@ नई दिल्ली :-
अमेरिका की एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन द्वारा नए एच-1बी वीजा आवेदनों पर लगाए गए 1 लाख डॉलर के शुल्क को रद्द कर दिया है। मैसाचुसेट्स की अमेरिकी जिला अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कांग्रेस की मंजूरी के बिना ऐसा शुल्क लगाना वैध नहीं था। इस निर्णय का कई राज्यों के अटॉर्नी जनरल्स ने स्वागत किया है।

वॉशिंगटन राज्य के अटॉर्नी जनरल निक ब्राउन ने कहा कि यह फैसला राज्य को उच्च कौशल वाले शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों को आकर्षित करने में मदद करेगा।
उनके अनुसार, शुल्क लागू रहने पर सरकारी एजेंसियों, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता। वॉशिंगटन की 30 से अधिक सरकारी संस्थाओं में करीब 500 एच-1बी वीजा धारक कार्यरत हैं।
कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने कहा कि अदालत ने इस “गैरकानूनी और महंगे” शुल्क को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह शुल्क अमेरिका की वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने की क्षमता को नुकसान पहुंचा रहा था।
अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने दोहराया कि कैलिफोर्निया प्रतिभाशाली पेशेवरों, व्यवसायों और नवाचार के लिए खुला है तथा स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में कुशल कार्यबल सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह फैसला कंपनियों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और शोध संस्थानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
