@ नई दिल्ली :-
शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने 10 मार्च, 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय साधनहीनता-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना लागू करने वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और जिला स्तरीय अधिकारियों की एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की। स्कूल शिक्षा और साक्षरता सचिव श्री संजय कुमार की अध्यक्षता में कार्यशाला आयोजित हुई।
कुमार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 पर विचार-विमर्श का नेतृत्व किया जिसमें जमीनी स्तर पर इसके प्रभावी कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित किया गया। समीक्षा में राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रदर्शन पर चर्चा की गई। इसमें विशेष रूप से 9वीं से 12वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए कोटा के उपयोग और छात्रवृत्ति जारी रखने पर विमर्श किया गया।

स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग की आर्थिक सलाहकार ए. श्रीजा, शिक्षा मंत्रालय के मुख्य लेखा नियंत्रक भूपाल नंदा, उप महानिदेशक (सांख्यिकी) डॉ. पंकज केपी श्रेयस्कर और अन्य अधिकारी चर्चा में शामिल हुए।
सांख्यिकी उप महानिदेशक डॉ. पंकज केपी श्रेयस्कर ने केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के तहत शैक्षिक प्रबंधन सूचना प्रणाली- यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस के वास्तविक समय और डिजिटल-प्रथम मंच के रूप में विकसित होने का उल्लेख किया। विभाग की आर्थिक सलाहकार ए. श्रीजा ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को बिना विलंब के भुगतान सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) पर राज्य स्तरीय अधिकारियों द्वारा समय पर सत्यापन की आवश्यकता पर जोर दिया।
राज्य के नोडल अधिकारियों के साथ संवादात्मक सत्र में जमीनी स्तर पर योजना की चुनौतियों पर व्यावहारिक मार्गदर्शन और समाधान प्रस्तुत किए गए। कार्यशाला संबंधी यह पहल केंद्रीय छात्रवृत्ति योजनाओं के समयबद्ध, पारदर्शी और विद्यार्थी-केंद्रित कार्यान्वयन सुनिश्चित करने की स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग की अटूट प्रतिबद्धता दर्शाती है।

केंद्र सरकार की ‘राष्ट्रीय साधनहीनता-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना’ के तहत, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मेधावी विद्यार्थियों को आठवीं कक्षा में शिक्षा छोड़ने से रोकने और माध्यमिक स्तर पर शिक्षा जारी रखने के लिए छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। राज्य सरकार, सरकारी सहायता प्राप्त और स्थानीय निकाय विद्यालयों के नौवीं कक्षा के एक लाख चयनित विद्यार्थियों को यह छात्रवृत्ति दी जाती है। दसवीं से बारहवीं कक्षा तक उनकी छात्रवृत्तियों का नवीनीकरण किया जाता है। छात्रवृत्ति की राशि प्रति वर्ष 12 हजार रुपये है।
जिन छात्रों के माता-पिता की सभी स्रोतों से वार्षिक आय 3 लाख 50 हजार रुपये से अधिक नहीं है, वे ही इस छात्रवृत्ति के पात्र हैं। छात्रवृत्ति के लिए चयन परीक्षा में बैठने हेतु विद्यार्थियों सातवीं कक्षा में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक या समकक्ष ग्रेड होना आवश्यक है। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए इसमें 5 प्रतिशत की छूट है।
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में वित्त मंत्रालय के सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली और शिक्षा मंत्रालय के भुगतान एवं लेखा कार्यालय मॉड्यूल का संचालन, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम द्वारा विद्यार्थियों के लाभार्थी बैंक खातों में आधार सीडिंग, ‘राष्ट्रीय साधनहीनता-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना’ के कार्यान्वयन में गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के सर्वोत्तम मामलों का अध्ययन शामिल रहा। इसके बाद राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल से संबंधित प्रश्नों के स्पष्टीकरण पर संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया।

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