@ नई दिल्ली :-
शोधकर्ताओं ने औषधियों और औद्योगिक रसायनों के निर्माण में जहरीले विलायकों, उच्च तापमान और ऊर्जा-गहन प्रक्रियाओं को समाप्त करने के लिए एक नवीन प्रकाश-संचालित नैनो-उत्प्रेरक विकसित किया है। इससे यह प्रक्रियाएं स्वच्छ और कहीं अधिक ऊर्जा कुशल बन जाती हैं। वैश्विक स्तर पर, प्रदूषण, ऊर्जा खपत और औद्योगिक प्रक्रियाओं में जहरीले रसायनों के उपयोग को कम करने की आवश्यकता है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के मोहाली स्थित नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनएसटी) के वैज्ञानिकों की एक टीम ने सोने और पैलेडियम नैनोकणों तथा प्रकाश-अवशोषित अणु बीओडीपीआई को मिलाकर एक ऐसा नैनो-कंपोजिट विकसित किया है जो प्रकाश-संचालित उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है। यह संकर पदार्थ प्रकाश ऊर्जा का उपयोग करके रासायनिक अभिक्रियाओं को पारंपरिक उत्प्रेरकों की तुलना में अधिक कुशलता से गति प्रदान करता है।
नैनोस्केल पत्रिका में प्रकाशित शोध के अनुसार, इस नैनोमैटेरियल को सोने, बीओडीपीआई और पैलेडियम के संयोजन से डिज़ाइन और संश्लेषित किया गया है। यह सोने के नैनोकणों द्वारा प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करने की क्षमता के साथ कार्य करता है, जो फिर से बीओडीपीआई अणु और अंत में सक्रिय उत्प्रेरक पैलेडियम में स्थानांतरित हो जाती है। पैलेडियम इस स्थानांतरित ऊर्जा का उपयोग रासायनिक प्रतिक्रियाओं को अधिक कुशलता से संचालित करने के लिए करता है, जिससे पूरी प्रक्रिया में ऊर्जा की खपत कम हो जाती है।
तीन अलग-अलग घटकों – सोना, बीओडीपीआई और पैलेडियम – को एक ही प्रणाली में संयोजित करने से एक अधिक शक्तिशाली और टिकाऊ उत्प्रेरक प्रक्रिया में मदद मिलती है।
यह हानिकारक विलायकों के स्थान पर पानी का और उच्च तापमान के स्थान पर प्रकाश का उपयोग करने जैसी अधिक पर्यावरण अनुकूल परिस्थितियों में रासायनिक प्रतिक्रियाओं से मौजूदा प्रौद्योगिकियों में सुधार कर सकता है।
डॉ. प्रकाश पी. नीलकंदन द्वारा विकसित यह तकनीक दवाओं और रसायनों के स्वच्छ और अधिक लागत प्रभावी उत्पादन को संभव बना सकती है, पर्यावरण प्रदूषण और ऊर्जा खपत को कम कर सकती है। यह तकनीक अधिक टिकाऊ औद्योगिक प्रक्रियाओं और किफायती हरित उत्पादों तक बेहतर पहुंच में योगदान दे सकती है।
