@ हैदराबाद आंध्रा प्रदेश :-
भुवनेश्वर के सहयोग से जनजातीय कार्य मंत्रालय ने ICMR–नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ रिसर्च (ICMR-NIHR), ‘जनजातीय स्वास्थ्य संस्थागत परिवर्तन’ (JanHIT) पहल के अंतर्गत, 1-2 नवंबर 2026 को कान्हा शांति वनम, हैदराबाद में जनजातीय चिकित्सकों के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य पर अपनी तरह का पहला राष्ट्रीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन कान्हा शांति वनम, हैदराबाद के ऑडिटोरियम में जनजातीय कार्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री मनीष ठाकुर और ICMR-NIHR, भुवनेश्वर की निदेशक डॉ. संघमित्रा पति ने किया।
इस अवसर पर तेलंगाना के विशेष सचिव और जनजातीय कल्याण निदेशक श्री बी. एम. संतोष (IAS), तेलंगाना के जनजातीय सांस्कृतिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TCR&TI) की निदेशक डॉ. वी. समुज्वला, तथा जनजातीय कार्य मंत्रालय और ICMR-NIHR, भुवनेश्वर के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। ‘जनजातीय गौरव दिवस पखवाड़ा’ के पहले दिन शुरू की गई यह महत्वपूर्ण पहल, समावेशी स्वास्थ्य और क्षमता-निर्माण के माध्यम से भारत के जनजातीय समुदायों को सम्मान देने और सशक्त बनाने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इस ओरिएंटेशन कार्यक्रम के पहले चरण में भारत के नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (आंध्र प्रदेश, गोवा, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना, और दादरा एवं नगर हवेली) के राज्य जनजातीय कल्याण विभागों द्वारा नामित लगभग 550 जनजातीय चिकित्सक भाग ले रहे हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय चिकित्सकों को सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े प्रमुख मुद्दों के बारे में जानकारी देना और सामान्य बीमारियों, खतरे के संकेतों की जल्द पहचान, तथा समय पर चिकित्सा देखभाल के लिए सही जगह रेफर करने (रेफरल) के बारे में उनकी समझ को मजबूत करना है। जनजातीय समुदायों में चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए, इस पहल का लक्ष्य उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य प्रथाओं के बारे में जागरूक करना और उन्हें औपचारिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली से जोड़ना है।
दो दिवसीय इस ओरिएंटेशन कार्यक्रम में तीन प्रशिक्षण मॉड्यूल शामिल होंगे, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी विभिन्न चिंताओं को संबोधित करेंगे। इनमें संक्रामक और वेक्टर-जनित बीमारियां, त्वचा संबंधी रोग, गैर-संक्रामक बीमारियां, मेटाबॉलिक और रक्त संबंधी विकार, लिवर की बीमारियां और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं। इन सत्रों में सांप के काटने, बिच्छू या अन्य जीवों के डंक मारने, जानवरों के काटने, चोट लगने, आंख और कान के विकारों, मौखिक स्वास्थ्य, तथा नवजात और शिशुओं की देखभाल के मामलों में सही जगह रेफर करने (रेफरल) पर भी ध्यान दिया जाएगा। प्रशिक्षण में एकीकृत अभ्यास, समीक्षा सत्र, प्रशिक्षण के बाद मूल्यांकन और प्रतिभागियों से फीडबैक लेना भी शामिल होगा, ताकि सीखी गई बातों को पक्का किया जा सके और इस ओरिएंटेशन कार्यक्रम की प्रभावशीलता को आंका जा सके।
अलग-अलग राज्यों के प्रतिभागी इस 2 दिवसीय कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। बेहतर बातचीत और सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए, क्षेत्रीय भाषाओं में प्रशिक्षण सत्रों की राज्य-वार व्यवस्था की गई है। एम्स (AIIMS), आईसीएमआर (ICMR), क्वालिटी कंट्रोल ऑफ इंडिया, एमएस स्वामीनाथन फाउंडेशन, अमृता इंस्टीट्यूट (कोच्चि), आईआईएचएमआर (IIHMR, बेंगलुरु) और पिरामल स्वास्थ्य (महाराष्ट्र) के विशेषज्ञ, पारंपरिक चिकित्सकों (healers) के लिए उनकी अपनी भाषाओं में सत्र आयोजित करेंगे।
आदिवासी पारंपरिक चिकित्सकों को स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी बातों और मरीजों को सही जगह रेफर करने के तरीकों के बारे में प्रशिक्षित करके, यह कार्यक्रम सामुदायिक स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सहायता को बढ़ावा देना चाहता है। साथ ही, इसका उद्देश्य आदिवासी समुदायों की पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों और औपचारिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के बीच सहयोग को मजबूत करना है। आईसीएमआर-एनआईएचआर (ICMR-NIHR), भुवनेश्वर द्वारा MoTA (जनजातीय कार्य मंत्रालय) के सहयोग से तैयार किया गया यह क्षमता-निर्माण मॉड्यूल, आदिवासी स्वास्थ्य पद्धतियों को औपचारिक चिकित्सा प्रणालियों के साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह प्रयास विशेष रूप से ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के अवसर पर और भी मायने रखता है। यह कार्यक्रम 2 नवंबर 2026 को एक समापन समारोह के साथ पूरा होगा, जिसमें प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए जाएंगे।
