मनीष नरवाल ने पेरिस 2024 पैरालंपिक में रजत पदक जीता

@ नई दिल्ली

पेरिस 2024 पैरालंपिक में रजत पदक जीतने वाले मनीष नरवाल की सफलता एक व्यक्तिगत जीत से कहीं ज़्यादा है, यह उन अनगिनत लोगों के लिए प्रेरणा है जो इस तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उनकी कहानी याद दिलाती है कि दृढ़ संकल्प और उचित सहयोग के साथ, हर बाधा को पार कर गौरव हासिल करना संभव है!

मनीष नरवाल का जन्म 17 अक्टूबर, 2001 को फरीदाबाद, हरियाणा में हुआ। अपने दाहिने हाथ में जन्मजात विकलांगता का सामना करने के बावजूद, उन्होंने कभी भी इसे अपने सपनों की राह में बाधा नहीं बनने दिया। हरियाणा के बल्लभगढ़ में पले-बढ़े मनीष का परिचय शूटिंग की दुनिया से 2016 में तब हुआ, जब उनका परिवार उन्हें स्थानीय शूटिंग रेंज लेकर गया। खेल ने उन्हें तुरंत आकर्षित किया और वे नियमित रूप से रेंज में जाने लगे। शुरुआत में, उन्हें पैरालंपिक प्रतिस्पर्धाओं के बारे में पता नहीं था और उन्हें बस अन्य एथलीटों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में मज़ा आता था। हालांकि, उनकी अनगढ़ प्रतिभा और शूटिंग के प्रति जुनून ने जल्द ही उनके आस-पास के लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

मनीष की प्रतिभा को अनदेखा नहीं किया जा सका। उन्हें जल्द ही कोच जय प्रकाश नौटियाल का संरक्षण मिला, उन्होंने मनीष की क्षमता को पहचाना और पैरा-शूटिंग की यात्रा में उनका मार्गदर्शन करना शुरू कर दिया। मनीष ने 2017 बैंकॉक विश्व कप में अपनी अंतर्राष्ट्रीय यात्रा शुरू की, वहां उन्होंने P1 – 10 मीटर एयर पिस्टल एस एच 1 इवेंट में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने न केवल शीर्ष स्थान हासिल किया, बल्कि उन्होंने क्वालीफिकेशन और फाइनल दोनों में जूनियर विश्व रिकॉर्ड भी बनाया। यह जीत कई और जीतों की शुरुआत थी, क्योंकि मनीष ने हाई-परफॉरमेंस कोच जय प्रकाश नौटियाल और राष्ट्रीय कोच सुभाष राणा के मार्गदर्शन में उत्कृष्ट प्रदर्शन जारी रखा।

पिछले कुछ वर्षों में मनीष ने उपलब्धियों की एक प्रभावशाली सूची बनाई है, जिसमें 2020 टोक्यो पैरालिंपिक में पी4 मिश्रित 50 मीटर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक और एशियाई पैरा खेलों में कई पदक शामिल हैं। विभिन्न विश्व चैंपियनशिप और विश्व कप में उनके लगातार श्रेष्ठ प्रदर्शन ने दुनिया के शीर्ष पैरा-निशानेबाजों में से एक के रूप में उनकी स्थिति को मजबूत किया है।

मनीष की सफलता की यात्रा को प्रमुख सरकारी प्रयासों का सहयोग मिला, जिसने एक एथलीट के रूप में उनके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टीओपीएस) और खेलो इंडिया जैसे कार्यक्रमों ने उन्हें प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिता के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के साथ डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज दिल्ली जैसी शीर्ष स्तरीय सुविधाओं तक उनकी पहुंच बनाई। इसके अतिरिक्त, उन्हें दक्षिण कोरिया, क्रोएशिया, यूएई, चीन, फ्रांस, जर्मनी और पेरू जैसे देशों में विदेशी प्रदर्शन के अवसरों से लाभ हुआ है। इस व्यापक सहायता ने मनीष को उच्चतम स्तर का प्रशिक्षण लेने और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाया है।

पेरिस 2024 पैरालंपिक में मनीष नरवाल ने एक बार फिर अपनी असाधारण प्रतिभा और दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए P1 – पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल SH1 स्पर्धा में रजत पदक जीता। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पैरा-शूटर्स के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करते हुए मनीष ने सटीकता और फोकस का पूरा प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीत लिया। इस तरह उनके पहले से ही प्रभावशाली उपलब्धियों में एक और प्रतिष्ठित उपलब्धि जुड़ गई।

यह उपलब्धि विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मनीष की पैरा-स्पोर्ट्स के सबसे बड़े मंच पर दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता को रेखांकित करती है। हरियाणा के एक स्थानीय शूटिंग रेंज से पेरिस के पैरालंपिक पोडियम तक का उनका सफर उनकी कड़ी मेहनत, समर्पण और उनके कोच, परिवार और सरकार से मिले सहयोग का प्रमाण है।

मनीष ने पैरा-शूटिंग में अपनी सीमाओं का हमेशा विस्तार किया इसी कारण वे अपने साथ राष्ट्र की उम्मीदें और सपने लेकर चलते हैं। उनकी उपलब्धियां देश के लिए गर्व की बात हैं और दृढ़ता एवं समर्पण के द्वारा क्या कुछ हासिल किया जा सकता है, इसका एक शानदार उदाहरण हैं। इस प्रतिभाशाली एथलीट के लिए भविष्य में और भी अधिक संभावनाएं हैं, और निस्संदेह दुनिया उन्हें इतिहास बनाते हुए देखेगी।

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