प्रधानमंत्री ने दिल्ली में भारत रत्न डा. एम.एस. स्वामीनाथन शताब्दी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया

@ नई दिल्ली :-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूसा, नई दिल्ली में भारत रत्न डा. एम.एस. स्वामीनाथन शताब्दी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने समारोह की अध्यक्षता की। इस अवसर पर शिवराज सिंह ने वन की सार्थकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दूसरों के लिए ना ही असली वन हैं, जो देश के लिए ता है, समाज के लिए ता है, औरों के लिए ता है, दुनिया के लिए ता है, वही सही अर्थों में वन का अर्थ सिद्ध कर पाता है। डॉ. स्वामीनाथन ऐसे ही व्यक्तित्व के धनी थे, जिन्होंने अपना वन दूसरों के लिए समर्पित कर दिया। स्वामीनाथन के बताए रास्ते पर चलते हुए हम देश व दुनिया में भूख और अभाव नहीं होने देंगे।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वामीनाथन के योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि 1942-43 में बंगाल के अकाल के कारण जब लाखों लोग भूखमरी के कगार पर पहुंच गए थे, तब स्वामीनाथन का हृदय व्यथित हो गया। उन्होंने अपने आप को खेती, किसान और भूखमरी मिटाने के लिए समर्पित कर दिया।

चौहान ने कहा कि केवल इतना स्मरण दिलाना चाहता हूं कि 1966 में मैक्सिको से अठारह हजार टन मैक्सिकन गेहूं आया था, जिसे मिश्रित करके पंजाब की किस्मों के साथ एक नई संकर किस्म गेहूं की विकसित की थी और उसी किस्म के कारण एक साल में गेहूं का उत्पादन पाँच मिलियन टन से बढ़कर सत्रह बिलियन टन हो गया था। स्वामीनाथन हरित क्रांति के जनक थे और उसके बाद उन्होंने जो कृषि विज्ञान के लिए व्यवस्था बनाई वह आज सुदृढ़ता से सही दिशा में काम कर रही है।

केंद्रीय मंत्री चौहान ने कृषि विकास व किसान कल्याण की दिशा में सरकार की प्रतिबद्वता दोहराते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का हर शब्द हमारे लिए मंत्र जैसा होता है। एक साल पहले जब प्रधानमंत्री मोदी इस पूसा परिसर में पधारे थे तब उन्होंने हमें कहा था -लैब टू लैंड जोड़ो, विज्ञान और किसान जब तक नहीं मिलेंगे, तब तक खेती सही दिशा में आगे नहीं बढ़ेगी। प्रधानमंत्री की प्रेरणा से आज ‘लैब टू लैंड’ जोड़ने सहित अनेक अभियान चलाए जा रहे हैं।

शिवराज सिंह चौहान ने प्रति हेक्टेयर दलहन और तिलहन की उत्पादकता बढ़ाने कीबात करते हुए कहा कि सोयाबीन हो, मूंगफली हो, सरसों हो, तिल हो या चना मसूर, उड़द, अरहर हो, उसमें उत्पादन कैसे बढ़े, इस दिशा में भी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में तत्परता से काम किया जा रहा है।

अंत में केंद्रीय मंत्री चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एक प्राकृतिक कृषि मिशन की शुरुआत की गई है। आने वाली पीढ़ियों के लिए भी धरती से अन्न, फल और सब्जियों की उपज होती रहें, इसके लिए इस मिशन के माध्यम से वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ गंभीरता से काम किया जा रहा है।

यह सम्मेलन कृषि विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी हस्ती एवं खाद्य सुरक्षा के अग्रदूत, प्रो. डा. एम.एस. स्वामीनाथन की जन्मशती के उपलक्ष्य में, एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी के सहयोग से 7-9 अगस्त, 2025 पूसा कैंपस, नई दिल्ली में आयोजित किया गया है। सम्मेलन का थीम “सदाबहार क्रांति – जैव-सुख का मार्ग” है। यहां शिवराज सिंह ने प्रो. स्वामीनाथन के वन परिदृश्य और उनके अमूल्य योगदान को दर्शाती हुई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

कार्यक्रम में नीति आयोग के सदस्य डॉ. रमेश चंद के अलावा सु सौम्या स्वामीनाथन सहित कृषि विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, किसान और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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