प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में केंद्रीय मंत्रिमंडल की ऐतिहासिक पहली बैठक हुई

@ नई दिल्ली :-

24 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में नए प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में केंद्रीय मंत्रिमंडल की ऐतिहासिक पहली बैठक आयोजित हुई। बैठक में विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कहा कि ‘सेवा तीर्थ’ नए भारत के नवनिर्माण की प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति है। आज़ादी के बाद दशकों तक साउथ ब्लॉक से संचालित शासन व्यवस्था के बाद यह परिसर स्वदेशी सोच, आधुनिक स्वरूप और अनंत सामर्थ्य वाले भारत की संकल्पना को मूर्त रूप देता है।

मंत्रिमंडल ने इस स्थान के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘सेवा तीर्थ’ उन अस्थायी बैरकों के स्थान पर निर्मित हुआ है जो ब्रिटिश काल में बने थे। इस स्थल पर राष्ट्र संचालन के आधुनिक केंद्र का निर्माण नए भारत के कायाकल्प का प्रतीक माना गया।

मंत्रिमंडल के अनुसार, ‘सेवा तीर्थ’ की अवधारणा भारत की भौतिक समृद्धि और मानवीय मूल्यों के समन्वय पर आधारित है। कर्तव्य, सेवा और समर्पण की भावना से प्रेरित यह कार्यस्थल शासन को जनसेवा के पवित्र दायित्व से जोड़ता है।

मंत्रिमंडल ने संकल्प लिया कि यहां लिया गया प्रत्येक निर्णय 140 करोड़ देशवासियों के हित और राष्ट्र-निर्माण के लक्ष्य से प्रेरित होगा। ‘नागरिक देवो भव’ की भावना के साथ शासन को पारदर्शी, उत्तरदायी और संवेदनशील बनाने पर बल दिया गया।

बैठक में कहा गया कि ‘सेवा तीर्थ’ की कार्य-संस्कृति संविधान की मूल भावना पर आधारित होगी। प्रत्येक नीति नागरिक की गरिमा, समानता और न्याय को केंद्र में रखकर बनाई जाएगी।

मंत्रिमंडल ने बीते वर्षों में हुए सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए कहा कि 25 करोड़ से अधिक नागरिकों को गरीबी से बाहर लाया गया। आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन और आवास योजनाओं के माध्यम से करोड़ों नागरिकों के जीवन में व्यापक बदलाव आया है।

मंत्रिमंडल ने कहा कि जीएसटी, डीबीटी और डिजिटल इंडिया जैसे सुधारों से शासन अधिक पारदर्शी और सक्षम बना है। फेसलेस टैक्स प्रणाली और तकनीक-आधारित प्रशासन से नागरिकों का भरोसा मजबूत हुआ है और भारत विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में सशक्त स्थान बना चुका है। मंत्रिमंडल ने ‘सेवा तीर्थ’ की नई ऊर्जा और सुधारों की गति से भारत को निकट भविष्य में विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में स्थान दिलाने का संकल्प दोहराया।

मंत्रिमंडल ने कहा कि ‘सेवा तीर्थ’ से संचालित नई कार्य-संस्कृति देश को समर्थ, सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह परिसर राष्ट्रीय आकांक्षाओं का प्रमुख केंद्र बनेगा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को दिशा देगा।

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