@ कमल उनियाल उत्तराखंड :-
उत्तराखंड के पर्वतीय जिलो में लगातार तीन दिनों से हो रही बारिश के कारण जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। गाँवो को जोडने वाले सम्पर्क मार्ग टूट गये हैं सडक मार्ग पर पहाड़ टूटने के कारण बडे बडे पत्थर गिर रहे हैं पानी के सैलाब के आगे जन जीवन पटरी से उतर गया है।

पौड़ी जिला के विकास खंड द्वारीखाल के अंतर्गत अनेक गाँवो में आवासीय मकान, गोशाला, गाँव को जोड़ने वाला सम्पर्क मार्ग, आवासीय मकान का बुनियादी पुस्ता, पेयजल लाईन क्षतिग्रस्त हो गये हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूधँसाव के कारण विशालकाय पत्थर गिर रहे हैं जिसमे वाहन क्षतिग्रस्त हो गये हैं जिस कारण कयी लोग की मौत तथा घायल हुये है। नाला गधरो में जल उफान पर है जिससे स्थानीय लोग डरे सहमे हुए हैं।

आखिर यह प्रश्न बना हुआ है इस तरह की घटना में तेजी क्यो आ रही है इसका मुख्य कारण प्रकृति से छेड़छाड़ है हर आदमी चहाता है उसके मकान के आँगन तक सडक पहुँचें मुख्य सड़क मार्ग अगर गाँव से मात्र 500मीटर की दूरी पर भी है वहाँ तक कोई पैदल नहीं जाना चहाता जिस कारण जेसीबी मशीनो की चोट से पहाड़ का सीना छलनी हो गया है जिससे चट्टान और मिट्टी की स्थरिता पर प्रतिकूल प्रभाव पड रहा है।
इस कारण चट्टान, पत्थर, मिट्टी जर्जर होकर पानी के सैलाब के कारण भरभराकर टूट रहे हैं, सड़क निर्माण के समय चट्टानों पर विस्फोट से भी पहाड कमजोर हो रहे हैं जो कि आने वाले समय में बहुत बड़ी आपदा आने की संकेत दे रहे हैं। देवभूमी उत्तराखंड और हिमांचल क्यों इस तरह की आपदा के चपेट में आ रहे हैं यह भविष्य के लिए चिंता का बिषय है।

