@ नई दिल्ली :-
भारत और कुवैत के बीच रक्षा सहयोग को नई गति देने के उद्देश्य से भारत-कुवैत संयुक्त रक्षा समिति (JDC) की पहली बैठक शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित हुई। बैठक में दोनों देशों ने प्रशिक्षण, सैन्य अभ्यास, सैन्य चिकित्सा, स्टाफ वार्ता, रक्षा उद्योग तथा अनुसंधान एवं विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।

बैठक की अध्यक्षता रक्षा विभाग के संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद और पांच सदस्यीय कुवैती प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल राएद अलसकरान ने की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में तीनों सेनाओं के साथ-साथ रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने मौजूदा रक्षा संबंधों की समीक्षा की और सहयोग के नए क्षेत्रों की संभावनाओं पर चर्चा की। प्रशिक्षण तथा सैन्य अभ्यास के माध्यम से दोनों देशों की सेनाओं के बीच पेशेवर आदान-प्रदान और आपसी समझ बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। सैन्य चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग तथा स्टाफ वार्ता को मजबूत करने के मुद्दे पर भी विचार-विमर्श हुआ।
इसके अलावा रक्षा उद्योग और अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में संस्थागत संवाद को मजबूत करने के लिए संयुक्त रक्षा समिति को महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है।
भारत-कुवैत JDC की पहली बैठक दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग संबंधी समझौते के उद्देश्यों को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस समझौते पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिसंबर 2024 में कुवैत यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे। समझौते के तहत दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को संस्थागत रूप देने और आपसी समन्वय बढ़ाने की दिशा में प्रतिबद्धता जताई थी।
JDC की पहली बैठक से भारत और कुवैत के बीच रक्षा संबंधों को व्यापक और व्यवस्थित आधार मिलने की उम्मीद है। दोनों पक्षों की सहमति से प्रशिक्षण, सैन्य संपर्क, रक्षा प्रौद्योगिकी और चिकित्सा सहयोग जैसे क्षेत्रों में भविष्य में संयुक्त गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। बैठक ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक और रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।
