@ नई दिल्ली :-
वायु सेना के स्कूलों में साइबर सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए, वायु मुख्यालय के तत्वावधान में भारतीय वायु सेना शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सोसाइटी ने सूचना साझाकरण एवं विश्लेषण केंद्र फाउंडेशन के माध्यम से देशभर के वायु सेना स्कूलों को व्यापक बाल डिजिटल सुरक्षा कार्यक्रम ‘स्क्रॉलकंट्रोल’ से जोड़ा है। यह पहल राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के आयोजन के साथ शुरू की गई है।
देशभर के 42 वायु सेना स्कूलों के 261 शिक्षकों ने साइबर अपराध हस्तक्षेप अधिकारी के रूप में प्रमाणन पाठ्यक्रम पूरा किया है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य बच्चों को ऑनलाइन प्रलोभन एवं शोषण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दुरुपयोग, ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े जोखिमों और वित्तीय धोखाधड़ी से सुरक्षित रखना है। इसके साथ ही शिक्षकों को डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और साइबर अपराध की घटनाओं में प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाया गया है।

किफायती हाई-स्पीड इंटरनेट, स्मार्ट उपकरणों और सोशल मीडिया तक आसान पहुंच के इस दौर में स्कूली बच्चे बड़ी संख्या में ऐसे अनियंत्रित डिजिटल माध्यमों के संपर्क में आ रहे हैं, जिन्हें मुख्य रूप से वयस्कों के उपयोग के लिए तैयार किया गया है। साइबर जगत में स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अपने संबद्ध स्कूलों को प्रत्येक माह ‘साइबर जागरूकता दिवस’ मनाने के माध्यम से साइबर सुरक्षा की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को अपनाने का निर्देश दिया है। वर्तमान पहल वायु सेना के स्कूलों को प्रशिक्षित आंतरिक व्यवस्था विकसित करने और इस आवश्यकता के अनुरूप कार्य करने में सक्षम बनाएगी।
स्क्रॉलकंट्रोल कार्यक्रम के माध्यम से वायु सेना के स्कूल साइबर क्लब स्थापित कर सकेंगे, विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के संबंध में प्रमाणित प्रशिक्षण दे सकेंगे तथा अभिभावकों और कर्मचारियों के लिए जागरूकता सत्र आयोजित कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, परिवारों के लिए आयु-उपयुक्त डिजिटल सामग्री की रेटिंग करने वाले प्लेटफॉर्म तक पहुंच प्राप्त होगी और स्कूलों को ‘साइबर सुरक्षित स्कूल’ के रूप में मान्यता भी मिल सकेगी।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षकों का प्रशिक्षण एवं प्रमाणन, राष्ट्रीय सुरक्षा डेटाबेस में उनको पैनल में शामिल किया जाना तथा साइबर अधिवक्ताओं, साइबर मनोवैज्ञानिकों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों के बहु-विषयक तंत्र के माध्यम से पीड़ितों को 24 घंटे सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था आईएसएसी फाउंडेशन द्वारा की जा रही है।
