रुबीना फ्रांसिस ने पेरिस 2024 पैरालिंपिक में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया

@ नई दिल्ली

भारतीय पैरा-शूटर रुबीना फ्रांसिस ने पेरिस 2024 पैरालिंपिक में महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच1 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। यह स्पर्धा शरीर के ऊपरी और/या निचले अंगों के साथ दिव्यांगता वाले एथलीटों के लिए है जो बिना किसी कठिनाई के अपनी बंदूक पकड़ सकते हैं और खड़े-खड़े या बैठे-बैठ शूटिंग कर सकते हैं।

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211.1 के उल्लेखनीय स्कोर के साथ, रुबीना ने न केवल कांस्य पदक जीता, बल्कि पैरालिंपिक में पिस्टल श्रेणी में पदक हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला निशानेबाज भी बन गईं। उनका यह उत्कृष्ट प्रदर्शन भारतीय पैरा-शूटिंग में बहुत बड़ी उपलब्धि है, जो उनकी असाधारण प्रतिभा और समर्पण को दर्शाता है। यह उपलब्धि भारतीय खेल इतिहास में एक नए अध्याय को उजागर करती है, जो रुबीना की अभूतपूर्व सफलता और भावी खिलाड़ियों के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में उनकी भूमिका का गुणगान करती है।

मध्य प्रदेश के जबलपुर की रहने वाली रुबीना फ्रांसिस ने पैरा-शूटिंग में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए कई चुनौतियों का सामना किया है। पैर में शिथिलता (सामान्य रूप से काम नहीं करना) के साथ एक निम्न-मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मी रुबिना को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा क्योंकि उनके पिता साइमन फ्रांसिस शूटिंग के प्रति उनके जुनून को पूरा करने के लिए आर्थिक मोर्चे पर संघर्ष करते रहे।

गगन नारंग की ओलंपिक उपलब्धियों से प्रेरित होकर, रुबीना ने 2015 में अपने शूटिंग करियर की शुरुआत की और अपने पिता के अटूट समर्थन के साथ 2017 में पुणे की गन फॉर ग्लोरी अकादमी में प्रवेश लिया। श्री जय प्रकाश नौटियाल की देखरेख में प्रशिक्षित हुईं और बाद में एमपी शूटिंग अकादमी में जसपाल राणा की देख-रेख में उन्होंने जल्दी ही अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

2018 फ्रांस विश्व कप में एक महत्वपूर्ण क्षण आया, जहां पैरालिंपिक कोटा हासिल करने के लिए रुबीना ने अपने प्रशिक्षण को और तेज कर दिया। 2019 में पूर्णत्व अकादमी ऑफ़ स्पोर्ट्स शूटिंग से मान्यता प्राप्त मुख्य कोच श्री सुभाष राणा की देखरेख में पदक जीतते हुए और रिकॉर्ड बनाते हुए रुबिना आगे बढ़ी। लीमा 2021 विश्व कप में उनकी सफलता पराकाष्ठा पर पहुंची, जहां उन्होंने पैरालंपिक कोटा हासिल किय, जिसके कारण टोक्यो 2020 पैरालिंपिक में भारत की पहली महिला पिस्टल पैरा-शूटर के रूप में उनका ऐतिहासिक प्रतिनिधित्व हुआ। रुबीना की खेल यात्रा उनकी जीवटता और दृढ़ संकल्प का एक मजबूत प्रमाण है।

रुबीना फ्रांसिस ने कई बेहतरीन उपलब्धियों के साथ पैरा-शूटिंग की दुनिया में खुद की ठोस पहचान बनाई है। अपनी प्रतिस्पर्धी यात्रा में उन्होंने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में काफी प्रशंसा अर्जित की, जो खेल में उनके समर्पण और कौशल को दर्शाता है। पैरालिंपिक खेलों और एशियाई पैरा खेलों में उनके उल्लेखनीय प्रदर्शन से लेकर विश्व कप में कई पदकों तक, रुबीना की उपलब्धियां उनकी उल्लेखनीय प्रतिभा और दृढ़ता को दर्शाती हैं।

रुबीना फ्रांसिस ने पैरा-शूटिंग में एक प्रभावशाली ट्रैक रिकॉर्ड बनाया है, जिसमें कई उल्लेखनीय उपलब्धियां शामिल हैं:

  • पैरालिंपिक गेम्स (2020) – पी2 10 मीटर एयर पिस्टल में 7वां स्थान।
  • एशियन पैरा गेम्स (2022) – पी2 10 मीटर एयर पिस्टल में कांस्य पदक।
  • ओसिजेक विश्व कप (2023) – पी2 10 मीटर एयर पिस्टल में रजत पदक और पी5 मिश्रित 10 मीटर एयर पिस्टल में कांस्य पदक।
  • चांगवोन विश्व कप (2023) – पी2 टीम 10 मीटर एयर पिस्टल और पी5 मिश्रित 10 मीटर एयर पिस्टल में दो रजत पदक तथा पी2 10 मीटर एयर पिस्टल में एक कांस्य पदक।
  • चांगवोन विश्व कप (2022) – पी2 टीम 10 मीटर एयर पिस्टल में रजत पदक और पी2 10 मीटर एयर पिस्टल तथा पी6 मिश्रित टीम में दो कांस्य पदक।
  • चेटौरॉक्स विश्व कप (2022) – पी6 मिश्रित टीम में स्वर्ण पदक, पी2 टीम 10 मीटर एयर पिस्टल तथा पी5 मिश्रित 10 मीटर एयर पिस्टल में रजत पदक, और पी2 10 मीटर एयर पिस्टल में कांस्य पदक।

रुबीना फ्रांसिस को पैरा-शूटिंग में सफलता प्राप्त करने में सरकार से महत्वपूर्ण सहायता मिली है। इस सहायता में उन्हें प्रशिक्षण और प्रतियोगिता दोनों के लिए वित्तीय सहायता और इसके साथ ही आवश्यक खेल उपकरण मुहैय्या कराया जाना शामिल है। इसके अलावा, उनके प्रदर्शन को बेहतर करने के लिए विशेषज्ञ सेवाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। उन्हें डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में रहने-खाने सहित समग्र प्रशिक्षण सुविधा का लाभ मिला है। इसके अलावा, रुबीना को टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टीओपीएस) के तहत आउट-ऑफ-पॉकेट भत्ता मिला है, जो बिना किसी वित्तीय बाधा के उनके प्रशिक्षण और प्रतियोगिता पर ध्यान केंद्रित करने में मददगार रहा है।

पेरिस 2024 पैरालिंपिक में रुबीना फ्रांसिस पिस्टल शूटिंग में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी है। उनकी यह असाधारण उपलब्धि भारतीय पैरा-स्पोर्ट्स के लिए ऐतिहासिक तौर पर मील का पत्थर है। महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच1 स्पर्धा में उनका कांस्य पदक जीतना न केवल उनकी अपार प्रतिभा और समर्पण को दर्शाता है, बल्कि चुनौतियों पर काबू पाने में अटूट दृढ़ता के प्रभाव को भी दर्शाता है। रुबीना की यह खेल यात्रा, उनके शुरुआती संघर्षों से लेकर वैश्विक मंच पर उनके विजयी प्रदर्शन तक, उनकी जीवटता और सरकार से मिले महत्वपूर्ण मदद का प्रमाण है। उनकी सफलता न केवल एक व्यक्तिगत जीत का गुणगान है, बल्कि भारत में पैरा-एथलीटों की भावी पीढ़ियों के लिए मार्ग भी प्रशस्त करती है। यह खेल में उत्कृष्टता प्राप्त करने में ठोस मदद प्रणालियों और दृढ़ संकल्प की महत्वपूर्ण भूमिका को भी उजागर करती है।

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