विलुप्ति के कगार पर है पहाडों की कामधेनु बद्री गाय

@ कमल उनियाल उत्तराखंड :-

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पायी जाने वाली बद्री गाय जिसे पहाडों की कामधेनु कहा जाता है अब विलुप्ति के कगार पर खडी है। बद्री गाय उत्तराखंड की पहली पंजीकरण गाय है 2016 में सरकार ने बद्री गाय को प्रमाणित नस्ल की गाय घोषित की थी।

पर्वतीय क्षेत्रों में पायी जाने वाली इस गाय की अपनी अलग ही पहचान थी। पर इनका संरक्षण न होने के कारण यह अब सीमित क्षेत्रों में ही रह गयी है इसका दूध अमृत के समान होता है जंगल में पाये जाने वाले पौष्टिक घास प्राकृतिक जडी बूटी खाने से इनके दूध में हाईकेलोरी प्रोटीन होता है इसके घी सेवन से शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ती है। बद्री गाय का घी अनेक असाध्य रोगो को ठीक करने में रामबाण साबित हो रहा है। आज सबसे मंहगा घी बद्री गाय का ही है इसका घी प्राकृतिक विरासत के प्रतीक है।

पहले बद्री गाय हर घर में पाली जाती थी पर व्यवसाय के लिए इनकी जगह जर्सी गायो ने ले ली है कृत्रिम गर्भाधान से भी इस नस्ल पर असर पडा है। पशुपालक रामशरण ने कहा बद्री गाय का घी और दूध की पहचान सारे देश में प्रसिद्ध हुआ करती थी उन्होने कहा सरकार को बद्री गाय के संरक्षण और संवर्धन के लिए आगे आना होगा और पशुपालको को जागरूक करना होगा।

 

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