@ नई दिल्ली :-
केंद्र सरकार ने आम जनता, विशेष रूप से बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खांसी की सिरप (कफ सिरप) की बिक्री के नियमों को और सख्त बना दिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किए गए संशोधनों के बाद अब देशभर में कफ सिरप केवल लाइसेंस प्राप्त फार्मेसियों से ही बेची जा सकेगी और इसके लिए डॉक्टर का वैध प्रिस्क्रिप्शन अनिवार्य होगा।

मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन करते हुए राजपत्र अधिसूचना जीएसआर 927 (ई) जारी की है। इस संशोधन के तहत अनुसूची ‘क’ की प्रविष्टि संख्या 13 से “सिरप” शब्द हटा दिया गया है। इसके साथ ही 1000 से कम आबादी वाले गांवों में बिना लाइसेंस के कफ सिरप बेचने की जो छूट पहले उपलब्ध थी, उसे पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
नए नियमों के अनुसार अब कोई भी व्यक्ति बिना चिकित्सकीय परामर्श के कफ सिरप नहीं खरीद सकेगा। केवल अधिकृत और लाइसेंसधारी दवा विक्रेता ही निर्धारित प्रक्रिया के तहत इन दवाओं की बिक्री कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे दवाओं के दुरुपयोग, अनियंत्रित बिक्री और नकली या निम्न गुणवत्ता वाली दवाओं के प्रसार पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार यह कदम विशेष रूप से बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है। हाल के वर्षों में कुछ कफ सिरपों की गुणवत्ता और उनके दुष्प्रभावों को लेकर चिंताएं सामने आई थीं। इसी के मद्देनजर दवाओं की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने का निर्णय लिया गया।
यह संशोधन दिसंबर 2025 में अधिसूचित किया गया था और अब पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू हो चुका है। मंत्रालय ने दवा निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे नए नियमों का कड़ाई से पालन करें। उल्लंघन की स्थिति में संबंधित पक्षों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय दवाओं के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने तथा देश में औषधि नियमन को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
