गुवा में उरांव समाज के लोगो ने सरहुल पर्व बना कर देवताओं से खुशहाली के कामना की

@ सिद्धार्थ पाण्डेय /चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम ) झारखंड  :-

गुवा हिरजी हटिंगा स्थिन सरना स्थल पर पाहन गोकुल बरुवा और शंकर टोप्पो ने सरहुल पर्व के अवसर पर प्रकृति पर्व में धरती जंगल जल को पूजा विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की गई । जिसमें देवी देवताओं से खुशीहाली के लिए मांगे कामना की । गुवा हिरजी हटिंगा के उरांव समाज के लोगो के लिए नए साल भी चैत्र नवरात्रि महीन में मनाया गया । उरांव समाज के पुरुषों और महिलाओं बच्चो भी परंपरा कपड़े पहने । यह पुरुष कान पर फूल पहने महिलाओ ने फूल खोजें थे । रंगो से भी एक दूसरे को सरहुल पर्व के अवसर पर खोलो ।

शुभ यात्रा निकल गई घर घर जाकर पारंपरिक झंडा लगाया गया। पंचायत सदस्य भादो टोप्पो ने उक्त अवसर पर कहा कि सरहुल झारखंड की जनजातियों द्वारा मनाया जाने वाला प्रमुख प्रकृति पर्व है, जो वसंत ऋतु में साल के वृक्षों पर नए फूल आने पर चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। यह पर्व धरती-आसमान (सूर्य) के मिलन, प्रकृति के प्रति आभार, साल वृक्ष की पूजा और कृषि कार्य की शुरुआत का प्रतीक है।

इस मौके पर चुन्नू टोप्पो, अजय लकड़ा, संजय टोप्पो, राजेश मिंज, रोहित लकड़ा , साबित्रा लकड़ा, लालीन टोप्पो , धनमित मिंज आदि पुरुषों और महिलाओं बच्चो शमिल थे।

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