@ नई दिल्ली :-
मानव शरीर प्रकृति की एक अद्वितीय कृति है, जिसमें प्रत्येक अंग अपनी विशिष्ट भूमिका निभाते हुए जीवन की निरंतरता सुनिश्चित करता है। इस जटिल तंत्र में लीवर (यकृत) का स्थान अत्यंत केंद्रीय है। यह न केवल शरीर का दूसरा सबसे बड़ा अंग है, बल्कि अपने बहुआयामी कार्यों के कारण जीवन-चक्र का मौन संचालक भी है। इसी महत्व को रेखांकित करने के लिए प्रतिवर्ष 19 अप्रैल को विश्व लीवर दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमें अपने इस अनमोल अंग के प्रति जागरूक होने और उसके संरक्षण का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है।

लीवर वास्तव में शरीर की ‘रासायनिक प्रयोगशाला’ है, जहां 500 से अधिक जैव-रासायनिक प्रक्रियाएं निरंतर चलती रहती हैं। यह भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करता है, विषैले तत्वों को निष्क्रिय करता है, पित्त का निर्माण करता है, रक्त को शुद्ध करता है और आवश्यक प्रोटीन व एंजाइम का उत्पादन करता है। सरल शब्दों में, यह शरीर के भीतर एक सतर्क प्रहरी की तरह हर क्षण स्वास्थ्य की रक्षा करता है।
लीवर पेट के दाहिने ऊपरी भाग में स्थित होता है और इसका वजन लगभग 1.3-1.5 किलोग्राम होता है। इसे ‘पावर हाउस’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह शरीर की ऊर्जा, पाचन और शुद्धिकरण प्रणाली का केंद्र है। इसकी सबसे विलक्षण विशेषता इसकी पुनर्जीवन (Regeneration) क्षमता है। यदि इसका बड़ा हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो जाए, तो यह स्वयं को पुनः विकसित कर सकता है। यही गुण इसे अन्य अंगों से अलग और अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।
शराब लीवर के लिए अत्यंत हानिकारक है, क्योंकि इसका प्रसंस्करण सीधे लीवर में होता है। यह एसीटैल्डिहाइड जैसे विषैले पदार्थ बनाकर लीवर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। लगातार शराब पीने से फैटी लीवर, हेपेटाइटिस और अंततः सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।शुरुआत में लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन धीरे-धीरे लीवर की कार्यक्षमता कम होती जाती है। एक बार सिरोसिस हो जाने पर स्थिति को पूरी तरह ठीक करना संभव नहीं होता। इसलिए सबसे सुरक्षित उपाय शराब से दूरी बनाना है। स्वस्थ लीवर के लिए खानपान में संयम और जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
तंबाकू और सिगरेट को अक्सर केवल फेफड़ों से जुड़ी समस्या माना जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि इनका प्रभाव लीवर (यकृत) पर भी उतना ही खतरनाक होता है। यह नुकसान धीरे-धीरे होता है और कई बार देर से सामने आता है। सिगरेट में मौजूद निकोटिन, टार और अन्य विषैले रसायन रक्त के माध्यम से लीवर तक पहुंचते हैं। लीवर का मुख्य कार्य इन हानिकारक तत्वों को शरीर से बाहर निकालना होता है, लेकिन लगातार एक्सपोजर के कारण उस पर अतिरिक्त दबाव पड़ने लगता है। इसके परिणामस्वरूप लीवर की कोशिकाएं (हेपेटोसाइट्स) क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, जिससे उसकी कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम हो जाती है। लगातार तंबाकू सेवन से लीवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विशेष रूप से, धूम्रपान करने वालों में हेपाटोसेलुलर कार्सिनोमा (लिवर कैंसर) का जोखिम अधिक होता है, खासकर उन लोगों में जो पहले से हेपेटाइटिस B या C से संक्रमित है।
आधुनिक जीवनशैली और संक्रमण के कारण लीवर से जुड़ी कई गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। 1. फैटी लीवर (MASLD) – लीवर में अत्यधिक वसा जमा होने से यह स्थिति उत्पन्न होती है। मोटापा, मधुमेह, खराब खान-पान और निष्क्रिय जीवनशैली इसके मुख्य कारण हैं। 2. हेपेटाइटिस-यह लीवर की सूजन है, जो मुख्यतः वायरस (A, B, C, D, E) के कारण होती है। हेपेटाइटिस B और C लंबे समय में गंभीर रूप ले सकते हैं। 3. सिरोसिस- यह एक अपरिवर्तनीय अवस्था है, जिसमें लीवर की कोशिकाएं नष्ट होकर स्कार टिश्यू में बदल जाती हैं। शराब और क्रोनिक संक्रमण इसके प्रमुख कारण हैं। 4. लीवर कैंसर (HCC)- यह अक्सर सिरोसिस या लंबे समय के हेपेटाइटिस संक्रमण के बाद विकसित होता है और प्रारंभिक अवस्था में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते।
आज की जीवनशैली लीवर के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और फ्रुक्टोज: सॉफ्ट ड्रिंक्स और जंक फूड लीवर में वसा बढ़ाते हैं। मोटापा और मेटाबोलिक सिंड्रोम: इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण फैटी लीवर का खतरा। दवाओं का अति-प्रयोग (Polypharmacy): विशेषकर पैरासिटामोल का ओवरडोज खतरनाक सिद्ध हो रहे हैं।
लीवर की बीमारियां अक्सर ‘मूक’ होती हैं, लेकिन कुछ संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। प्रारंभिक लक्षण-लगातार थकान।भूख में कमी।मतली या उल्टी। पेट के दाहिने हिस्से में भारीपन। गंभीर लक्षण-पीलिया (त्वचा/आंखों का पीला पड़ना)।पेट में सूजन (एसाइटिस) पैरों में सूजन। गहरे रंग का मूत्र और फीका मल। मानसिक भ्रम (हेपेटिक एन्सेफैलोपैथी) ये खराब लीवर के मूल लक्षण हैं।
लीवर को स्वस्थ रखने के लिए जीवन शैली में सुधार सबसे प्रभावी उपाय है। संतुलित आहार: फल, सब्जियां, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स। नियमित व्यायाम: सप्ताह में कम से कम 150 मिनट। वजन नियंत्रण: 7-10% वजन घटाना भी लाभकारी। शराब और दवाओं से सावधानी। टीकाकरण: हेपेटाइटिस A और B से बचाव।नियमित जांच: LFT, अल्ट्रासाउंड, फाइब्रोस्कैन। आदि जांच से समय रहते बीमारी की गंभीरता का पता लगाया जा सकता है।
हेपेटोलॉजी में तेजी से प्रगति ने उपचार को अधिक प्रभावी बना दिया है। हेपेटाइटिस C का इलाज: नई दवाओं से 95% तक सफलता। नॉन-इनवेसिव जांच: फाइब्रोस्कैन और MRI तकनीक। लीवर ट्रांसप्लांट: बढ़ती सफलता दर और लिविंग डोनर विकल्प। स्टेम सेल थेरेपी: भविष्य की एक आशाजनक संभावना के रूप में उभर रही है।
लीवर हमारे शरीर का मौन प्रहरी है, जिसकी सुरक्षा हमारे अपने हाथों में है। संतुलित आहार, सक्रिय जीवन शैली, नशे से दूरी और नियमित जांच ये सभी मिलकर लीवर को स्वस्थ बनाए रखते हैं। विश्व लीवर दिवस हमें यही संदेश देता है कि यदि हम अपने इस अदृश्य रक्षक का ध्यान रखें, तो यह जीवन भर हमारी रक्षा करता रहेगा। स्वस्थ लीवर ही एक ऊर्जावान, संतुलित और दीर्घायु जीवन की कुंजी है।
लीवर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित जीवन शैली सबसे जरूरी है। अपने आहार में ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर शामिल करें, जबकि तला-भुना, मीठा और प्रोसेस्ड भोजन सीमित रखें। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट नियमित व्यायाम करें और वजन नियंत्रित रखें, इससे लीवर में वसा जमाव कम होता है। शराब से दूरी बनाए रखें, क्योंकि यह लीवर को सीधा नुकसान पहुंचाती है। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं का सेवन न करें, खासकर दर्द निवारक दवाओं का। हेपेटाइटिस A और B का टीकाकरण करवाना और स्वच्छता का ध्यान रखना भी जरूरी है। समय-समय पर लीवर की जांच कराते रहें, ताकि किसी समस्या का समय रहते पता चल सके। अनुशासित दिनचर्या ही स्वस्थ लीवर की सबसे बड़ी कुंजी है। यह आलेख जीबी पंत अस्पताल के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. अशोक दलाल से हुई विस्तृत बातचीत और उनके चिकित्सकीय अनुभवों पर आधारित है।
