@ मुंबई महाराष्ट्र :-
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 2 मार्च, 2026 को मुंबई के नौसेना गोदी में भारतीय नौसेना के पारंपरिक रूप से निर्मित पोत कौंडिन्य का स्वागत किया। यह पोत मस्कट, ओमान की अपनी ऐतिहासिक पहली समुद्री यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद स्वदेश लौटा है।

सभा को संबोधित करते हुए रक्षा राज्य मंत्री ने परियोजना के राष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि INSV Kaundinya भारत की प्राचीन समुद्री ज्ञान प्रणालियों के पुनरुद्धार का प्रतीक है। उन्होंने कहा यह परियोजना देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। सेठ ने इस यात्रा में प्रदर्शित साहस, दृढ़ता और पुनर्खोज की भावना को रेखांकित करते हुए युवा भारतीयों को सभ्यतागत आत्मविश्वास पर आधारित साहसिक और नवाचार को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर, पश्चिमी नौसेना कमान के ध्वज अधिकारी कमान-इन-चीफ वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने अरब सागर में पारंपरिक रूप से निर्मित जहाज को सफलतापूर्वक चलाने में चालक दल के असाधारण समर्पण और व्यावसायिकता की सराहना की। उन्होंने अवधारणा और अनुसंधान से लेकर डिजाइन, पारंपरिक निर्माण, चालक दल के प्रशिक्षण और यात्रा के क्रियान्वयन तक की प्रक्रिया में शामिल अथक परिश्रम पर बल दिया।

आधुनिक संरचनात्मक सुदृढ़ीकरण के बिना, वर्गाकार पाल वाली, लकड़ी से बनी नाव को संचालित करने के लिए असाधारण योजना, नाविक कौशल, टीम वर्क और सहनशक्ति की आवश्यकता थी। इससे इस अभियान का सफल समापन भारतीय नौसेना के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि बन गया है।
जैसे ही INSV Kaundinya ने औपचारिक प्रवेश किया, रंगारंग पाल जुलूस और पारंपरिक जल चाप सलामी के साथ उसका स्वागत किया गया, इससे बंदरगाह में एक शानदार और भावपूर्ण वातावरण बन गया। यह आयोजन भारत की समुद्री विरासत पर गर्व और चालक दल की उपलब्धि के प्रति प्रशंसा का प्रतीक था।

मुंबई में ओमान के महावाणिज्यदूत महबूब ईसा अलरैसी, वरिष्ठ अधिकारी, पूर्व सैनिक, होडी इनोवेशन के प्रतिनिधि, नागरिक समाज के प्रतिष्ठित सदस्य, समुद्री समुदाय के सदस्य, इतिहासकार और नौकायन के शौकीन इस अवसर पर उपस्थित थे।
INSV Kaundinya भारतीय नौसेना का 20 मीटर लंबा, पारंपरिक रूप से निर्मित एक जहाज है, यह अजंता गुफाओं में मिली 5वीं शताब्दी ईस्वी की एक कलाकृति से प्रेरित है। प्राचीन भारतीय जहाज निर्माण तकनीकों (लकड़ी के तख्तों को नारियल की रस्सी से बांधकर प्राकृतिक रेजिन से सील करने का काम) का उपयोग करके निर्मित यह जहाज भारत की समृद्ध समुद्री विरासत के पुनरुद्धार का प्रतीक है। मई 2025 में नौसेना में शामिल इस जहाज का नामकरण प्रसिद्ध नाविक कौंडिन्य के नाम किया गया है। यह जहाज, हिंद महासागर में भारत की ऐतिहासिक समुद्री परंपराओं और सभ्यतागत सम्बंधों का प्रतीक है।

