@ भुवनेश्वर ओडिशा :-
भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के दौरान पुरी में उमड़ रही भारी भीड़ को देखते हुए ओडिशा पुलिस ने श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) वाई.बी. खुरानिया ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे एक-दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, बुजुर्गों और अस्वस्थ लोगों को साथ लेकर पुरी न आएं। उन्होंने कहा कि अत्यधिक भीड़ के कारण इन वर्गों की सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।

डीजीपी ने बताया कि रथ यात्रा के चलते बड़ा दांडा (ग्रैंड रोड) सहित पूरा पुरी शहर लाखों श्रद्धालुओं से भरा हुआ है। विभिन्न राज्यों से लगातार श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जिससे पूरे शहर में श्रद्धा और उत्साह का माहौल है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों और एडवाइजरी का पालन करने की अपील की, ताकि रथ यात्रा सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
रथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए पुलिस ने विशेष एंटी-स्नैचिंग अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत अब तक 103 झपटमारों को गिरफ्तार किया गया है तथा उनके कब्जे से श्रद्धालुओं के चोरी हुए 203 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
पुलिस ने बताया कि बड़ा दांडा, श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर, समुद्र तट, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, पार्किंग स्थलों और अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष पुलिस बल चौबीसों घंटे तैनात है। सीसीटीवी कैमरों, आधुनिक तकनीक और खुफिया तंत्र की सहायता से हर संदिग्ध गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
पुरी पुलिस ने श्रद्धालुओं से अपने मोबाइल फोन, पर्स, आभूषण और अन्य कीमती सामान की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की भी अपील की है।
भगवान जगन्नाथ की कहानी
भगवान जगन्नाथ को भगवान श्रीकृष्ण का ही एक दिव्य स्वरूप माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, राजा इन्द्रद्युम्न ने स्वप्न में भगवान के दर्शन किए और उनके आदेश पर पुरी में मंदिर बनवाया। भगवान विश्वकर्मा बढ़ई का रूप धारण कर मूर्तियाँ बनाने लगे, लेकिन उन्होंने शर्त रखी कि कार्य पूरा होने तक कोई दरवाज़ा नहीं खोलेगा। उत्सुकतावश राजा ने समय से पहले द्वार खोल दिया, जिससे मूर्तियाँ अधूरी अवस्था में रह गईं। भगवान ने इन्हीं स्वरूपों में विराजमान रहने का निर्णय लिया। तब से भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ पुरी में विराजमान हैं और प्रतिवर्ष भव्य रथ यात्रा निकाली जाती है।
