जितिन प्रसाद ने आईआईएफटी में ग्लोबल बिजनेस रिसर्च कॉन्फ्रेंस 2026 का उद्घाटन किया

@ नई दिल्ली :-

वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक डीम्ड यूनिवर्सिटी, भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) में ग्लोबल बिजनेस रिसर्च कॉन्फ्रेंस (जीबीआरसी) 2026 का उद्घाटन किया। “वैश्विक उथल-पुथल के बीच व्यापार प्रबंधन” विषय पर आधारित इस सम्मेलन में भारत और विदेश के प्रख्यात शिक्षाविद, नीति निर्माता, प्रबंधन शिक्षक, शोधकर्ता और उद्योग जगत के विशेषज्ञ वैश्विक व्यापार परिवेश को आकार देने के क्रम में उभरती चुनौतियों और अवसरों पर विचार-विमर्श करने के लिए एकत्रित हुए हैं।

जितिन प्रसाद ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने व्यापार, विनिर्माण, नवाचार और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने पर केंद्रित दीर्घकालिक विजन अपनाया है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और वैश्विक व्यापार साझेदारी जैसे क्षेत्रों में भारत की प्रगति अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में इसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।

जितिन प्रसाद ने अनुसंधान आधारित अंतर्दृष्टि उत्पन्न करने, भविष्य के व्यापारिक क्षेत्र के दिग्‍गजों को तैयार करने और वैश्विक बाजारों के साथ भारत के एकीकरण में आईआईएफटी जैसे संस्थानों के महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जीबीआरसी 2026 में होने वाली चर्चाओं से बहुमूल्य अंतर्दृष्टि और सिफारिशें प्राप्त होंगी जो नीति निर्माण और भारत के आर्थिक विकास में योगदान दे सकती हैं।

आईआईएफटी के कुलपति प्रो. राकेश मोहन जोशी ने कहा कि संस्थान ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार शिक्षा और नीति अनुसंधान में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करते हुए अपने अनुसंधान के कार्यों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का विस्तार किया है। उन्होंने कहा कि ग्‍लोबल बिजनेस रिसर्च कॉन्‍फ्रेंस वैश्विक व्यापार, व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक विकास को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर विद्वानों, नीति निर्माताओं और संस्थागत प्रमुखों के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देने और गहन अकादमिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए आईआईएफटी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस सम्मेलन में निदेशकों की बैठकों की एक श्रृंखला आयोजित की जा रही है, जिसमें बिजनेस स्कूलों के लिए अंतरराष्ट्रीयकरण रणनीतियों, प्रबंधन शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग, बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में शिक्षण पद्धति और उच्च शिक्षा में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

इस सम्मेलन में वित्त, विपणन, सामान्य प्रबंधन और रणनीति, वैश्विक व्यापार और व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा, संचालन और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी और विश्लेषण, तथा सार्वजनिक नीति और शासन सहित प्रमुख विषयों में शोध प्रस्तुतियां प्राप्त हुई हैं। कई तकनीकी सत्रों के माध्यम से शोधकर्ता समकालीन व्यावसायिक और आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए साक्ष्य-आधारित अंतर्दृष्टि और नीति-संबंधी निष्कर्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।

सम्मेलन के दौरान निर्धारित प्रमुख सत्रों में से एक “बहुध्रुवीय दुनिया में भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच ब्रिक्स” पर एक विशेष चर्चा है, जो वैश्विक आर्थिक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संरचना को आकार देने में ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं की विकसित होती भूमिका की पड़ताल करेगी।

सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण भारत के कुछ प्रमुख संस्थानों के प्रतिष्ठित अकादमिक प्रमुखों की भागीदारी है, जिनमें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम), आईआईटी बॉम्बे, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी), मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (एमडीआई) गुड़गांव, बीआईएमटेक, गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (आईआईएमसी), गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, आईआईएलएम विश्वविद्यालय और जिंदल ग्लोबल बिजनेस स्कूल शामिल हैं।

इस सम्मेलन में देश भर के प्रमुख संस्थानों के कुलपति, निदेशक, डीन और वरिष्ठ अकादमिक प्रमुख एक साथ आए हैं। प्रतिभागियों में आईआईएमसी की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौर; डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. यशवंत सिंह ठाकुर; आईआईएम बोधगया की निदेशक प्रो. विनीता एस. सहाय; बीआईएमटेक की निदेशक डॉ. प्रबीना राजीव; आईएसबी के पुंज लॉयड इंस्टीट्यूट ऑफ इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट के कार्यकारी निदेशक प्रो. चंदन चौधरी; आईआईटी बॉम्बे के शैलेश जे. मेहता स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के विभागाध्यक्ष प्रो. एसवीडी नागेश्वर राव; गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स के कुलपति प्रो. उमाकांत डैश; आईआईएलएम विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रवि कुमार जैन; गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय की निदेशक (अंतरराष्ट्रीय मामले) प्रो. विजया सिंह अग्रवाल; और आईआईएम तिरुचिरापल्ली के पूर्व निदेशक प्रो. पवन कुमार सिंह आदि शामिल हैं।

यह कार्यक्रम 5 जून, 2026 को समापन सत्र के साथ समाप्त होगा, जिसमें सम्मेलन रिपोर्ट की प्रस्तुति, विशिष्ट अतिथियों के संबोधन और उत्कृष्ट शोध योगदानों को सम्मानित करने के लिए एक पुरस्कार समारोह शामिल होगा। विभिन्न विषयगत श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ शोध पत्रों, समग्र सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र, सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति और सर्वश्रेष्ठ डॉक्टरेट संगोष्ठी शोध पत्र के लिए पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

LIVE OFFLINE
track image
Loading...