@ जयपुर राजस्थान :-
राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरीभाऊ बागडे ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के नवजीवन में प्रवेश का आनंदोत्सव है। उन्होंने इसके लिए सभी को बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले 35 विद्यार्थियों में से 25 छात्राएं हैं। उन्होंने कहा कि गरीब, पिछड़े एवं वंचित समाज को मुख्य धारा में लाने का एकमात्र साधन शिक्षा है। हमें अपनी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि यह शिक्षा का मूल है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि सबके लिए बेहतर शिक्षा उपलब्ध हो सके।

राज्यपाल बागडे गुरुवार को गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय, बांसवाड़ा के माही भवन में आयोजित सप्तम दीक्षांत समारोह में संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत के लिए प्रतिभाशाली व्यक्तित्व का निर्माण करने की आवश्यकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि पढ़ाई से आपकी बौद्धिक क्षमता का विकास हुआ है, इसे और अधिक विकसित करने की आवश्यकता है।
विद्यार्थियों को आजीवन ज्ञान की खोज में लगे रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए आत्मविश्वास – आत्मबल की आवश्यकता होती है। इसके लिए निरंतर अभ्यास एवं कठोर परिश्रम की जरूरत है। कठोर परिश्रम से हम जीवन को बेहतर बना सकते हैं। हमें जीवन में परिश्रम का निश्चय करना चाहिए।
बागडे ने कहा कि नैतिक आचरण हमारी संस्कृति और परंपरा है। दुनिया में जब कहीं कोई विश्विद्यालय नहीं था, तब भारत में तक्षशिला व नालंदा जैसे विश्वविद्यालय थे। हमारी ज्ञान परंपरा वहां से चली आ रही है। हमें अपने पूर्व ज्ञान और इतिहास को अपनाने की आवश्यकता है। विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थाओं को भारत का स्वर्णिम गौरव लाने का प्रण करना चाहिए। अगर हम प्रयास करेंगे तो तक्षशिला-नालंदा का इतिहास फिर लौट कर आएगा। उन्होंने सभी से राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
समारोह में राज्यपाल द्वारा 29 विद्यावाचस्पति अभ्यर्थियों को उपाधि एवं 35 अभ्यर्थियों को उपाधि एवं स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। राज्यपाल द्वारा स्नातक के 29397 व स्नातकोत्तर के 3903 तथा 29 विद्यावाचस्पति सहित कुल 33329 अभ्यर्थियों को दीक्षा प्रदान की गई। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर केशव सिंह ठाकुर द्वारा स्वागत उद्बोधन और विश्वविद्यालय प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।

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