पुणे के उरुली कंचन में उपराष्ट्रपति ने निसर्गोपचार आश्रम के 81वें स्थापना दिवस का संबोधन

@ पुणे महाराष्ट्र :-

पुणे के उरुली कंचन में भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने निसर्गोपचार आश्रम के 81वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया। सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी, जिन्होंने आश्रम की परिकल्पना की, और इस नेक कार्य के लिए भूमि दान करने वाले किसान, दोनों ही राष्ट्र की कृतज्ञता के पात्र हैं। उन्होंने आश्रम को महज एक संस्था नहीं, बल्कि एक आंदोलन, एक दर्शन और महात्मा गांधी के प्रकृति के साथ सामंजस्य में रहने के सरल, अनुशासित जीवन के दृष्टिकोण से प्रेरित जीवन शैली बताया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि गांधीजी ने प्रकृति को सबसे बड़ा चिकित्सक माना और इस बात पर जोर दिया कि सही स्वास्थ्य सादगी, अनुशासन और प्रकृति के साथ सामंजस्य सहित रहने में है।

जीवनशैली से जुड़ी बढ़ती बीमारियों पर प्रकाश डालते हुए, उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि आश्रम का संदेश आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य केवल बीमारी का न होना नहीं है, बल्कि शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से पूर्ण रूप से स्वस्थ होना है। उन्होंने लोगों से संतुलित पोषण, नियमित शारीरिक गतिविधि, मानसिक शांति और प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया।

झारखंड और महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें आदिवासी समुदायों में प्रचलित स्वदेशी और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों की समृद्ध परंपरा को करीब से देखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि प्रकृति और पारंपरिक ज्ञान पर आधारित ये समय-परीक्षित पद्धतियां समग्र स्वास्थ्य देखभाल में भारत की गहरी सभ्यतागत बुद्धिमत्ता को दर्शाती हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है, जिसमें आयुष संस्थान निवारक और समग्र स्वास्थ्य देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और देश में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पर्यटन के विकास में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि योग और प्राकृतिक चिकित्सा आधुनिक चिकित्सा के विकल्प नहीं बल्कि शक्तिशाली पूरक हैं, और भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों को विश्व के लिए अमूल्य उपहार बताया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज की तेज़ रफ़्तार दुनिया में लोग अक्सर भौतिक सुख-सुविधाओं में खुशी ढूंढते हैं, लेकिन सच्ची संतुष्टि जीवन में शांति, संतुलन और सामंजस्य से मिलती है। उन्होंने आगे कहा कि जब व्यक्ति स्वस्थ होते हैं, तो परिवार मजबूत होते हैं; जब परिवार मजबूत होते हैं, तो समाज समृद्ध होता है; और जब समाज समृद्ध होता है, तो राष्ट्र का उत्थान होता है।

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि जैसे-जैसे भारत विकसित भारत की परिकल्पना की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे स्वस्थ भारत का निर्माण करना भी लक्ष्य होना चाहिए, और निसर्गोपचार आश्रम जैसे संस्थान इस उद्देश्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उपराष्ट्रपति ने आश्रम में महात्मा गांधी और मणिभाई देसाई को पुष्पांजलि अर्पित की और इस अवसर पर निसर्गोपचार आश्रम के प्रबंध न्यासी डॉ. नारायण हेगड़े द्वारा लिखित पुस्तक ‘सीक्रेट्स ऑफ अवर हैप्पीनेस’ का विमोचन किया।

इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजीत पवार, महाराष्ट्र विधान परिषद की उपाध्यक्ष डॉ. नीलम गोरहे  और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित हुए।

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