‘एक राष्ट्र, एक कर’ ने देश भर में कर ढांचे को सरल और अधिक पारदर्शी बना दिया है : लोकसभा अध्यक्ष

@ नई दिल्ली :-

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि “एक राष्ट्रएक कर” तथा जीएसटी ढांचे के साथ-साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों में सुधारों ने देश के कर ढांचे को सरल और अधिक पारदर्शी बना दिया हैजिससे भारत के विकास और समृद्धि में योगदान मिल है। उन्होंने कहा कि इस पारदर्शी व्यवस्था को बनाए रखने और इसे मजबूती प्रदान करने की जिम्मेदारी राजस्व सेवा के अधिकारियों की है।

बिरला ने भारतीय राजस्व सेवा (सी एंड आईटी) के 76वें बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी कीजो संसद भवन परिसर में संसदीय लोकतंत्र शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (प्राइड) द्वारा आयोजित संसदीय पद्धतियों और प्रक्रियाओं के संबंध में आयोजित एक परिबोधन कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।

विभिन्न केन्द्रीय और अखिल भारतीय सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बिरला ने कहा कि महिला अधिकारियों की बढ़ती संख्या भारत के विकास और आकांक्षाओं को दर्शाती है।

बिरला ने आज के युवाओं के तकनीकी कौशल और तकनीकी ज्ञान की भी प्रशंसा कीजो राष्ट्र निर्माण के लिए उन्नत प्रौद्योगिकीअनुसंधान और नवाचार का लाभ उठाने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा प्रशिक्षु अधिकारियों का साहसिकआत्मविश्वास से युक्त  और नया दृष्टिकोण भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर करने में सहायक होगा। उन्होंने आगे कहा कि युवा प्रशिक्षु अधिकारियों का योगदान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा  परिकल्पित “विकसित भारत” के लक्ष्य को सार्थक रूप से साकार करने में सहायक होगा।

इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए बिरला ने कहा कि भारत की संसद देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और नीति-निर्माण का केंद्र है। उन्होंने आगे कहा कि आने वाले वर्षों में भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारीगण भारत की आर्थिक मज़बूती के प्रमुख स्तंभ बनेंगे।

बिरला ने कहा कि आईआरएस अधिकारी न केवल कर संग्रह करते हैंबल्कि ईमानदार करदाताओं का सम्मान करनेव्यापार को सुगम बनानेअवैध व्यापार और धन शोधन को रोकने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में भी प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने इस बात को दोहराया कि सरकार का लक्ष्य कर प्रणाली को सरल और सुगम बनाना है ताकि नागरिक राष्ट्र के विकास और समृद्धि से जुड़ाव महसूस करें। इस संबंध मेंसरकार का बृहत्तर लक्ष्य पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना और ऐसी व्यवस्था स्थापित करना है जहाँ करों की वसूली पूर्णतः कानून के अनुसार हो। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

बिरला ने कहा कि डिजिटल कर प्रणालीएआई-आधारित मूल्यांकन एवं डेटा विश्लेषण जैसे आधुनिक उपकरण कराधान में पारदर्शिता और निष्पक्षता को और बढ़ाते हैं। उन्होंने युवा प्रशिक्षु अधिकारियों से अपनी कड़ी मेहनतक्षमता और नवाचार के माध्यम से योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने अधिकारियों को कराधान संबंधी कानूनोंसंसदीय वाद-विवादों और हाल के कानूनों का गहन अध्ययन करने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि वे कानून की मूल भावना को समझ सकें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा आईआरएस अधिकारियों का यह समूह अपनी लगनक्षमता और तकनीकी विशेषज्ञता से भारत के कर प्रशासन को और मज़बूत करेगा तथा देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

आईआरएस-सी एंड आईटी के 76वें बैच में 79 प्रशिक्षु अधिकारी शामिल हैंजिनमें 5 भूटान से हैं। इस बैच में 40% महिलाएँ हैं; 32% प्रशिक्षु अधिकारी ग्रामीण पृष्ठभूमि से हैं। बैच की औसत आयु 28 वर्ष हैऔर 51 प्रशिक्षु अधिकारी के पास पूर्व कार्य अनुभव है। इस अवसर पर लोक सभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह ने स्वागत भाषण दिया।

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