राजीव रंजन सिंह ने मत्स्य पालन क्षेत्र में सुधारों पर आईजीओएम हितधारक परामर्श की अध्यक्षता की

@ नई दिल्ली :-

मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य पालन विभाग – एमओएफएएचडी के लिए सामाजिक, कल्याण और सुरक्षा क्षेत्रों पर अनौपचारिक मंत्री समूह (आईजीओएम) के अंतर्गत आज हाइब्रिड मोड में एक हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए आईजीओएम के चार स्तंभों (विधायी, नीतिगत, संस्थागत और प्रक्रियागत सुधार) पर सुझाव आमंत्रित करना था। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री एमओएफएएचडी और पंचायती राज राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने वर्चुअल माध्यम से की। मत्स्य पालन विभाग के सचिव अभिलक्ष लिखी ने परामर्श और फीडबैक सत्र का संचालन किया। इसका उद्देश्य 2047 तक विकसित भारत के विजन के अनुरूप मत्स्य पालन क्षेत्र में उत्पादन, उत्पादकता और निर्यात संवर्धन बढ़ाने के लिए चुनौतियों और सुधारों की पहचान करना था।

राजीव रंजन सिंह ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए उत्पादन, उत्पादकता और निर्यात को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने पर केंद्रित सुधार रोडमैप तैयार करने में मदद के लिए हितधारकों के सुझाव आवश्यक थे। केंद्रीय मंत्री ने देश के समुद्री खाद्य निर्यात पोर्टफोलियो में विविधता लाने और उसे मजबूत बनाने के लिए अंतर्देशीय राज्यों की अप्रयुक्त निर्यात क्षमता को अनलॉक करने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हाल ही में अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह कदम इस क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में बढ़ावा देगा। केंद्रीय मंत्री ने हितधारकों से आग्रह किया कि वे देश में मत्स्य उत्पादकता को 5 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 7 टन प्रति हेक्टेयर करने के लिए सामूहिक प्रयास करें, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहें।

केंद्रीय मंत्री ने निर्यात बाजार विविधीकरण, उत्पाद प्रमाणन, मत्स्य प्रसंस्करण में प्रौद्योगिकी एकीकरण, कोल्ड चेन बुनियादी ढांचा निर्माण, प्रसंस्करण क्षमताओं को बढ़ाने और वैश्विक मानकों को पूरा करने हेतु एक मजबूत ट्रेसेबिलिटी प्रणाली स्थापित करने पर भी बल दिया। सिंह ने कहा कि मत्स्य पालन क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से देश में 8 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका का साधन है। उन्होंने इस क्षेत्र के संरचनात्मक परिवर्तन के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की और कहा कि आईजीओएम का गठन चार प्रमुख स्तंभों – विधायी, नीतिगत, संस्थागत और प्रक्रियागत सुधारों – पर आधारित एक व्यापक सुधार रोडमैप विकसित करने के स्पष्ट अधिदेश के साथ किया गया है। उन्होंने कहा कि ये स्तंभ एक लचीले, समावेशी और निर्यातोन्मुखी मत्स्य पालन इकोसिस्टम के निर्माण का मार्गदर्शन करेंगे।

मत्स्य पालन विभाग सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने अपने संबोधन में मत्स्य पालन क्षेत्र की अप्रयुक्त निर्यात क्षमता को रेखांकित किया और इसकी उत्पादकता बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, मछुआरा संघों, निर्यातकों और उद्योग निकायों से सहयोग से काम करने और कार्यान्वयन योग्य सुझाव साझा करने का आग्रह किया।

मत्स्य विभाग संयुक्त सचिव सागर मेहरा ने कहा कि आईजीओएम क्षेत्रीय आकलन के माध्यम से सुधारों को आगे बढ़ाएगा ताकि वैश्विक बेंचमार्किंग में आने वाली समस्याओं, चुनौतियों और क्षमता निर्माण में वर्त्तमान कमियों की पहचान की जा सके। अपनी प्रस्तुति में उन्होंने समुद्री और अंतर्देशीय जलीय कृषि के विस्तार जीआई टैगिंग के साथ उच्च मूल्य वाली प्रजातियों को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और पीपीपी मॉडल के माध्यम से अधिक निजी निवेश को रेखांकित किया।

बैठक में राज्य-स्तरीय रणनीतियों को पीएमएमएसवाई, पीएम-एमकेएसएसवाई योजना और ब्लू इकोनॉमी पहल के साथ संरेखित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। बैठक के दौरान विभिन्न हितधारकों ने क्वारंटाइन केंद्रों के विकास, मूल्य संवर्धन के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग, प्रसंस्करण क्षमताओं में वृद्धि, एकल खिड़की मंजूरी की आवश्यकता, बढ़ी हुई ट्रेसेबिलिटी, एक समान भूमि पट्टे नीति/बिजली दरों की आवश्यकता, मजबूत बुनियादी ढांचे, आधुनिक बाजारों और परिवहन सुविधाओं के साथ कोल्ड स्टोरेज की स्थापना, गुणवत्ता वाले बीजों के लिए बीज बैंकों का विकास, किसानों के लिए ऋण की बेहतर पहुंच जैसे मुद्दों पर अपने बहुमूल्य इनपुट दिए।

मूल्य संवर्धन के लिए केंद्रित प्रशिक्षण संस्थान किसान उत्पादकता बढ़ाने में मदद करेंगे और देश भर में निर्यात सुविधा काउंटरों की स्थापना से निर्यात में सुविधा होगी। चर्चा में उत्कृष्टता के क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने, उभरती नौकरी भूमिकाओं के लिए क्षमता निर्माण मॉड्यूल विकसित करने, खारे जलीय कृषि का विस्तार करने, इको-लेबलिंग को बढ़ावा देने और बाजार लचीलापन बढ़ाने के लिए उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के निर्यात में विविधता लाकर ब्रांड इंडिया को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

बैठक में मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन और मछली पालन मंत्रालय, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, एनएफडीबी, एमपीईडीए, आईसीएआर संस्थानों, तटीय जलीय कृषि प्राधिकरण, भारतीय मत्स्य सर्वेक्षण, मत्स्य पालन विभाग के क्षेत्रीय संस्थानों, मछुआरा संघों के प्रतिनिधियों, उद्योग निकायों (फिक्की, सीआईआई, एसोचैम, पीएचडी चैंबर) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ आईजीओएम के अंतर्गत विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के अधिकारियों सहित हितधारकों की एक विस्तृत श्रृंखला में शामिल हुए।

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