@ नई दिल्ली
ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की सांस्कृतिक परंपराओं, लोक कलाओं और गीतों के विभिन्न रूपों को बढ़ावा देने के लिए, भारत सरकार ने पटियाला, नागपुर, उदयपुर, प्रयागराज, कोलकाता, दीमापुर और तंजावुर में मुख्यालयों के साथ सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र स्थापित किए हैं।

ये क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र पूरे देश में नियमित आधार पर पूरे वर्ष विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों और कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं, जिसके लिए उन्हें वार्षिक अनुदान सहायता प्रदान की जाती है। इस संबंध में, ये क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र कई योजनाओं को भी लागू करते हैं जिनमें युवा प्रतिभाशाली कलाकारों को पुरस्कार, गुरु शिष्य परंपरा, रंगमंच कायाकल्प, अनुसंधान और प्रलेखन, शिल्पग्राम, ऑक्टेव और राष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के साथ-साथ सांस्कृतिक परंपराओं, लोक कलाओं और ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की गीतों को बढ़ावा देना आदि शामिल है क्योंकि झारखंड सहित देश में ये कलाएं लुप्त हो रही है।
संस्कृति मंत्रालय के स्वायत्त निकाय जैसे-सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र, ललित कला अकादमी और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र भी ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की सांस्कृतिक परंपराओं, साहित्य, लोक कलाओं और गीतों को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, विषयगत कार्यशालाएं, व्याख्यान प्रदर्शन, भारतीय भाषाओं पर व्यावहारिक कक्षाएं, आदिवासी शिविर, शोध कार्यक्रम/गतिविधियां/कार्यक्रम और सांस्कृतिक विरासत, संगीत, नृत्य कला और शिल्प जैसी आदिवासी परियोजनाओं से संबंधित विभिन्न गतिविधियां आयोजित करते हैं।
हालांकि राज्य/ केन्द्र शासित प्रदेश वार कोई धनराशि आवंटित नहीं की जाती है, लेकिन झारखंड सहित पूरे देश में विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों और कार्यक्रमों के आयोजन के लिए सभी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों को अनुदान सहायता जारी की जाती है। पिछले तीन वर्षों के दौरान इन सभी केंन्द्रों को जारी की गई धनराशि इस प्रकार है:
| क्रम सं. | वर्ष | जारी की गई राशि (रुपये लाख में) |
| 1۔ | 2021-22 | 5881.46 |
| 2۔ | 2022-23 | 4213.45 |
| 3۔ | 2023-24 | 8392.46 |
इसके अलावा, जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार आदिवासी संस्कृति, विरासत और प्रथाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए उनके द्वारा शुरू की गई परियोजनाओं/ गतिविधियों के लिए “सपोर्ट टू टीआरआई” योजना के तहत राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों में अपने जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को वित्तीय सहायता भी प्रदान करती है। मंत्रालय समृद्ध जनजातीय सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए ऑडियो विजुअल वृत्त चित्रों सहित शोध अध्ययन / पुस्तकों का प्रकाशन/ दस्तावेजी करण भी करता है जिसमें आदिवासी संस्कृति का संरक्षण भी शामिल है।
