@ गांधीनगर गुजरात :-
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राज्य के प्राथमिक शिक्षा विभाग में नई नियुक्ति प्राप्त करने वाले नवनियुक्त विद्या सहायकों को विकसित भारत का संकल्प साकार करने वाले अमृतकाल के सच्चे प्रहरी बताया है। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि राज्य सेवा में जुड़ रहे ये शिक्षक विद्यार्थियों का ऐसा सुदृढ़ निर्माण करें कि वे विकसित भारत के निर्माण में पूर्ण सहयोग दे सकें।
प्राथमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत चयनित नवनियुक्त विद्या सहायकों को अभिनंदन तथा अनुशंसा पत्र प्रदान करने का गौरवपूर्ण समारोह सोमवार को गांधीनगर में अडालज के त्रिमंदिर में आयोजित हुआ। इस समारोह में शिक्षा मंत्री डॉ. प्रद्युमन वाजा तथा शिक्षा राज्य मंत्री मती रिवाबा जाडेजा उपस्थित रहे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि 8,000 से अधिक विद्या सहायकों की भर्ती में 6,000 से अधिक महिला उम्मीदवार चयनित हुई हैं, जो शिक्षा क्षेत्र में नारी शक्ति के बढ़ते दबदबे का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गुजरात में शुरू कराया कन्या केळवणी (शिक्षा) महोत्सव और शाला प्रवेशोत्सव का दृष्टिकोण आज वटवृक्ष बन चुका है, जिसका परिणाम आज देखने को मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने जोड़ा कि पूर्ण पारदर्शिता के साथ मेहनती उम्मीदवारों का चयन किया गया है। उम्मीदवारों को अपनी मेहनत के आधार पर नौकरी मिली है। इस बात का आनंद और गौरव अभिभावकों तथा परिवारजनों की बड़ी उपस्थिति में देखने को मिल रहा है। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि शिक्षा विभाग आगामी समय में और लगभग 10,000 शिक्षकों की भर्ती करने का आयोजन कर रहा है।
शिक्षक पद के गौरव को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में शिक्षक का पद अत्यंत आदरणीय है। कोई व्यक्ति कितना भी बड़ा डॉक्टर, इंजीनियर या वैज्ञानिक बन जाए, लेकिन वह अपने शिक्षक के सामने झुकता ही है।
संत ज्ञानेश्वर का मार्मिक रूप से उदाहरण देते हुए उन्होंने शिक्षकों को डिजिटल तथा सोशल मीडिया का विवेकपूर्ण उपयोग करने की हिदायत भी दी। उन्होंने विशेष उल्लेख किया कि शिक्षक समुदाय का व्यवहार एवं आचरण हमेशा बाल मानस पर प्रभाव डालता है।
मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त विद्या सहायकों तथा उनके परिजनों को आगामी दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं और राज्य सेवा में उनका स्वागत किया।
त्रिमंदिर, अडालज में आयोजित इस अभिनंदन समारोह में शिक्षा मंत्री डॉ. प्रद्युमन वाजा ने नवनियुक्त विद्या सहायकों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य के संवेदनशील मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने प्राथमिक शिक्षा की नींव को मजबूत करने के दृढ़ संकल्प के साथ कक्षा 1 से 5 तक गुजराती माध्यम की लगभग 11,000 और अन्य माध्यमों की लगभग 987 रिक्तियों सहित कुल लगभग 12,000 विद्या सहायकों की ऐतिहासिक भर्ती पूर्णतः मेरिट एवं टेक्नोलॉजी के आधार पर पारदर्शी ढंग से पूर्ण की है। उन्होंने जोड़ा कि यह कार्यक्रम अनेक परिवारों की आशाओं को नए पंख देकर गुजरात का भविष्य उज्ज्वल बनाने का अवसर है।
शिक्षा राज्य मंत्री मती रिवाबा जाडेजा ने नवचयनित विद्या सहायकों को अभिनंदन देते हुए कहा कि शिक्षक केवल पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि भविष्य का निर्माता है, क्योंकि राष्ट्र का भविष्य कक्षाओं में सुनिश्चित होता है और विद्यालय में ही उत्तम विचारशील व्यक्तित्व तथा चरित्र निर्माण की नींव रखी जाती है। केवल ज्ञान की तुलना में आचरण और चरित्र का मूल्य विशेष रूप से अधिक है। इसलिए शिक्षा केवल अक्षरज्ञान तक सीमित न रहते हुए मूल्यों, कौशलों तथा टेक्नोलॉजी आधारित होनी चाहिए।
गुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने जोड़ा कि जिन्हें सच्ची देशसेवा करनी हो, उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना चाहिए, क्योंकि देश के भविष्य के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षा व्यवस्था में नवनियुक्त शिक्षक बच्चों में उत्तम ज्ञान एवं संस्कारों का सिंचन कर राज्य तथा राष्ट्र का नाम रोशन करेंगे।
इस समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश पटेल, गुजरात शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मुकेश पंड्या, स्कूल कार्यालय आयुक्त आनंद पटेल, कलेक्टर रविन्द्र खताले, प्राथमिक शिक्षा निदेशक प्रकाश त्रिवेदी तथा बड़ी संख्या में विद्या सहायक और उनके परिजन उपस्थित रहे।
