@ प्रजा दत्त डबराल नई दिल्ली :-
कहा जाता है इस संसार में कोई भी जन्म से न ही प्रतिभावान ,गुणवान और न ही बुद्धिमान होता है, मनुष्य अपनी कड़ी मेहनत और सच्ची लगन से किए गये अपने कार्यो को इतना अधिक ऊंचा कर लेता है कि समाज में उसे और उसके काम को मान-सम्मान और ख्याति तो मिलती ही है, साथ ही वो दूसरे लोगों के लिए भी आदर्श बन जाते हैं।
कहते हैं प्रतिभा किसी परिचय की मोहताज नहीं होती है। प्रतिभा के लिए देश – विदेश , गांव या शहर नहीं बल्कि खुद की मेहनत और लगन रंग लाती है। यदि ऐसा करने के लिए कोई ठान ले तो उसका आशानुरूप परिणाम मिलता ही है।
दुनिया को साइकिल की रफ्तार से देखने और उसे बेहतर बनाने का सपना लेकर इटली के मिलान से निकले अंतरराष्ट्रीय कला व संस्कृति यात्री लुका, जिन्हें दुनिया “लिटिल सिउबेक्का” के नाम से जानती है, भारत पहुंचे। उनके भारत आगमन पर 2 फरवरी 2026 को सुबह 11 बजे, 88,इंडिया टूरिज़्म दिल्ली, जनपथ में पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा एक विशेष संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
यह संवाद भारत की कला, संस्कृति और पर्यटन को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की मंत्रालय की पहल का हिस्सा है। लुका एक असाधारण एकल यात्रा पर हैं, जो सिर्फ़ यात्रा नहीं बल्कि एक मानवीय तीर्थयात्रा है। वे मिलान से नई दिल्ली तक हवाई मार्ग से आए और इसके बाद साइकिल द्वारा भारत के विभिन्न राज्यों — राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु — से होते हुए बेंगलुरु तक की लंबी यात्रा पर निकलेंगे।
इस यात्रा के दौरान वे भारत की समृद्ध लोक संस्कृति, कला, विरासत और लोगों की कहानियों से रूबरू होंगे। उनकी योजना में कोच्चि आर्ट बिएनाले का विशेष दौरा भी शामिल है, जो समकालीन कला का अंतरराष्ट्रीय केंद्र माना जाता है।

लुका का यह सफर “सिउबेक्का तंदूरी” नामक परियोजना का हिस्सा है, जिसका केंद्र बेंगलुरु स्थित अन्नास्वामी स्कूल है। यह स्कूल समाज के सबसे वंचित वर्गों के बच्चों के लिए काम करता है और विशेष रूप से दिव्यांग और सामान्य बच्चों की समावेशी शिक्षा पर ज़ोर देता है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य स्कूल में समावेशी खेल मैदान (Inclusive Playgrounds) स्थापित करना है — ऐसे मैदान जहां
दिव्यांग बच्चों के लिए रैंप, सहायक उपकरण और सुरक्षित ढांचे हों।
संवेदी चुनौतियों वाले बच्चों के लिए विशेष बनावट, ध्वनि और अनुभव हों और सभी बच्चे बिना किसी भेदभाव के साथ खेल सकें।

लुका स्वयं पूर्व पेशेवर हैंडबॉल खिलाड़ी रहे हैं और वर्तमान में मिलान की ब्रेरा एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स में कला की पढ़ाई कर रहे हैं।
खेल और कला — ये दोनों ही उनके जीवन और इस परियोजना की आत्मा हैं। उनका मानना है कि शरीर और रचनात्मकता का संतुलित विकास ही बच्चों को आत्मविश्वास, आवाज़ और भविष्य देता है।
इंडिया टूरिज़्म अधिकारियों के अनुसार, लुका की यह यात्रा भारत की “स्लो ट्रैवल” संस्कृति, मानवीय जुड़ाव और ज़मीनी अनुभवों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का एक सशक्त उदाहरण है।
हज़ारों किलोमीटर लंबी यह साइकिल यात्रा एक सरल लेकिन गहरा संदेश देती है — कि प्रेम, एकजुटता और संवेदनशीलता से प्रेरित एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है।
मिलान से बेंगलुरु तक, यह यात्रा सिर्फ़ रास्तों की नहीं, बल्कि लोगों, कहानियों और उन बच्चों के भविष्य की यात्रा है — जहाँ हर बच्चा, बिना किसी अपवाद के शामिल है।


