सरकार ने आईडीबीआई बैंक लिमिटेड के रणनीतिक पुनर्गठन को मंजूरी दी

@ नई दिल्ली :-

आईडीबीआई बैंक लिमिटेड भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विनियमित एक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक है। बैंक की खराब वित्तीय स्थिति के कारण उसमें बार-बार पूंजी डालने की आवश्यकता पड़ी। शुरुआत में भारत सरकार ने पूंजी उपलब्ध कराई और बाद में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने यह सहायता प्रदान की। 5 मई, 2017 को भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने बैंक की गैर-निष्पादित आस्तियों और उसे हुए घाटे को देखते हुए आईडीबीआई बैंक को त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई ढाँचे के अंतर्गत रखा और उस पर कई प्रतिबंध लगाए। बैंक की वित्तीय स्थिति में सुधार पर विचार करने के बाद, आरबीआई ने अपने पत्र, दिनांकित 10 मार्च, 2021,  के माध्यम से कुछ शर्तों और निरंतर निगरानी के अधीन आईडीबीआई बैंक पर लगाए गए प्रतिबंध हटा दिए।

इसी पृष्ठभूमि में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने आईडीबीआई बैंक लिमिटेड के रणनीतिक पुनर्गठन को मंजूरी दी। इसके अनुपालन में, यह निर्णय लिया गया कि आईडीबीआई बैंक लिमिटेड में कुल 60.72% इक्विटी हिस्सेदारी एक रणनीतिक खरीदार को बेची जाएगी। इसमें भारत सरकार की 30.48% हिस्सेदारी और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की 30.24% हिस्सेदारी शामिल होगी। इसके बाद, भारत सरकार के पास 15% और एलआईसी के पास 19% हिस्सेदारी शेष रहेगी।

सीसीईए के निर्णय को दो चरणों वाली प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से लागू किया गया। इस प्रक्रिया को बहुस्तरीय सामूहिक निर्णय-निर्माण तंत्र का समर्थन प्राप्त था, जिसमें अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी), विनिवेश संबंधी सचिवों का मुख्य समूह (सीजीडी) और सशक्त कैबिनेट मंत्रियों के समूह से युक्त वैकल्पिक तंत्र (एएम) शामिल थे।

सभी इच्छुक पक्षों से रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) आमंत्रित करने के लिए प्रारंभिक सूचना ज्ञापन (पीआईएम) 07.10.2022 को जारी किया गया। बोली प्रक्रिया के चरण में केवल वे पक्ष भाग ले सकते थे, जिन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा ‘उपयुक्त एवं उचित’ पाया गया था और जिन्हें गृह मंत्रालय (एमएचए) से सुरक्षा संबंधी मंजूरी प्राप्त थी। इसके लिए, पात्र इच्छुक पक्षों (क्यूआईपी) से तकनीकी और वित्तीय बोलियाँ आमंत्रित करने हेतु प्रस्ताव आमंत्रण अनुरोध जारी किया गया। शुरुआत में रुचि की अभिव्यक्ति प्रस्तुत करने वाले पाँच पक्षों में से चार पक्ष निर्धारित पात्रता मानदंडों और उसमें निर्धारित अयोग्यता संबंधी शर्तों के अनुसार योग्य पाए गए। इनमें से अंततः दो पक्षों ने तकनीकी-वित्तीय बोलियाँ प्रस्तुत कीं और इस लेन-देन के लिए योग्य बोलीदाता (क्यूबी) बने।

विनिवेश संबंधी सचिवों के मुख्य समूह (सीजीडी) द्वारा व्यापक मूल्यांकन किए जाने और वैकल्पिक तंत्र की सिफारिशों पर विचार करने के बाद, आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने 14/10/2026 को आयोजित अपनी बैठक में इस लेन-देन के लिए मेसर्स 10955230 कनाडा इंक. (मूल इकाई मेसर्स फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड) को रणनीतिक खरीदार के रूप में मंजूरी दी। आईडीबीआई बैंक लिमिटेड में 60.72% हिस्सेदारी के अधिग्रहण के लिए क्रय मूल्‍य 52,878.0806181 करोड़ रुपये (शब्दों में: केवल बावन हजार आठ सौ अठहत्तर करोड़ आठ लाख छह हजार एक सौ इक्यासी रुपये) निर्धारित किया गया है। इसमें भारत सरकार के पास मौजूद 30.48% इक्विटी शेयरधारिता और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के पास मौजूद 30.24% इक्विटी शेयरधारिता शामिल है।

इस प्रकार के लेन-देन में बोली लगाने के लिए पहले से कोई निर्धारित मानदंड नहीं होता। बोलीदाता स्वयं मूल्यांकन करते हैं और अपनी बोलियाँ गोपनीय तरीके से सीलबंद लिफाफों में प्रस्तुत करते हैं। उद्यम का निष्पक्ष मूल्यांकन करने के लिए स्वतंत्र एजेंसियों को नियुक्त किया जाता है, जो उसी समय मूल्यांकन करती हैं। इसके बाद, प्रस्तुत बोलियों की उचितता का आकलन करने के लिए इस मूल्यांकन को तुलनात्मक आधार के रूप में उपयोग किया जाता है।

इसके बाद, सामूहिक निर्णय-निर्माण तंत्र को प्रत्यायोजित और प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा लेन-देन का मूल्य यथासंभव बढ़ाने के उद्देश्य से, वित्त वर्ष 2026-27 में योग्य बोलीदाताओं से उनके सर्वोत्तम प्रस्तावों को दर्शाने वाली सीलबंद बोलियाँ आमंत्रित की गईं। 18.05.2026 को सर्वोत्तम प्रस्ताव संबंधी बोलियाँ आमंत्रित किए जाने से पहले अंतिम कारोबारी दिन आईडीबीआई बैंक के शेयर का मूल्य 70.38 रुपये प्रति शेयर था।

कम कारोबार वाले आईडीबीआई बैंक के शेयर का बाजार मूल्य अस्थिर बना रहा और मूल्यांकन अवधि के दौरान प्रति शेयर 118.38 रुपये के उच्चतम स्तर से लेकर 61.01 रुपये के न्यूनतम स्तर तक उतार-चढ़ाव के साथ, बोली से प्राप्त मूल्य से ऊपर और नीचे दोनों स्तरों पर बना रहा। परिणामस्वरूप, शेयर के बाजार मूल्य को मूल्यांकन के लिए आधार नहीं बनाया गया, क्योंकि इससे उद्यम का मूल्यांकन उसके अंतर्निहित मूल्य से असंगत हो सकता था। इसके बजाय, इस समस्या का समाधान करने वाली बाजार गुणक पद्धति के माध्यम से सापेक्ष मूल्यांकन का उपयोग किया गया। इसके अंतर्गत, 31 मार्च, 2026 को सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के समापन लेखों के आधार पर उद्यम का उचित बाजार मूल्य निर्धारित किया गया। इसके अतिरिक्त, परिसंपत्ति मूल्यांकन पद्धति का उपयोग भी किया गया, जिसमें देनदारियों के साथ-साथ भूमि और संपत्तियों सहित मूर्त एवं अमूर्त परिसंपत्तियों पर विचार किया जाता है। इस पद्धति के अंतर्गत, आईडीबीआई बैंक लिमिटेड के 31 मार्च, 2026 के लेखापरीक्षित खातों के अनुसार उद्यम का उचित शुद्ध परिसंपत्ति मूल्य निर्धारित किया गया।

सफल बोलीदाता को रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) के चरण में किए गए उपयुक्तता एवं औचित्य संबंधी आकलन के अनुरूप भारतीय रिज़र्व बैंक के समक्ष अपने प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने होंगे और उसमें निर्धारित विनियामक शर्तों के अनुपालन के लिए अपना रोडमैप प्रस्तुत करना होगा। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद, यह हमारी अर्थव्यवस्था के वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) होगा।

सीसीईए ने मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार खुले बाजार के माध्यम से भारत सरकार की शेष हिस्सेदारी (आईडीबीआई बैंक लिमिटेड की कुल शेयरधारिता का 15%) की अल्पांश हिस्सेदारी की बिक्री करने के लिए वैकल्पिक तंत्र को शक्तियाँ भी प्रत्यायोजित की हैं। एलआईसी अपने नियामकों के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए, अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं के अनुसार अपनी शेष हिस्सेदारी का प्रबंधन करने के लिए स्वतंत्र होगी।

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