@ नई दिल्ली :-
उत्तराखंड की भाषा, संस्कृति और सामाजिक विरासत को सिनेमा के माध्यम से सामने लाने की दिशा में एक और पहल करते हुए बहुप्रतीक्षित गढ़वाली फीचर फिल्म ‘सुपान्यू’ (SUPANYU) का पोस्टर एवं ट्रेलर 1 नवंबर, रविवार को नई दिल्ली के वसंत कुंज स्थित ‘सिल्वन शेफ फार्म एंड बैंक्वेट’ में जारी किया गया। लॉन्च समारोह में मौजूद मेहमानों और दर्शकों ने तालियों के साथ फिल्म की पहली झलक का स्वागत किया।
ट्विंकल प्रोडक्शंस के बैनर तले निर्मित इस फिल्म के मुख्य निर्माता के.एम. धौंडियाल हैं, जो सिल्वन शेफ बैंक्वेट्स के मालिक भी हैं। उनकी पत्नी फिल्म की सह-निर्माता हैं, जबकि अजय बिष्ट ने कार्यकारी निर्माता की जिम्मेदारी निभाई है। फिल्म की कहानी और पटकथा लेखन के साथ निर्देशन का दायित्व उत्तराखंड फिल्म जगत के चर्चित निर्देशक देबू रावत ने संभाला है।

समारोह में दिल्ली के वरिष्ठ न्यायाधीश प्रेम बर्थवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इसके अलावा पार्षद कैंतोरा, वसंत कुंज के इंद्रजीत, गढ़वाली फिल्म ‘कंडाली’ के निर्माता एवं एयर वाइस मार्शल (सेवानिवृत्त) राजेश भंडारी, भाजपा दिल्ली के उपाध्यक्ष विनोद बछेती, वरिष्ठ पत्रकार एवं यूकेनेशनन्यूज के संपादक सुनील नेगी, उत्तराखंड के डिप्टी एडवोकेट जनरल कुलदीप परिहार और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता जे.एस. रावत भी कार्यक्रम का हिस्सा बने।
विशिष्ट अतिथियों में पांच बार राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित सेवानिवृत्त एसीपी ललित मोहन सिंह नेगी (वर्तमान में स्पेशल सेल में सलाहकार), दिल्ली पुलिस के एसीपी एवं अभिनेता पद्मेंद्र रावत, जोधा फिल्म्स के संजय जोशी (निर्माता ‘चक्रव्यूह’ और ‘घंगटोल’), अधिवक्ता कोटनाला जी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
मातृभाषा और संस्कृति को सहेजने की जरूरत पर जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि वरिष्ठ न्यायाधीश प्रेम बर्थवाल ने फिल्म के प्रयास की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र से निकलकर दिल्ली और देश के दूसरे महानगरों में बसे लोगों ने अपनी मेहनत, निष्ठा और ईमानदारी से समाज में विशिष्ट पहचान बनाई है। हालांकि, नई पीढ़ी का गांवों से बढ़ता भौतिक और सांस्कृतिक फासला चिंता का विषय है, क्योंकि इससे अपनी बोलियों और परंपराओं के धीरे-धीरे लुप्त होने का खतरा पैदा हो रहा है।
उन्होंने कहा कि ‘सुपान्यू’ जैसी फिल्में अपनी सांस्कृतिक पहचान को फिर से मजबूत करने और पारंपरिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती हैं।

भाजपा दिल्ली के उपाध्यक्ष विनोद बछेती ने भी मातृभाषा के संरक्षण को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने जानकारी दी कि नई पीढ़ी को अपनी पैतृक भाषाओं से परिचित कराने के उद्देश्य से पिछले कई वर्षों से गढ़वाली और कुमाऊंनी भाषा की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। उनके अनुसार, ऐसे सांस्कृतिक आयोजन और फिल्में प्रवासी समाज को अपनी जड़ों से जोड़े रखने के साथ-साथ युवाओं में अपनी भाषा सीखने की रुचि पैदा करते हैं।
वरिष्ठ पत्रकार एवं यूकेनेशनन्यूज के संपादक सुनील नेगी ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में उत्तराखंडी फिल्मों के प्रदर्शन और उनके लॉन्च कार्यक्रमों में लोगों की भागीदारी इस बात को दर्शाती है कि प्रवासी उत्तराखंडी अपनी मातृभाषा, लोककला, लोक संस्कृति और पहाड़ी विरासत के प्रति आज भी गहरा लगाव रखते हैं। उनके मुताबिक, महानगरों में रहते हुए भी अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने की यह भावना बेहद महत्वपूर्ण है।

‘सुपान्यू’ शीर्षक में छिपा है प्रवासियों के सपनों का भाव
गढ़वाली फिल्म ‘कंडाली’ के निर्माता एयर वाइस मार्शल (सेवानिवृत्त) राजेश भंडारी ने फिल्म की अवधारणा के साथ-साथ उसके शीर्षक ‘सुपान्यू’ की भी विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड से मैदानी क्षेत्रों और बड़े शहरों की ओर आने वाले प्रत्येक प्रवासी के मन में जीवन में आगे बढ़ने, एक बेहतर नागरिक बनने और अपनी अलग पहचान स्थापित करने का सपना होता है। अपनी मेहनत और संकल्प के बल पर अनेक लोग इन सपनों को साकार भी करते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की फिल्में केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि दर्शकों को अपने पूर्वजों के संघर्ष, परंपराओं, सामाजिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों और सांस्कृतिक धरोहर को समझने का अवसर भी देती हैं।
गांव से महानगर तक का सफर बना फिल्म के नाम की प्रेरणा
फिल्म के निर्देशक एवं पटकथा लेखक देबू रावत और निर्माता के.एम. धौंडियाल ने समारोह में आए अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान उन्हें गुलदस्ते, वस्त्र और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित भी किया गया।
अपने संबोधन में देबू रावत ने अपने जीवन के संघर्ष और सफर को साझा करते हुए बताया कि कई दशक पहले वे भी बेहतर आजीविका और भविष्य की तलाश में अपने गांव से दिल्ली आए थे। समय के साथ उन्होंने अपने उन सपनों को हकीकत में बदला, जिन्हें लेकर कभी उन्होंने अपना गांव छोड़ा था। आज एक प्रतिष्ठित उद्यमी के रूप में उनकी पहचान उसी संघर्ष और संकल्प का परिणाम है।
उन्होंने बताया कि प्रवास, संघर्ष और सपनों के इसी भाव को फिल्म में अभिव्यक्त करने के लिए इसका नाम ‘सुपान्यू’ रखा गया है, जिसका अर्थ है ‘सपने’। फिल्म का शीर्षक उन अनगिनत प्रवासियों की आकांक्षाओं और जीवन यात्रा को भी प्रतिबिंबित करता है, जो अपने गांवों से दूर रहकर बेहतर भविष्य बनाने का प्रयास करते हैं।
कार्यक्रम का संचालन फिल्म के अभिनेता एवं कार्यकारी निर्माता अजय बिष्ट ने प्रभावशाली अंदाज में किया। पोस्टर और ट्रेलर लॉन्च के बाद आयोजित रात्रिभोज के साथ समारोह का समापन हुआ।

प्रमुख कलाकार
– अजय सिंह बिष्ट
– राजेश जोशी
– अनुज खंडारी
– नवल सेमवाल
– संजय बडोनी
– सोनिया थापर
डायरेक्टर एवं निर्माता
– डायरेक्टर: देवू रावत
– निर्माता: कौशल मणि ढोंढियाल
– सह-निर्माता: पुष्पा ढोंढियाल
– बैनर: ट्विंकल फिल्म्स
