@ नई दिल्ली :-
राजधानी में पड़ रही कड़ाके की सर्दी जहां आमजन का जीना मुश्किल कर रही है, वहीं खुले कैंपों में रहने वाले श्रमिकों के मासूम बच्चे इस ठंड की सबसे बड़ी मार झेल रहे हैं। ऐसे ही नन्हे चेहरों को सर्द हवाओं से बचाने के लिए अमावस्या फाउंडेशन ने एक सराहनीय पहल करते हुए कड़कड़डूमा स्थित एनबीसीसी श्रमिक कैंप में बच्चों को गरम जैकेट और टोपी वितरित कीं।

वितरण के दौरान जैसे ही बच्चों ने नए ऊनी कपड़े पहने, उनके चेहरों पर खिली मुस्कान ने हर मौजूद व्यक्ति को भावुक कर दिया। यह दृश्य केवल वस्त्र वितरण नहीं, बल्कि इंसानियत की सजीव मिसाल बन गया—जहां सेवा ने संवेदना का रूप ले लिया।
कार्यक्रम में फाउंडेशन के जनरल सेक्रेटरी जोगेश गुप्ता ने कहा कि ठंड से बचाव हर बच्चे का अधिकार है और समाज के हर सक्षम वर्ग को आगे आकर ऐसे बच्चों की मदद करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि अमावस्या फाउंडेशन लंबे समय से भंडारे व जनसेवा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता के लिए भी सक्रिय भूमिका निभाता आ रहा है। यमुना स्वच्छता, हरित अभियान और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से संस्था लगातार समाज को प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनाने का कार्य कर रही है।
उन्होंने आगे कहा कि अब जरूरतमंद बच्चों के लिए वस्त्र वितरण के साथ-साथ शिक्षा सहयोग की भी योजना बनाई जा रही है, ताकि उनका आज सुरक्षित और कल उज्ज्वल हो सके।

गरम कपड़ों से जहां मासूमों को ठंड से राहत मिली, वहीं शिक्षा और जागरूकता के संकल्प ने उनके भविष्य में आशा की नई किरण जगा दी। अमावस्या फाउंडेशन की यह पहल यह संदेश देती है कि जब सेवा और संवेदना के साथ सामाजिक जिम्मेदारी जुड़ती है, तब बदलाव केवल दिखता नहीं—महसूस भी होता है।

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