@ जोधपुर राजस्थान :-
12 सितम्बर, 2025 को “भारत की सीमा सुरक्षा और चुनौतियाँ” विषय पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला फ्रंटियर मुख्यालय, सीमा सुरक्षा बल, जोधपुर में संपन्न हुई। इस कार्यशाला में राष्ट्रीय सुरक्षा के विविध पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श हुआ तथा रणनीतिक समाधान हेतु नीति, पत्रकारिता, शैक्षणिक जगत एवं सुरक्षा अनुभवों से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

इस अवसर पर एम.एल. गर्ग, महानिरीक्षक, फ्रंटियर मुख्यालय, सीमा सुरक्षा बल, जोधपुर ने उपस्थित सभी गणमान्य वक्ताओं और अधीनस्थ क्षेत्रीय मुख्यालय एवं वाहिनियों के अधिकारियों का हार्दिक स्वागत किया।
कार्यशाला में निम्न प्रमुख वक्ता उपस्थित रहें –
1. सुहाशिनी हैदर – द हिंदू की डिप्लोमैटिक एडिटर।
2. प्रो. डॉ. एस.एस. चौलिया – डीन, जिंदल स्कूल ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स।
3. एस.के. सूद – पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक, सीमा सुरक्षा बल।
4. बी.एन. शर्मा – पूर्व महानिरीक्षक, सीमा सुरक्षा बल।
5. कीर्ति चक्र से सम्मानित एन.एन.डी. दुबे – पूर्व उप महानिरीक्षक, सीमा सुरक्षा बल।
6. डॉ. आर.के. अरोड़ा – संस्थापक बॉर्डरमैन, पूर्व कमांडेंट, सीमा सुरक्षा बल।
विशेषज्ञों ने समसामयिक चुनौतियों का विश्लेषण करते हुए प्रभावशाली समाधान प्रस्तुत किए। मुख्यतः चर्चा के विषय रहे: अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं की जटिलताएँ, सीमा पर अपराध पैटर्न, तस्करी, अवैध आवागमन तथा इनसे उत्पन्न सुरक्षा खतरों पर व्यापक विचार-विमर्श।

कार्यशाला में भविष्य में सीमा पर घटित होने वाली संभावित घटनाओं एवं चुनौतियों, बदलते वैश्विक परिदृश्य, साइबर-खतरे, ड्रोन गतिविधियाँ तथा पड़ोसी देशों की नीतियों के सीमाई सुरक्षा पर प्रभाव पर भी चर्चा की गई। साथ ही जम्मू, नियंत्रण रेखा (LoC) और कश्मीर की सीमाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर क्षेत्र की संवेदनशीलता, सीमा पार घुसपैठ, आतंकी गतिविधियाँ और स्थानीय सहयोग के महत्व पर बल दिया।
विशेष रूप से “ऑपरेशन सिंदूर” की सफलताओं, उसमें लागू की गई रणनीतियों और वहाँ से मिली सीखों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। वक्ताओं ने ऑपरेशन सिंदूर के प्रभावी संचालन, खुफिया साझेदारी और ग्राउंड-लेवल सर्विलांस के मॉडल को भविष्य की रणनीतियों में अपनाने की सिफारिश की।
एम.एल. गर्ग ने अपने संबोधन में देश की सीमाओं की रक्षा हेतु नवाचार तथा व्यावहारिक रणनीतियों को अपनाने पर बल दिया और प्रतिभागियों से सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाकर समाधान खोजने का आग्रह किया।

