मुंबई में अमित शाह ने गणेश ज्ञानार्थी प्रदर्शनी का उद्घाटन किया

@ मुंबई महाराष्ट्र :-

मुंबई में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई द्वारा आयोजित गणेश ज्ञानार्थी प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस, उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई के अध्यक्ष डॉ. विनय सहस्रबुद्धे सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि वे एशियाटिक सोसाइटी में गृह मंत्री के नाते नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा को सहस्त्र वर्षों तक आगे ले जाने के आंदोलन के एक सहभागी के रूप में आए हैं। शाह ने विश्वास जताया कि एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई भारतीय ज्ञान परंपरा की वाहक बनकर इसे देशभर में पहुंचाएगी।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि जो राष्ट्र अपनी स्मृति, इतिहास, संस्कार, भाषा, अभिलेख और परंपराओं की रक्षा नहीं कर सकता, वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, उसके पतन में देर नहीं लगती; और जो राष्ट्र अपनी स्मृति, इतिहास, परंपराएँ, संस्कार, अभिलेख, भाषा और व्याकरण की रक्षा करता है, वह कितने भी वर्षों तक गुलाम रहे, उसे कोई सच्चे अर्थों में गुलाम नहीं बना सकता। उन्होंने कहा कि विश्व का मार्गदर्शन करने के लिए खड़े हुए भारत के ओजस्वी ज्ञान को अनेक शक्तियों ने मिटाने का प्रयास किया, किंतु वे सफल नहीं हो सके। शाह ने कहा कि नालंदा का पुस्तकालय तो जलाया जा सकता है; महीनों तक धुआँ उठे, इतनी प्रचंडता से उसे भस्म किया जा सकता है, पर जो ज्ञान श्रुति और स्मृति के रूप में लोगों के चित्त में बस चुका है, उसे कोई समाप्त नहीं कर सकता।

अमित शाह ने कहा कि हमारे देश का संस्कार है कि जब हम पराजित होते हैं, तो धैर्य रखकर आगे बढ़ते हैं; और जब विजयी होते हैं, तो जिन पर विजय प्राप्त की है, उनकी स्मृतियों को नष्ट किए बिना उन्हें अपनी परंपरा से जोड़ने का प्रयास करते हैं।

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उन्होंने कहा कि सच्चा ज्ञान कभी किसी विचारधारा का बंधक नहीं होता। ज्ञान स्वयं एक विचारधारा है; उसे किसी भी प्रकार से बाँध दिया जाए, तो ज्ञान का अर्थ ही बदल जाता है। शाह ने कहा कि ज्ञान मुक्त होना चाहिए, उन्मुक्त होना चाहिए और उसकी उद्घोषणा भी मुक्त तथा उन्मुक्त होनी चाहिए। इसलिए एशियाटिक सोसाइटी किसने बनाई और किस उद्देश्य से बनाई, इसमें उलझने के बजाय यह देखना चाहिए कि आज जो ज्ञान और संग्रह हमारे सामने पड़ा है, उसका उपयोग महान भारत की रचना में कैसे हो सकता है।

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि एशियाटिक सोसाइटी को यदि समझना है, तो ‘इंडोलॉजी’ शब्द को भी समझना पड़ेगा। मुद्राशास्त्र, पुरालेखशास्त्र, रूपविज्ञान, इतिहास, पुरातत्त्व, भाषाविज्ञान, दर्शनशास्त्र, साहित्य, धर्मशास्त्र और व्याकरण — इन सब को मिलाकर इंडोलॉजी की रचना हुई। इसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान-परंपरा का वह उद्देश्य नहीं था, जिसका लक्ष्य विश्व और ब्रह्मांड का कल्याण है। उस समय इसका उद्देश्य यहाँ की व्यवस्थाओं को समझकर लंबे कालखंड तक यहाँ की जनता पर शासन करना था।

शाह ने कहा कि जब कोई बाहरी शक्ति किसी सभ्यता का अध्ययन करती है, तो वह या तो अध्ययन करती है, या उसे परिभाषित करती है। इन दोनों में एक मूल अंतर है। अध्ययन करने पर उसे स्वीकारा भी जाता है और स्वयं को बदला भी जाता है। पर जब उसे परिभाषित किया जाता है, तो यह प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है कि उस परिभाषा का लक्ष्य क्या है। उन्होंने कहा कि इंडोलॉजी शब्द के अस्तित्व में आने के बाद प्रारंभिक वर्षों में यह खतरा निरंतर बना रहा।

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गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि डी-कॉलोनाइजेशन की प्रक्रिया इतिहास मिटाना नहीं है। इसका अर्थ है इतिहास को संपूर्ण, प्रामाणिक और भारतीय दृष्टिकोण के साथ फिर से लोगों के सामने रखना। यही डी-कॉलोनाइजेशन है और यह होना ही चाहिए। डी-कॉलोनाइजेशन का अर्थ मिटाना नहीं है। डी-कॉलोनाइजेशन का अर्थ सत्य को विश्व-कल्याण के लिए दुनिया के सामने रखना है। आज हम डी-कॉलोनाइजेशन की ओर बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई में महाभारत के चित्र, जैन कल्पसूत्र, बौद्ध धर्म के ऐसे दुर्लभ ग्रंथ उपलब्ध हैं, जिन्हें बहुत पहले बाहर आ जाना चाहिए था।

अमित शाह ने कहा कि उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस से कहा है कि वे सोसाइटी को शक्ति दें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई को हरसंभव समर्थन और सहयोग दे रही है और आगे भी देगी। शाह ने कहा कि देश के हर गाँव, हर नगर और हर राज्य में ऐसे जितने भी संस्थान हैं, उन्हें एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई से जोड़कर ज्ञान का एक साझा सम्पुट बनाना चाहिए, ताकि वह पूरे देश के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और अनुसंधानकर्ताओं के लिए उपलब्ध हो सके।

2 thoughts on “मुंबई में अमित शाह ने गणेश ज्ञानार्थी प्रदर्शनी का उद्घाटन किया”

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