@ नई दिल्ली :-
लाल किले में आयोजित 25 वें भारत पर्व के अवसर पर आगंतुकों को झारखंड पर्यटन के तत्वावधान में इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (आईएचएम) रांची के स्टॉल पर झारखंड के प्रतिष्ठित, प्रामाणिक और सदियों पुराने व्यंजनों का स्वाद चखने के लिए आमंत्रित किया गया है। आईएचएम रांची की ओर से कुशलतापूर्वक तैयार किया गया यह स्टॉल आदिवासी परंपराओं, ग्रामीण रीति-रिवाजों और टिकाऊ मोटे अनाजों के व्यंजनों में निहित भोज्य पदार्थों की राज्य की समृद्ध विरासत की पाक कला की शानदार यात्रा प्रस्तुत करता है।

प्रामाणिकता और सादगी को दर्शाने के ख्याल से डिज़ाइन किए गए इस स्टॉल में देहाती ब्लैकबोर्ड शैली में भोज्य पदार्थों की सूची प्रस्तुत की गई है जो झारखंड में भोजन की संस्कृति की जड़ों का प्रतीक है। यह दृष्टिकोण खाद्य पदार्थों की सूची के उस दर्शन से जुड़ा हुआ है—जो स्थानीय सामग्रियों, खाना पकाने की पारंपरिक विधियों और प्रत्येक व्यंजन के पीछे की सांस्कृतिक कहानियों की सराहनीय जानकारी प्रस्तुत करता है।
खाद्य पदार्थों की सूची में पूरे झारखंड में रोज़मर्रा की खान-पान की परंपराओं को दर्शाने वाले विभिन्न प्रकार के पारंपरिक और उत्सवों के लिए पकाए जाने वाले व्यंजन शामिल हैं। इनमें एक खास व्यंजन, आलू चना की सब्जी के साथ धुस्का, कुरकुरी खमीर वाली दाल-चावल रोटी है जिसे पौष्टिक आलू और छोले की करी के साथ परोसा जाता है। यह पूरे राज्य में लोकप्रिय व्यंजन है। चावल के आटे और गुड़ से बनी पारंपरिक मिठाइयां जैसे अर्शा पीठा, सदियों पुरानी उत्सवों की रेसिपी को प्रदर्शित करती हैं जबकि डंबू जैसे अल्पज्ञात स्थानीय नाश्ते के सामान आगंतुकों को झारखंड की अनूठी पाक कला का अनुभव लेने के लिए आमंत्रित करते हैं।
आईएचएम रांची के स्टॉल का मुख्य आकर्षण मोटे अनाज के व्यंजन हैं जो पोषण, दीर्घकालिक आवश्यकताओं और जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने वाली राष्ट्रीय पहलों के अनुरूप हैं। रागी सेव और रागी समोसा जैसे अभिनव व्यंजन पोषक तत्वों से भरपूर रागी का उपयोग करके नाश्ते की लोकप्रिय सामग्री को नया रूप देते हैं। सब्जी के साथ चावल छिलका और सब्जी के साथ मडुआ छिलका जैसे पौष्टिक भोजन के विकल्प पारंपरिक अनाज आधारित आहार को दर्शाते हैं, जिन्हें मौसमी सब्जियों के साथ मिलाकर संतुलित और पोषणपूर्ण भोजन प्रदान किया जाता है।
पेय पदार्थों में चावल की चाय शामिल है, जो चावल से बनी एक विशिष्ट चाय है और पारंपरिक चाय का हल्का और सुकून देने वाला विकल्प है। यह स्थानीय सामग्रियों के उपयोग और परंपरा में निहित पाक कला के नवाचार को और भी उजागर करती है। मड़ुआ कुकीज़ और मड़ुआ लड्डू जैसे आकर्षक पैकेजिंग वाले आइटम उपहार देने और ले जाने के लिए पारंपरिक स्वादों को आधुनिक सुविधा के साथ पेश करते हैं। मड़ुआ रागी रैप जैसे समकालीन उत्पाद आधुनिक रूप में स्वदेशी अनाजों को परिचित प्रारूपों के साथ मिलाकर विविध ग्राहकों को आकर्षित करते हैं।
भारत पर्व में आईएचएम रांची का यह स्टॉल सोच-समझकर तैयार किए गए मेनू के माध्यम से न केवल झारखंड की पाक कला विरासत को शानदार तरीके से प्रस्तुत करता है, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे खान-पान के तौर-तरीकों, पोषण संबंधी जागरूकता और सांस्कृतिक गौरव को भी बढ़ावा देता है जिससे आगंतुकों को राज्य की समृद्ध और विविध खाद्य परंपराओं का प्रामाणिक स्वाद मिलता है।

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