात में कुल 5 स्थानों पर 870 मेगावाट की क्षमता के साथ बैटरी स्टोरेज की व्यवस्थाएं शुरू की गई हैं। बैटरी स्टोरेज प्रणाली स्थापित करने के लिए अहमदाबाद, गांधीनगर, बनासकांठा, पाटण और कच्छ जिले में 13 और परियोजनाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया है।

इन भविष्य-उन्मुख परियोजनाओं और मजबूत नीति के कारण आगामी समय में गुजरात ऊर्जा संग्रहण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी भूमिका निभाएगा और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन अनुसार वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता को प्राप्त करने के भारत के लक्ष्य में उल्लेखनीय योगदान देगा।

हाल ही में अहमदाबाद की साणंद तहसील के चरल गांव में बैटरी ऊर्जा स्टोरेज प्रणाली शुरू की गई है। इसके अलावा, मेहसाणा जिले के मोढेरा और कच्छ के लखपत में कुल 4 बैटरी स्टोरेज प्रणालियां कार्यरत हैं। राज्य सरकार ने गुजरात इंटीग्रेटेड रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी-2025 में अत्याधुनिक ऊर्जा संग्रह करने वाली प्रणालियों को एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में शामिल किया है। इसके आधार पर बैटरी स्टोरेज के लिए  स्वतंत्र परियोजनाओं के साथ-साथ नई रिन्यूएबल ऊर्जा परियोजनाओं के साथ बैटरी स्टोरेज परियोजनाएं और मौजूदा रिन्यूएबल ऊर्जा परियोजनाओं के साथ एकीकृत बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं को मंजूरी दी जाती है। आगामी समय में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को मंजूरी मिलने के बाद व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए भी बैटरी स्टोरेज के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू किया जाएगा। उसके बाद, औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ता अपने सोलर या विंड प्रोजेक्ट के साथ बैटरी स्टोरेज की सुविधा शुरू कर सकेंगे।

क्यों जरूरी है बीईएसएस?

बैटरी स्टोरेज सिस्टम बिजली का संग्रह करने के लिए आवश्यक है। राज्य में सोलर सहित अन्य रिन्यूएबल स्रोतों से बिजली उत्पादन दिन के दौरान बदलता रहता है। जैसे कि दिन के समय सोलर ऊर्जा का उत्पादन ज्यादा होता है और शाम के समय उत्पादन नहीं होता। यदि दिन के दौरान पैदा हुई अतिरिक्त बिजली को सही तरीके से संग्रहीत किया जाए, तो शाम के समय जब मांग अधिक होती है (पीक लोड), तब उस बिजली की आपूर्ति की जा सकती है। वर्तमान में, जब शाम के समय अचानक मांग बढ़ जाती है, तो बिजली आपूर्ति करने वाले ग्रिड पर लोड बढ़ जाता है। इस स्थिति में ग्रिड स्टेबल यानी स्थिर रहे, इसके लिए भी बैटरी स्टोरेज प्रणालियां आवश्यक हैं। राज्य सरकार इस दिशा में ही आगे बढ़ रही है।

गुजरात सरकार का स्मार्ट आयोजन

गुजरात में बैटरी स्टोरेज व्यवस्था के निर्माण के लिए राज्य सरकार रणनीतिक रूप से आगे बढ़ रही है। कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बीडिंग के जरिए इस क्षेत्र में आमंत्रित किया जा रहा है। बैटरी स्टोरेज सिस्टम को रिन्यूएबल प्रोजेक्ट के समीप लगाने का आयोजन किया गया है, ताकि अतिरिक्त ऊर्जा को तेजी से संग्रहीत किया जा सके तथा ट्रांसमिशन लॉस और बिजली की बर्बादी को रोका जा सके।

गुजरात एनर्जी ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन (जीईटीसीओ) और विद्युत वितरण कंपनियां स्मार्ट प्लानिंग के साथ ग्रिड की क्षमता के अनुसार बैटरी स्टोरेज सिस्टम के स्थल का चुनाव करती हैं। इस व्यवस्था के जरिए बैटरी स्टोरेज केवल बिजली का संग्रह ही नहीं करेगा, बल्कि वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी को सपोर्ट करके ग्रिड को स्थिर भी रखेगा, साथ ही इमरजेंसी बैकअप के रूप में सहायता करेगा।

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