तेलंगाना की तुम्मीदिहेट्टी सिंचाई परियोजना पर रेवंत रेड्डी ने फडणवीस से की चर्चा

@ हैदराबाद तेलंगाना :-

मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। इस बैठक में ‘तुम्मीदिहेट्टी सिंचाई परियोजना’ पर चर्चा हुई, जो तेलंगाना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

✅ मुंबई के सह्याद्रि स्टेट गेस्ट हाउस में हुई इस बैठक में सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी, तेलंगाना और महाराष्ट्र के मुख्य सचिव, तथा सिंचाई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

✅ मुख्य चर्चा तेलंगाना-महाराष्ट्र सीमा पर प्राणहिता नदी पर ‘तुम्मीदिहेट्टी बैराज’ के निर्माण पर केंद्रित थी। बैठक में बैराज की ऊंचाई, पानी की उपलब्धता, जलमग्न होने वाले क्षेत्रों पर प्रभाव और अन्य तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

✅ बैठक की शुरुआत में, मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने एक प्रस्तुति दी, जिसमें तुम्मीदिहेट्टी परियोजना के महत्व को रेखांकित किया गया। उन्होंने महाराष्ट्र के प्रतिनिधिमंडल का ध्यान अविभाजित आदिलाबाद जिले के इतिहास और संस्कृति, वहां के आदिवासी समुदायों के जीवन-यापन की स्थितियों और उस क्षेत्र के आर्थिक पिछड़ेपन की ओर आकर्षित किया।

✅ उन्होंने बताया कि समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के बावजूद, अविभाजित आदिलाबाद जिला विकास के मामले में पीछे रह गया है, और प्रगति का लाभ वहां के आदिवासी समुदायों तक नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे आर्थिक अवसरों की कमी और वहां मौजूद पिछड़ेपन ने अतीत में नक्सलवाद जैसी समस्याओं को जन्म देने में योगदान दिया।

✅ उन्होंने इस क्षेत्र को सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने के लिए अब तक किए गए विभिन्न प्रयासों का जिक्र किया—जिसकी शुरुआत 6 अक्टूबर 1975 को तत्कालीन मुख्यमंत्री जलगाम वेंगल राव और एस. बी. चव्हाण के बीच हुए एक समझौते से हुई थी। उन्होंने कहा कि पिछले पांच दशकों में कई प्रस्ताव रखे गए और चर्चाएं हुईं, लेकिन अपेक्षित प्रगति हासिल नहीं हो सकी।

✅ उन्होंने याद दिलाया कि 2016 में तुम्मीदिहेट्टी बैराज की ऊंचाई 148 मीटर तय करने के लिए एक समझौता हुआ था। हालांकि, मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने स्पष्ट किया कि इस ऊंचाई पर बैराज बनाने से तेलंगाना क्षेत्र की पीने के पानी और सिंचाई की जरूरतें पूरी तरह से पूरी नहीं हो पाएंगी।

✅ उन्होंने वर्तमान बिजली की जरूरतों, ऊर्जा की लागत, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन पर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि परियोजना के रखरखाव की लागत एक बहुत महत्वपूर्ण कारक है; इसलिए, उन्होंने ऐसे विकल्पों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया, जिनमें पानी का बहाव गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी) के जरिए हो सके।

✅ इन परिस्थितियों को देखते हुए, उन्होंने बताया कि 152 मीटर की ऊंचाई पर ‘तुमिदिहेट्टी बैराज’ (Tummidihetti Barrage) का निर्माण करना सबसे फायदेमंद विकल्प है। अपनी प्रस्तुति के माध्यम से, मंत्री ने तकनीकी, परिचालन और वित्तीय पहलुओं के आधार पर इस प्रस्ताव के महत्व को विस्तार से समझाया।

✅ मंत्री ने स्पष्ट किया कि बैराज के निर्माण के कारण महाराष्ट्र में अगर कोई कृषि भूमि डूबती है, तो तेलंगाना सरकार उसके लिए मुआवजा देने को तैयार है। यह बताया गया कि किसानों को मुआवजा, महाराष्ट्र राज्य में लागू भूमि अधिग्रहण नियमों और मुआवजा नीति के अनुसार दिया जाएगा।

✅ इस अवसर पर बोलते हुए, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने तेलंगाना और महाराष्ट्र के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने उस ऐतिहासिक जुड़ाव का जिक्र किया जो दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों का पूर्ववर्ती ‘हैदराबाद रियासत’ (Hyderabad Princely State) के साथ था। उन्होंने बताया कि अविभाजित आदिलाबाद जिला मुख्य रूप से एक अविकसित वन क्षेत्र है।

✅ उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का ध्यान उस क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी और मूल निवासी समुदायों के सामने आने वाली चुनौतियों की ओर दिलाया। उन्होंने कोमाराम भीम के नेतृत्व में ‘जल, जंगल, जमीन’ के लिए किए गए संघर्ष को याद करते हुए कहा कि आदिलाबाद क्षेत्र के लोग उस संघर्ष के दौर से ही सिंचाई और पीने के पानी की सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं।

✅ उन्होंने कहा कि उनकी उम्मीदें दशकों से पूरी नहीं हुई हैं और आदिलाबाद के आदिवासी और मूल निवासी लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने दोनों राज्यों से इन पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया।

✅ मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय रणनीतिक हितों के लिहाज से आदिलाबाद क्षेत्र के रणनीतिक महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आदिलाबाद में प्रस्तावित रक्षा और नागरिक हवाई अड्डे (सिविल एयरपोर्ट) की सुविधा, अविभाजित आदिलाबाद जिले के विकास को एक बड़ी गति देगी।

✅ उन्होंने आगे बताया कि महाराष्ट्र के सीमावर्ती इलाकों को भी इस विकास कार्य से फायदा मिलेगा। यह कहा गया कि इस परियोजना से दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं, आर्थिक गतिविधियों और विकास के अवसरों में सुधार होगा। तुममिदिहेट्टी बैराज केवल सिंचाई परियोजना ही नहीं है, बल्कि यह एक पुल की तरह भी काम करेगा, जो दोनों राज्यों को आपस में जोड़ेगा।

✅ पिछड़े इलाकों के विकास और आदिवासी समुदायों के कल्याण के लिए दोनों राज्यों के बीच सहयोग बहुत जरूरी है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से अनुरोध किया गया कि वे आपसी हितों को ध्यान में रखते हुए तुममिदिहेट्टी बैराज के निर्माण में सहयोग दें।

❇️ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया।

✅ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने तेलंगाना के प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तेलंगाना के साथ अपने करीबी संबंधों का जिक्र किया और सीमा से सटे आदिलाबाद क्षेत्र के साथ अपने विशेष जुड़ाव के बारे में बताया; उन्होंने यह भी कहा कि उनकी नानी तेलुगु बोलती थीं।

✅ उन्होंने तुममिदिहेट्टी बैराज की ऊंचाई बढ़ाने के तेलंगाना के अनुरोध पर फिर से विचार करने की इच्छा जताई। हालांकि, उन्होंने कहा कि कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले तकनीकी, पर्यावरणीय और प्रशासनिक जैसे कई पहलुओं का अध्ययन करना होगा।

✅ उन्होंने कहा कि 148 मीटर की ऊंचाई से जुड़े समझौते पर फिर से विचार करने में कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते इससे महाराष्ट्र या वहां के लोगों पर कोई बुरा असर न पड़े। फडणवीस ने स्पष्ट किया कि तेलंगाना की पानी संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहयोग देने में उन्हें कोई ऐतराज नहीं है, और वे राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।

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