@ कमल उनियाल उत्तराखंड :-
उत्तराखंड को देवभूमी ही नहीं वीरभूमी भी कहा जाता है। यहाँ के पर्वतीय जिलो के के गाँवो में हर घर से एक सैनिक देश की सेवा में समर्पित रहता है। वीर भूमी के सैनिको की जाँबाजी के किस्से देश ही नहीं देश ही नही दुनियां भर में गूँजते है सरहदो में देश की सुरक्षा में हमेशा तत्पर अपने अदम्य साहस के लिए गढवाल रेजिमेंट के सैनिकों की शौर्यगाथा, देश सेवा का जज्बा को हर कोई सलाम करता है।

यहाँ की परम्परा के अनुसार जब कोई वीर सैनिक सेवानिवृत्त होता है तो गाँव वाले और क्षेत्रवासी उनके भव्य स्वागत में कमी नहीं करते हैं। मौका था पौड़ी जिला के द्वारीखाल विकास खंड के निकटवर्ती ग्राम ग्वीन छोटा निवासी सूबेदार मेजर बीरेन्द्र रावत सिगनल कोर से तीस साल सेवा करने के बाद सेवानिवृत्त हुये तो अपने पैतृक गांव ग्वीन छोटा तो उनका गाँव वालो ने उनका भव्य स्वागत कर सम्मान स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया गया।
सैनिक पृष्ठभूमि से जुडे वीरेन्द्र रावत के दादा जी स्वर्गीय मुकुन्द सिह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे उनके पिताजी स्वर्गीय शम्भू सिह रावत और उनके ताऊ जी शिव सिह रावत सेना में सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हुये थे। उनके तीन भाई नरेन्द्र रावत, सुरेन्द्र रावत, धीरेन्द्र रावत भी सेना के उच्च पदो से सेवानिवृत्त हुये है। उनका भतीजा भी सेना में है। उनका परिवार का देश सेवा में गौरवशाली इतिहास रहा है।
प्रजा टुडे के संवाददाता कमल उनियाल को उन्होने बताया अभी भी पर्वतीय जिलो के गाँव अपने आप में खाश, ऐतिहसिक व समृद्धिशाली है। पर संसाधनो के अभाव में यहाँ पलायन जारी है जिससे मन में पीडा होती है गाँव की मिट्टी से अपनत्व और लगाव रखने वाले अब सेवानिवृत्ति के बाद वंजर भूमी में हरियाली लाने का प्रयास करेगे वे गाँव वालो के साथ मिलकर अब कीवी, बागवानी, सब्जी उत्पादन से अपने गाँव की भूमी की हरियाली में तब्दील करेगे। जोकि एक प्रेरणादायक पहल है।

इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता आनन्द उनियाल, भारत सिह रावत, ग्राम प्रधान ग्वीन छोटा कल्याण सिह, प्रधान भलगाँव सतीश चंद्र रावत, पूर्व प्रधान दीपा देवी, महिला मोर्चा भाजपा की मंडल अध्यक्षा शकुन्तला देवी, महिला मंगल दल की अध्यक्षा सरिता रावत, सूरमान सिह, दलबीर सिह, महेन्द्र सिंह, मदन नेगी, शिक्षक अनिल नेगी प्रधानाध्यापक सादर सिह रावत अधिवक्ता सुनील डोबरियाल सहित क्षेत्र के गणमान्य लोग मौजूद थे।

