@ सोलन हिमाचल :-
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सोलन जिले के अर्की में आयोजित राज्य स्तरीय सायर मेले के समापन समारोह को संबोधित करते हुए प्रदेशभर के सीबीएसई स्कूलों में अगले तीन माह के भीतर 2,000 और शिक्षकों की नियुक्ति करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जब राज्य सरकार ने कुछ माह पहले प्रदेश में 150 सीबीएसई स्कूल खोलने की घोषणा की थी, तो इस निर्णय का विरोध किया गया था। इन स्कूलों में शिक्षकों का चयन पूरी तरह योग्यता के आधार पर और बिना किसी सिफारिश के किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सीबीएसई स्कूल में पांच से आठ शिक्षकों की नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है तथा शेष पदों को भी शीघ्र भर दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी स्कूलों में सीबीएसई शिक्षा काफी महंगी है, जबकि राज्य सरकार सरकारी स्कूलों में भी इसी स्तर की सुविधाएं कम खर्च में उपलब्ध करवाने के लिए प्रयासरत है।
मुख्यमंत्री ने किशाऊ बहुद्देश्यीय परियोजना से संबंधित समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समझौता ऐसे समय में हुआ, जब दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में पानी की कमी की आशंका जताई जा रही थी। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने समझौते की पूर्व निर्धारित शर्तों को स्वीकार कर लिया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा की सरकार होती तो हिमाचल प्रदेश की जनता पर 3,000 करोड़ से 5,000 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता था तथा राज्य को 1,200 करोड़ से 1,500 करोड़ रुपये तक की संभावित वार्षिक आय से भी वंचित होना पड़ सकता था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका स्पष्ट मत है कि जिन राज्यों को पानी की आवश्यकता है, उन्हें ही विद्युत परियोजना की लागत भी वहन करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता के सहयोग और दृढ़ संकल्प से अंततः राज्य के हित में शर्तों पर यह समझौता सुनिश्चित किया गया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने भी हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर इसी प्रकार के समझौते की मांग की थी, लेकिन वह इसे प्राप्त नहीं कर सका।
श्री सुक्खू ने पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि बद्दी, बरोटीवाला और नालागढ़ में करीब 5,000 बीघा भूमि कुछ पसंदीदा उद्योगपतियों को बिना पंजीकरण शुल्क के आवंटित की गई, लेकिन अभी तक वहां कोई उद्योग स्थापित नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसे आवंटनों को रद्द करने पर विचार कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने से लगभग 3,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है। इन संसाधनों का उपयोग विधवाओं, बच्चों और समाज के अन्य जरूरतमंद वर्गों के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के माध्यम से अर्जित संपत्तियों की जांच की जा रही है और यदि यह पाया गया कि संपत्तियां अवैध तरीके से अर्जित की गई हैं, तो उन्हें जब्त कर गरीब एवं जरूरतमंद लोगों के कल्याण के लिए उपयोग किया जाएगा। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ इस अभियान में आम जनता से भी सहयोग का आह्वान किया।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने दिग्गल, भूमती और जय नगर के स्कूलों को सीबीएसई स्कूलों में परिवर्तित करने की घोषणा की। उन्होंने कुनिहार-सारमा, मांगू-मलावण, जाबल-जय नगर, भूमती-डाडल-पिपलूघाट तथा कोहू-भियूंकरी वाया सौर सड़कों की मरम्मत के लिए धन उपलब्ध करवाने की भी घोषणा की।
विधायक संजय अवस्थी की मांग पर मुख्यमंत्री ने अर्की में कौशल विकास केंद्र खोलने के प्रस्ताव पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने शिमला-धैना बस सेवा को बहाल करने की भी घोषणा की। इससे पूर्व, ट्रांसपोर्टर्ज के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से भेंट कर अपनी मांगों से अवगत करवाया। मुख्यमंत्री ने उनकी सभी जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए कार्य कर रहे हैं और प्रभावी प्रबंधन के माध्यम से राज्य में विकास कार्यों को गति प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ राजनीतिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है, लेकिन प्रदेश सरकार के प्रयासों से हिमाचल प्रदेश आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, विधायक विनोद सुल्तानपुरी और हरदीप सिंह बावा, विभिन्न बोर्ड एवं निगमों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि, सोलन जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष वर्माणी, उपायुक्त मनमोहन शर्मा एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
