भारत और नीदरलैंड ने जल क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत किया

जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और नीदरलैंड के अवसंरचना एवं जल प्रबंधन उप-मंत्री जाप स्लूटमेकर ने 9वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह (आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू) 2026 के दौरान नई दिल्ली के भारत मंडपम में जल संबंधी रणनीतिक साझेदारी पर भारत और नीदरलैंड के बीच एक द्विपक्षीय बैठक की अध्यक्षता की।

जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी, गुजरात सरकार में जल संसाधन एवं जलापूर्ति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ईश्वरसिंह पटेल, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक के. के. मीणा, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग की सचिव अर्चना वर्मा, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष अनुपम प्रसाद, नीदरलैंड की राजदूत मारिसा गेरार्ड्स और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।

इस बैठक में जल क्षेत्र में भारत-नीदरलैंड सहयोग की समीक्षा करने और उसे और मजबूत करने का अवसर मिला, जिसमें गुजरात की कल्पसर परियोजना के लिए तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। द्विपक्षीय सहयोग के तहत, कल्पसर परियोजना के लिए सहयोग को सुगम बनाने हेतु केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी), गुजरात सरकार के कल्पसर विभाग और डच ज्ञान संस्थानों डेल्टारेस और टीयू डेल्फ़्ट के बीच दो त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

इस अवसर पर बोलते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि वे यह देखकर प्रसन्न हैं कि डेल्टारेस और टीयू डेल्फ़्ट ने कल्पसर परियोजना के क्रियान्वयन और क्षमता निर्माण में सहयोग को और मजबूत करने के लिए अपने भारतीय समकक्षों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये समझौता ज्ञापन दोनों देशों को परियोजना के सफल क्रियान्वयन की दिशा में मिलकर काम करने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेंगे।

केंद्रीय मंत्री ने उल्लेख किया कि मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान कल्पसर परियोजना पर चर्चा की गई थी, जिसके बाद 16 मई 2026 को तकनीकी सहयोग के लिए आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए थे। उन्होंने कहा कि इस परियोजना में साबरमती, माही और धाधर नदियों के अपवाह का उपयोग करके एक मीठे पानी का जलाशय बनाने की परिकल्पना की गई है, जिसमें नर्मदा नदी से लाए गए पानी को भी शामिल किया जाएगा।

उन्होंने आगे बताया कि जुलाई 2026 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की नीदरलैंड यात्रा के दौरान बाढ़ सुरक्षा, तटीय अवसंरचना, हाइड्रोलिक मॉडलिंग, स्लुइस और पंपिंग सिस्टम, डाइक तकनीक और पारिस्थितिक समाधान सहित विभिन्न क्षेत्रों में बहुमूल्य जानकारी प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि नीदरलैंड के अफस्लुइटडिज्क से कई उपयोगी समानताएं हैं, विशेष रूप से इंजीनियरिंग, जल प्रबंधन और तटीय अवसंरचना के संदर्भ में।

नीदरलैंड के अवसंरचना एवं जल प्रबंधन उप-मंत्री जाप स्लूटमेकर ने कल्पसर परियोजना पर तकनीकी सहयोग के लिए आशय पत्र के महत्व और इससे भारत-नीदरलैंड सहयोग को और बढ़ाने के अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने अफस्लुइटडिज्क का जिक्र करते हुए कहा कि यह संरचना लगभग 100 वर्ष पुरानी है और अब इसका नवीनीकरण किया जा रहा है, जिससे नीदरलैंड्स को पिछली शताब्दी में संचित अनुभव और ज्ञान साझा करने का अवसर मिलेगा।

इन समझौता ज्ञापनों के माध्यम से परियोजना की योजना, डिजाइन और कार्यान्वयन के लिए नीदरलैंड की विशेषज्ञता और उन्नत इंजीनियरिंग तकनीकों को साझा करते हुए तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। डेल्टारेस के साथ सहयोग में तकनीकी समीक्षा, हाइड्रोलिक एवं हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग, तटीय एवं संरचनात्मक इंजीनियरिंग, जलवायु अनुकूलन, क्षमता निर्माण, ज्ञान हस्तांतरण और डिजिटल अनुप्रयोग जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

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