पश्चिम बंगाल के उत्तरपाड़ा में ‘स्पर्श नाट्य रंग’ दिल्ली के बैनर तले छह नाटकों का सफल मंचन

@ उत्तरपाड़ा पश्चिम बंगाल :-

सांस्कृतिक नगरी पश्चिम बंगाल के उत्तरपाड़ा और श्रीरामपुर में रंगमंच प्रेमियों के लिए 14 व 15 फरवरी को उत्तरपरा गण भवन यादगार शाम तब बनी जब स्पर्श नाट्य रंग दिल्ली द्वारा हृदय मंच” नाट्योत्सव का आयोजन किया गया ।

हृदय मंच नाट्योत्सव मे छह प्रभावशाली नाटकों का भव्य मंचन किया गया और उनके सयोगी बने श्रीरामपुर के एक थिएटर ग्रुप एकलव्य नाट्य दल । कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों ने सामाजिक, पारिवारिक और समसामयिक मुद्दों पर आधारित प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया और सभी प्रस्तुतियों को भरपूर सराहना मिली।

यह आयोजन उत्तरपाड़ा में गण भवन मे आयोजित किया गया था , जहाँ बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे। रंगकर्मियों ने अपनी सशक्त अभिनय क्षमता, सजीव संवाद अदायगी और प्रभावशाली मंच सज्जा से कार्यक्रम को सफल बनाया।

स्पर्श नाट्य रंग और एकलव्य नाट्य दल ने इसके प्रचार प्रसार में भी कोई कमी नहीं छोड़ी बड़े बड़े बैनर और पेम्पलेट इत्यादि मार्केट में वितरीत किए गए।दोनों दिनों के छह नाटकों की टिकट 100 रुपए रखी गई ,ताकि आसानी से सब ख़रीद सके और नाटक आनंद ले सके।

आपको बता दें कि स्पर्श नाट्य रंग दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्थित एक रजिस्टर्ड सोसाइटी है। कई जाने-माने एक्टर, डायरेक्टर, राइटर, पेंटर, जर्नलिस्ट और मीडिया स्पेशलिस्ट इस ग्रुप से जुड़े हुए हैं। यह ग्रुप साल 2005 में बना था।

अपने बनने के बाद से स्पर्श नाट्य रंग ने दिल्ली, उदयपुर, पांडिचेरी, पुणे, नागपुर वगैरह जैसे कई शहरों में काफिला, पति गए री काठियावाड़, नो एग्जिट, सुदामा के चावल, राधे राधे हम सब आगे, यह ट्रेन कब आएगी, साँच को ना आँच, बेचारा भगवान नीम हकीम खतरा-ए-जान और नदी परीक्षा जैसे नाटक हिंदी में किए हैं। ग्रुप ने बंगाली नाटकों जैसे पाके बिपाके, संध्या तारा, संधान चाय और हेमंती जैसे क्षेत्रीय भाषाओं में भी नाटक किए हैं।

स्पर्श नाट्य रंग अगस्त 2012 से हर साल चार दिन का थिएटर फेस्टिवल ‘हृदय मंच’ ऑर्गनाइज़ कर रहा है, जिससे अलग-अलग थिएटर ग्रुप्स को एक प्लेटफ़ॉर्म मिलता है।

स्पर्श नाट्य रंग ने भागीदारी, पानी बचाने, प्रदूषण वगैरह जैसे सोशल टॉपिक पर स्ट्रीट प्ले किए हैं। यह ग्रुप टीचर और बच्चों के लिए थिएटर वर्कशॉप ऑर्गनाइज़ करता है। ऐसी वर्कशॉप में टीचर थिएटर और टेलीविज़न के जाने-माने एक्टर होते हैं।

यह ग्रुप भारत के अलग-अलग राज्यों के लोक नृत्य जैसे असम का बिहू, उड़ीसा का गोटीपुआ, राजस्थानी लोक गीत, पुरुलिया (पश्चिम बंगाल) का छाऊ डांस और बंगाल का बाउल जैसे दूसरे आर्ट के फ़ॉर्म भी परफ़ॉर्म करने वाले बच्चों के लिए एक प्लेटफ़ॉर्म बनाता है। यह ग्रुप बड़े कलाकारों को मौका देने के अलावा ऐसे आर्ट के फ़ॉर्म परफ़ॉर्म करने वाले बच्चों को भी बढ़ावा देता है।

स्पर्श नाट्य रंग ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के कुछ खास मौसमी गानों पर ऋतु रंगा, दोखिन हवाए पथ ओ पोथिक, रवींद्र जन्मो जयंती, ओएनो आमी (द अदर मी) और रेनस्टॉर्म एंड ऑटम लीव्स म्यूज़िकल डांस परफॉर्मेंस ऑर्गनाइज़ किए।

स्पर्श नाट्य रंग क्लासिकल डांस और म्यूज़िक क्लास ऑर्गनाइज़ करता है और स्टूडेंट्स और टीचर्स के लिए शो अरेंज करता है, जिससे उन्हें अपने-अपने फील्ड में अपना टैलेंट दिखाने के लिए एक प्लेटफॉर्म मिलता है। स्पर्श नाट्य रंग का मकसद अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग थिएटर ग्रुप्स, फोक डांसर्स और म्यूज़िशियंस को एक प्लेटफॉर्म देना है, जो भारत के जाने-माने शहरों में थिएटर फेस्टिवल ऑर्गनाइज़ करके अपने नाटकों को स्टेज पर दिखाना चाहते हैं। इसका मकसद दूसरे राज्यों के बच्चों के लिए उनके अपने-अपने इलाकों में थिएटर वर्कशॉप ऑर्गनाइज़ करना भी है।

स्पर्श नाट्य रंग आर्ट और कल्चर के ज़रिए सोशल वेलफेयर के फील्ड में अलग-अलग रास्ते तलाशने के लिए कमिटेड है। यह ग्रुप ड्रामा, डांस और म्यूज़िक के ज़रिए, खासकर सभी नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर, सभी इंडियन लिटरेचर को प्रमोट करने और फैलाने के लिए डेडिकेटेड है।

स्पर्श नाट्य रंग आपसी सहमति से तय शर्तों पर, दूसरी मिलती-जुलती संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने और सहयोग करने के लिए भी फ्लेक्सिबल है, जो समाज के सभी या किसी दूसरे मकसद के तहत आने वाले काम या एक्टिविटीज़ को करने या करने का काम करती हैं।

लोक शिक्षा नाटक और थिएटर के ज़रिए होती है। इसी मोटो को मानते हुए, स्पर्श नाट्य रंग दिल्ली , लगभग एक दशक से ज़्यादा समय से दिल्ली, मध्य प्रदेश, पंजाब, हिमाचल और कोलकाता समेत कई राज्यों में क्षेत्रीय भाषा के नाटक ग्रुप्स को बढ़ावा दे रहा है।

छोटे नाटक ग्रुप्स को बचाने के लिए और उनको आगे बढ़ाने के लिए , इस बार श्रीरामपुर के नाट्य रंग और एकलव्य की मिली-जुली पहल पर उत्तरपाड़ा के गणभवन में हृदय मंच नाट्योत्सव मनाया गया । शनिवार और रविवार को दो दिनों तक ज़िले के कुल छह नाटक ग्रुप्स ने 14 व 15 फरवरी को अपनी प्रस्तुति दी ।

 

यह बात हृदय मंच नाट्योत्सव के ऑर्गनाइज़र्स अजीत चौधरी ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही। एक पूछे गए प्रश्न में प्रजा टुडे के संवादाता ने पूछा की कहीं से स्पर्श नाट्य रंग को कोई सरकारी ग्रांट मिलता है की नहीं,उन्होंने बताया हमें नाटक के लिए कही से भी कोई सरकारी ग्रांट या सहायता नहीं मिलती ।अजीत चौधरी, कुणाल साहा, स्पर्श नाट्य रंग के कोषाध्यक्ष एवं फाउंडर मेंबर प्रजा दत्त डबराल , समीर दत्त और सुमन मुखोपाध्याय वहां मौजूद थे।

स्पर्श नाट्य रंग के प्रेसिडेंट एवं डायरेक्टर अजीत चौधरी ने कहा,नाटक को ज़िंदा रखने और नई पीढ़ी को नाटक-ओरिएंटेड बनाने के लिए यह हमारी पहल है और एकलव्य नाट्य दल के डायरेक्टर सुमन मुखोपाध्याय ने कहा, हम डिस्ट्रिक्ट लेवल पर ड्रामा को ज़िंदा रखने के लिए हेल्दी कल्चर के मूवमेंट में शामिल हुए हैं। इसी मकसद को ध्यान में रखते हुए, हम चाहते हैं कि ज़्यादा से ज़्यादा लोग आकर ड्रामा देखें।

स्पर्श नाट्य रंग को समय-समय पर नाटकों के लिए Justdial का सहयोग प्राप्त होता रहा है, जिसके अंतर्गत प्रचार-प्रसार एवं आयोजन संबंधी समर्थन प्रदान किया जाता है। इस सहयोग ने कार्यक्रम की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्था के पदाधिकारियों ने जस्ट डायल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे सहयोग से क्षेत्रीय रंगमंच को नई ऊर्जा और पहचान मिलती है।

आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन समाज में जागरूकता और रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देते हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी कलाकारों और सहयोगियों को सम्मानित किया गया।

‘स्पर्श नाट्य रंग’ की इस पहल ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि उत्तरपाड़ा की धरती पर रंगमंच की परंपरा आज भी जीवंत और सशक्त है।

  

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