डॉ अजय रावत ने ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डाला

@ कमल उनियाल उत्तराखंड :-

महाविद्यालय परिसर में ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूर्ण होने उपलक्ष्य में एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ संयोजक डॉ. शिप्रा द्वारा किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ अजय रावत द्वारा ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला।

अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों के लिए प्रेरणा और उत्साह का स्रोत रहा है। यह गीत बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित है, जिसे उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में शामिल किया गया था। इस गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान क्रांतिकारियों में देशभक्ति की भावना को प्रबल किया।

इस अवसर पर महाविद्यालय की संरक्षिका प्राचार्य प्रो. एल. आर. राजवंशी द्वारा बताया गया कि ‘वंदे मातरम’ ने भारतीयों को एकता के सूत्र में बांधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आज भी यह गीत देशप्रेम की भावना को जागृत करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को इसके अर्थ और भाव को समझते हुए राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन किया, जिससे पूरे परिसर में देशभक्ति का वातावरण बन गया। इस अवसर पर हिंदी विभाग प्रभारी डॉ उमेश ध्यानी, डॉ सुमन कुकरेती,राजनीति विज्ञान से डॉ वदंना ध्यानी बहुगुणा, अर्थशास्त्र विभाग से डॉ नेहा शर्मा एवं डॉ दुर्गा रजक, इतिहास विभाग प्रभारी डॉ अभिषेक कुकरेती, एवं भुगोल विभाग से विभाग प्रभारी डॉ अर्चना नौटियाल एवं डॉ वसीम अहमद एवं अन्य प्राध्यापकगण उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

LIVE OFFLINE
track image
Loading...