राजस्व अदालतों के लम्बित मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करें : मुख्य सचिव

@ जयपुर राजस्थान :-

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि न्यायिक प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण कर आमजन को राहत प्रदान करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए, जिससे आमजन को शीघ्र न्याय मिल सके। उन्होंने कहा कि इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

मुख्य सचिव बुधवार को शासन सचिवालय में राजस्व न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों के साथ राजस्व अदालतों के सुदृढ़ीकरण एवं लंबित वादों के निस्तारण के संबंध में आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में सभी संभागीय आयुक्त, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त, जिला कलक्टर, अतिरिक्त जिला कलक्टर, सभी राजस्व अपील अधिकारी, उपखण्ड अधिकारी, तहसीलदार तथा नायब तहसीलदार वीसी के माध्यम से जुड़े।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशों के अनुरूप राज्य सरकार द्वारा नए वित्तीय वर्ष से राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण हेतु विशेष फोकस से कार्य किया जा रहा है। इससे लंबित विवादों का शीघ्र समाधान कर आमजन को राहत प्रदान की जा सकेगी। उन्होंने निर्देश दिये कि प्रतिदिन नियमित रूप से न्यूनतम 4 घंटे  राजस्व न्यायालय संचालित किए जाएं। साथ ही, पुराने लंबित प्रकरणों की सूची तैयार कर उन्हें प्राथमिकता से निस्तारित किया जाए। उन्होंने कहा कि कैम्प कोर्ट्स के माध्यम से अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में लम्बित वादों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया भी लागू की जा चुकी है।

श्रीनिवास ने कहा कि संभागीय आयुक्त लम्बित प्रकरणों का लक्ष्य निर्धारित कर निस्तारण किया जाना सुनिश्चित करें।  बोर्ड के सदस्य अपने आवंटित जिलों में राजस्व न्यायालयों का नियमित निरीक्षण करें। जिन जिलों में लंबित मामलों की संख्या अधिक है, वहां विशेष ध्यान देते हुए त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि भूमि स्वामित्व, सीमा निर्धारण, बंटवारा एवं नामांतरण जैसे आमजन से जुड़े मामलों की संख्या अधिक होती है, अतः इस प्रकार के प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी जिला कलक्टर प्रत्येक माह कम से कम एक बार राजस्व अधिकारियों के साथ बैठक कर लंबित मामलों की समीक्षा करें तथा न्यायालयों का निरीक्षण करें।

मुख्य सचिव ने कहा कि मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए बार और बेंच के बीच बेहतर समन्वय एवं सौहार्द अत्यंत आवश्यक है। जिला कलक्टर तथा उच्च अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि न्यायालय के कार्य दिवसों में अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण हो। साथ ही, वकीलों के साथ समन्वय स्थापित कर उनके मुद्दों का समाधान किया जाए, जिससे कार्य स्थगन की स्थिति उत्पन्न न हो और सभी कार्य दिवसों में नियमित रूप से कार्य संपादित हो सके।

मुख्य सचिव ने उपखण्ड अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे स्पष्ट, तार्किक एवं मुद्दा आधारित निर्णय लिखें। उन्होंने उत्कृष्ट निर्णयों को अन्य अधिकारियों के साथ साझा करने के लिए कहा, जिससे अन्य अधिकारी भी उनसे सीख सकें और कार्य में गुणवत्ता सुनिश्चित हो। उन्होंने इसके लिए प्रशिक्षण कार्यशालाओं एवं जिला स्तर पर क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश भी दिए।

प्रमुख शासन सचिव, राजस्व एवं उपनिवेशन टी. रविकांत ने अधिकारियों को फील्ड स्तर पर सक्रियता बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उपखण्ड अधिकारी बार के साथ निरंतर संपर्क में रहें तथा न्यायालय कक्ष में नियमित रूप से बैठकर मामलों के निस्तारण में हो रही देरी के कारणों का विश्लेषण करें।

राजस्व मण्डल के सभी सदस्य एवं विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने वीसी के माध्यम से बैठक में हिस्सा लिया।

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