गुजरात में 6.99 करोड़ बचत खातों में डिजिटल बैंकिंग की सुविधा

@ गांधीनगर गुजरात :-

नरेन्द्र मोदी ने 26 मई, 2014 को पहली बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। प्रधानमंत्री के तौर पर उनके 12 वर्षों के कार्यकाल में भारत विकास, सुशासन, गरीब कल्याण और वैश्विक प्रतिष्ठा के नए अथ्याय लिखे हैं। विशेषकर, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, उत्पादन, खेल और सामाजिक सुधार जैसे अनेक क्षेत्रों में देश की प्रगति उल्लेखनीय रही है। भारत आज डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में पूरी दुनिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान रखता है। गत 12 वर्षों में विभिन्न डिजिटल पहलों से नागरिकों की सुख-सुविधा में बढ़ोतरी देखी गई है।

गुजरात में 6.99 करोड़ बचत खातों में डिजिटल बैंकिंग की सुविधा

राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के अंतिम आंकड़ों के अनुसार, गुजरात में 31 मार्च, 2026 तक 6,99,05,125 बचत खातों में कम से  कम एक डिजिटल बैंकिंग सुविधा उपलब्ध है। डिजिटल पेमेंट की व्यवस्था को और अधिक व्यापक बनाने के उद्देश्य से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों के अनुसार राज्य के सभी जिलों में बैंकिंग सुविधाओं का दायरा बढ़ाने को कहा गया है, ताकि लोग सुरक्षित तरीके से तेजी और आसानी से बैंकिंग लेनदेन कर सकें।

आज 6.99 करोड़ बचत खातों में से 70.49 फीसदी खाताधारकों के पास डेबिट कार्ड है, जबकि 63.19 फीसदी खाताधारक यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई), मोबाइल बैंकिंग और अनस्ट्रक्चर्ड सप्लीमेंट्री सर्विस डेटा-यूएसएसडी (बिना इंटरनेट वाले फोन से बैंकिंग) सेवाओं का उपयोग करते हैं। वहीं, 79.20 फीसदी धारक आधार कार्ड की मदद से बैंकिंग सुविधाओं का उपयोग करते हैं। गुजरात में आज 1,98,52,734 जनधन लाभार्थी हैं और 1,51,79,955 रूपे कार्ड जारी किए गए हैं। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हुई डिजिटल क्रांति के कारण आज कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति तक सुविधाएं तेजी से पहुंची हैं।

10 वर्षों में यूपीआई लेनदेन की मात्रा में 12 हजार गुना वृद्धि, 2025-26 में 314 लाख करोड़ रुपए का हुआ लेनदेन

नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया की ओर से 11 अप्रैल, 2016 को लॉन्च किए गए यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के उपयोग में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। राष्ट्रीय स्तर पर लेनदेन की मात्रा 2016-17 में 2 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ पर पहुंच गई है, जो 12 हजार गुना वृद्धि दर्शाता है। इसी प्रकार, वर्ष 2016 में यूपीआई के माध्यम से हुए लेनदेन का मूल्य 0.07 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 314 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो दस वर्षों में लेनदेन के मूल्य में 4000 गुना वृद्धि दिखाता है।

आज भारत में दैनिक औसतन 66 करोड़ यूपीआई लेनदेन होते हैं, जिनका औसत दैनिक मूल्य 0.86 लाख करोड़ रुपए है। यूपीआई से जुड़े बैंकों की संख्या 2016 में सार्वजनिक क्षेत्र के 21 बैंकों से बढ़कर मार्च 2026 तक 703 हो गई है। वित्त वर्ष 2025-26 के अनुसार भारत के डिजिटल पेमेंट में यूपीआई का योगदान 85 फीसदी है। वर्तमान में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सिंगापुर, फ्रांस, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, मॉरीशस और कतर में भारत के यूपीआई का इस्तेमाल किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में गत 12 वर्षों में भारत में डिजिटल क्षेत्र में अभूतपूर्व क्रांति

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में गत 12 वर्षों में भारत में डिजिटल क्षेत्र में अभूतपूर्व क्रांति हुई है। अभी भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 100 करोड़ से अधिक है, जो 12 वर्ष पहले 25 करोड़ थी। इंटरनेट उपभोक्ताओं में वृद्धि और संसद से लेकर पंचायतों तक को ‘भारतनेट’ से जोड़ना डिजिटल इंडिया की एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। भारतनेट परियोजना के तहत 12 वर्ष पहले केवल 546 पंचायतें जुड़ी थीं, लेकिन आज 2.14 लाख से अधिक ग्राम पंचायतें इस परियोजना के साथ जुड़ चुकी हैं।

अब गुजरात तथा भारत सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की सुविधा नागरिकों को ऑनलाइन पोर्टल के जरिए एक क्लिक में उपलब्ध है। इससे नागरिकों तक तेज, सुगम और पारदर्शी तरीके से सेवाओं का वितरण सफलतापूर्वक सुनिश्चित हुआ है।

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