सामुदायिक जल निगरानी के लिए जल जीवन मिशन के अंतर्गत फील्ड टेस्ट किट

@ नई दिल्ली :-

जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल की गुणवत्ता की निगरानी के लिए सामुदायिक स्तर पर फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) को बढ़ावा दिया जा रहा है। इनका उपयोग गांवों, विद्यालयों और आंगनवाड़ी केंद्रों सहित वितरण केंद्रों पर किया जाता है और सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) एवं व्यवहार परिवर्तन संचार (बीसीसी) गतिविधियों को संचालित करने में भी किया जाता है।

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों/पानी समितियों, स्वयं सहायता समूहों और अन्य सामुदायिक स्वयंसेवकों के प्रशिक्षित सदस्यों को पेयजल स्रोतों और घरेलू नल के पानी की आवधिक जांच के लिए फील्ड टेस्ट किट का उपयोग करने हेतु प्रोत्साहित किया जाता है। अनुभव से पता चलता है कि फील्ड टेस्ट किट सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने, पेयजल की गुणवत्ता के बारे में जागरूकता बढ़ाने और संदूषण के बुनियादी संकेतकों की शीघ्र पहचान करने में प्रभावी साबित हुए हैं। सामुदायिक स्तर पर परीक्षण एक प्राथमिक स्तर की जांच प्रक्रिया के रूप में कार्य करता है और जल गुणवत्ता निगरानी में स्थानीय भागीदारी को मजबूत करता है।

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा जल गुणवत्ता प्रबंधन सूचना प्रणाली पर दी गई रिपोर्ट के अनुसार 12 मार्च 2026 तक लगभग 24.80 लाख महिलाओं को जल गुणवत्ता परीक्षण उपकरणों का उपयोग करके प्रशिक्षित किया जा चुका है।इसके अलावा, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा जल गुणवत्ता प्रबंधन सूचना प्रणाली  पर दी गई रिपोर्ट के अनुसार, 12 मार्च, 2026 तक 2025-26 के दौरान लगभग 47.59 लाख जल नमूनों का परीक्षण गुणवत्ता परीक्षण उपकरणों का उपयोग करके किया गया है और 2024-25 के दौरान लगभग 93.84 लाख जल नमूनों का परीक्षण गुणवत्ता परीक्षण उपकरणों का उपयोग करके किया गया था।

गुणवत्ता परीक्षण उपकरण के माध्यम से प्राप्त परिणाम सांकेतिक स्क्रीनिंग परिणामों के रूप में कार्य करते हैं और प्रयोगशालाओं में पुष्टिकरण परीक्षण द्वारा इनकी पुष्टि की जाती है। गुणवत्ता परीक्षण के दौरान प्रतिकूल परिणाम आने की स्थिति में, जल के नमूने एकत्र करके मानक प्रयोगशाला विधियों का उपयोग करके पुष्टि के लिए निकटतम पेयजल परीक्षण प्रयोगशाला में भेजे जाने आवश्यक हैं।

जल जीवन मिशन के अंतर्गत स्थापित राज्य, क्षेत्रीय, जिला, उप-मंडल और ब्लॉक स्तर की प्रयोगशालाओं का नेटवर्क परीक्षण परिणामों के सत्यापन और विश्वसनीयता को सुनिश्चित करता है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को संदूषण के पैटर्न, स्थानीय संदूषण की पहचान करने, संवेदनशील स्रोतों को प्राथमिकता देने और निवारक एवं उपचारात्मक उपायों की योजना बनाने के लिए प्रयोगशाला परीक्षण डेटा के साथ ऐसी जानकारी संकलित और विश्लेषण करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

जल जीवन मिशन के अंतर्गत जारी परिचालन दिशा-निर्देशों में पेयजल परीक्षण हेतु नियमित सामुदायिक स्तर पर फिल्ड टेस्ट किट परीक्षण का प्रावधान है और अनुवर्ती कार्रवाई निर्धारित की गई है। टेस्ट किट परीक्षण में संदूषण पाए जाने की स्थिति में, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को पुष्टिकरण प्रयोगशाला परीक्षण कराना और उपयुक्त सुधारात्मक उपाय जैसे कि कीटाणुशोधन, स्रोत का उपचार, वैकल्पिक सुरक्षित स्रोतों की व्यवस्था या उपचारात्मक उपाय, लागू होने के अनुसार, शुरू करना अनिवार्य है।

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को नियमित प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण कार्यक्रम और टेस्ट किट परीक्षण के उचित दस्तावेज़ीकरण को सुनिश्चित करने की भी सलाह दी गई है ताकि व्यवस्थित अनुवर्ती और प्रतिक्रिया तंत्र को सुदृढ़ किया जा सके। जल शक्ति राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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